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उर्से रजवी के जायरीन पर पुलिस का जुल्म

दरगाह आला हज़रत
बरेली शरीफ

  • उर्से रजवी के जायरीन पर जुल्म करने वाले पुलिस कर्मियों पर कार्यवाई करें उच्चअधिकारी:सज्जादानशीन ।

जगह जगह बैरियर लगा कर जायरीन का उत्पीड़न कर बरेली शहर को उपद्रव की आग में झोकने की नापाक कोशिश की है प्रशासन ने।

मुकदमे कायम कर के यदि जायरीन का उत्पीड़न किया गया तो प्रशासन के विरुद्ध जन आन्दोलन करने पर भी विचार किया जाएगा: सज्जादानशीन।

सीओ और शहामतगंज पुलिस चौकी इंचार्ज के विरुद्ध हो शहर में दंगा भडकाने की कार्यवाई।

कल उर्स-ए-रज़वी में शरीक होने आ रहे अकीदतमंदो के साथ पुलिस बल ने जो बर्बरतापूर्ण अभद्र व्यवहार किया उन पर लाठीचार्ज किया ओर उन्हे उकसाया और फिर उन्ही के विरुद्ध मुकदमे कर उन्हे जेल भेजने और उनके घरों पर दबिशे देकर उन्हे भयभीत करने की पुलिसिया कार्यवाहियों से आहत मरकज़े अहल-ए-सुन्नत दरगाह आला हज़रत के सज्जादानशीन हज़रत मुफ्ती अहसन मियॉ ने अपने गमो गुस्से का इजहार करते हुए कहा कि शहामतगंज में उर्स के दिन पुलिस बल ने अमनपसंद शहरियों और भोले भाले जाएरीन के साथ जो बर्बरतापूर्वक व्यवहार किया उसकी मरकजे अहल-ए-सुन्नत खानकाहे रज़विया दरगाह आला हज़रत की ओर से कड़े शब्दों में निंदा की जाती है।
हज़रत मुफ्ती अहसन मियॉ ने बताया कि ज़िला प्रशासन ने इस साल भी उर्स ए रज़वी में कम संख्या में ही लोगों को शामिल करने की सहमति दी थी और इसी कारण हमने अपने पोस्टर के माध्यम से अकीदतमंदो को यही कहा था कि वह बरेली शरीफ ना आकर अपने अपने घरों,छेत्रों ही में कुल कर ले। सब ने यह बात मान भी ली थी मगर इसी दौरान उर्स से दो-चार दिन पहले शादी-विवाह और दीगर प्रोग्रामों से मुताल्लिक पाबन्दियाँ ख़त्म करने को लेकर लखनऊ से हुकूमत द्वारा एक शासनादेश जारी किया गया जो मीडिया और सोशल मीडिया के ज़रिए से फैलना शुरू हो गया है। जिससे आम लोगों में यह मैसेज चला गया कि उर्स रजवी पहले की तरह होगा। फिर इसी दरमियान कुछ गैर जिम्मेदार लोगो के यह बयान भी सोशल मीडिया पर जारी हो गये कि उर्स मे आने पर कोई पाबंदी नही है। इसके अतिरिक्त उर्स के पहले दो दिनो मे भी प्रशासन ने जाएरीन के उर्स में सम्मिलित होने पर कोई रोकथाम नही की जिस के कारण बरेली और बरेली के आस-पास के छेत्रों में रहने वाले आला हज़रत के चाहने वालो को यकीन हो गया कि उर्स मे सम्मिलित होने की आम इजाजत है।
इस तरह प्रशासन की ढुलमुल निति के कारण अनुयायी आखिरी दिन काफी संख्या में उर्स स्थल की ओर उम॔ड पडे। इसमें इन आने वालों का कोई कुसुर नही। कुसुर है तो जिला प्रशासन का कि जिसने उर्स के दो दिन तो मौनव्रत धारण किये रखा फिर अचानक एसा किया हुआ कि जिला प्रशासन ने आनन फानन में गुपचुप तरीके से पूरे शहर की नाकाब॔दी कर दी और हर जगह बैरियर बना कर उन्हे रोका गया जबकि उर्स स्थल इस्लामिया मैदान खाली रहा अगर ज़ायरीन को इस्लामिया मैदान आने दिया जाता तो इस तरह के हालात पैदा न होते। ज़ायरीन को सख्त गरमी मे भूखे प्यासे धूप में इन्हे खडा रखा गया मस्जिदों के इमाम व उलेमा के साथ अभद्रता की गई। अमर्यादित भाषा का प्रयोग किया गया और इससे भी जब जी ना भरा तो सीओ साद मियां और शहामतग॔ज पुलिस चौकी इंचार्ज ने इन भुखे प्यासे अनुयाइयों पर लाठीचार्ज कर के पूरे शहर को आग में झोकने और उसका ठीकरा आला हज़रत के अकीदत म॓दो के सर फोडने का नापाक काम किया।
यह भी जांच का विषय है कि यह सीओ साद मियां वहाबी तो नही जिसने आलाहज़रत के उर्स को बदनाम करने के लिये यह साजिश रची हो। जिन पर मुकदमे हुए हैं यदि उनका उत्पीड़न हुआ,या मुकदमे वापिस ना लिये तो देशभर के लाखों आला हज़रत के अक़ीदतमंद जेल जाने को तैयार है। जरुरत पडी तो देश भर में बडा आन्दोलन भी करेगें।

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