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ईद मिलादुन्नबी ‘वर्ल्ड पीस डे’ के रूप में मनाने की अपील।*

दरगाह आला हज़रत
बरेली शरीफ

*दरगाह-ए-आला हज़रत के सज्जादानशीन मुफ्ती अहसन रज़ा क़ादरी (अहसन मिया) ने सभी आशिके रसूल को नबी-ए-करीम के यौमे विलादत को “वर्ल्ड पीस डे” के रूप में मनाने की अपील करते हुए कहा कि अल्लाह ने हमारे नबी को सिर्फ मुसलमानों के लिए ही नही बल्कि सारे आलम के लिए रहमत बनाकर भेजा। आपने इंसानों के साथ चरिन्दो-परिन्दों(पशु-पक्षियों) के हक़ में भी आवाज़ बुलन्द की। अगर आपकी तालीमात पर मुसलमान सख्ती से अमल कर ले तो दुनियाभर में अमन-ओ-सुकून कायम हो जाये। आज से चौदह सौ साल पहले आपने बेटी बचाने का संदेश दिया। शराब,ज़िना (बलात्कार),सूद जैसी सामाजिक बुराइयों को हराम करार दिया। इल्म सीखने और सिखाने पर जोर दिया। पड़ोसियों के हुकूक बताते हुए कहा कि पड़ोसी चाहे किसी भी मज़हब का हो उसकी परेशानी में मदद का हुक़्म दिया।*
मीडिया प्रभारी नासिर कुरैशी ने बताया कि मुफ्ती अहसन मियां ने सभी को ईद मिलादुन्नबी की मुबारकबाद देते हुए कहा कि शहर भर की सभी अंजुमने जुलूस-ए-मोहम्मदी में बेहद सादगी के साथ शामिल हो। *डीजे व साउंड को लेकर हरगिज़ न आये। डीजे व साउंड में खर्च होने वाली रकम से किसी गरीब लड़की की शादी का इंतज़ाम करा दे। गरीबों व यतीमों के लिए खाना व कपड़े दिला दे। तालिबे इल्म (छात्र) के लिए किताबों व फीस,बीमारों को दवाई मुहैय्या करा दे।* यही हमारे इस्लाम और यही हमारे नबी का पैगाम है।
*मुफ्ती सलीम नूरी बरेलवी व अंजुमन खुद्दाम-ए-रसूल के सचिव शान रज़ा ने कहा है कि ईद मिलादुन्नबी के मौके पर घरों व मस्जिदों को झंडों व लाइटों से सजाएं। शरीअत के दायरे में रहकर ईद मिलादुन्नबी की खुशियां मनाएं। मिलाद की महफिल सजाएं। सभी अंजुमनों से अपील करते हुए कहा कि सभी लोग वक़्त पर हाथो में छोटी छोटी तख्तियां लेकर जिसमें इस्लाम व पैगम्बर ए इस्लाम की तालीमात लिखी हो जैसे “नमाज़ कायम करो, इल्म सीखो और सिखायो,बेटी बचाओ,नशा हराम,पानी बचाओ,कुरान की तालीम आम करो,झगड़ा फसाद से बचो जैसे स्लोगन के साथ जुलूस में शामिल हो।*
टीटीएस के राष्ट्रीय कार्यकारिणी सदस्य *शाहिद नूरी,अजमल नूरी व परवेज़ नूरी कहा कि प्रशासन की गाइडलाइन का पालन करते हुए पुरअमन तरीके से तयशुदा लोगों व रास्तों से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकालें।* औररंगज़ेब नूरी व ताहिर अल्वी ने कहा कि जुलूस में दीनी पोस्टर या किसी मजार जैसे गुंबदे खज़रा की बेहुरमती न हो इस बात का पूरा ख्याल रखा जाए। जुलूस में लोग इस्लामी लिबास, अमामा शरीफ व इस्लामी टोपी में सादगी के साथ शिरकत करें।
बैठक में मौलाना ज़ाहिद रज़ा, मौलाना बशीरुल क़ादरी,ज़हीर अहमद,हाजी जावेद खान,सय्यद एजाज़,सुहैल रज़ा, काशिफ खान,आसिफ रज़ा,आरिफ रज़ा, फ़ैज़ खान,मंज़ूर खान,सय्यद फैज़ान अली,आलेनबी, तारिक सईद,इशरत नूरी,ज़ोहिब रज़ा, गौहर खान,हाजी शारिक नूरी,समीर रज़ा, अदनान खान,सबलू अल्वी,इरशाद रज़ा, काशिफ सुब्हानी,साकिब रज़ा,सय्यद माज़िद अली,ज़ीशान क़ुरैशी, मुजाहिद बेग,शाद रज़ा, साजिद नूरी,खलील क़ादरी,शारिक बरकाती,मोहसिन रज़ा,तहसीन रज़ा, सय्यद फ़रहत,जुनैद मिर्ज़ा,निककी बेग आदि लोग शामिल रहे।

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