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विधायक ने किसान आंदोलन के समर्थन मे अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला- कहा अडानी अम्बानी ने पहले ही बडे बड़े गोदाम शायद इसीलिए बना रखा है- अमर सिंह चौधरी विधायक

सिद्धार्थनगर 17 मार्च। भाजपा सरकार के साझा दल अपनादल एस के विधायक अमर सिंह चौधरी ने आन्दोलनरत किसानो के समर्थन मे अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होने मीडियासे बात करते हुए कहा किसान बिल मे खोट न होता अम्बानी अडानी कई राज्यो मे साल भर पहले से गोदाम नही बनाते।

सिद्धार्थनगर जिले के शोहरतगढ़ से भाजपा की साझा पार्टी अपना दल एस के विधायक अमर सिंह चौधरी भी किसान आंदोलन के समर्थन मे आ गये है। इनका कहना है कि मैं भी किसान हू मुझे भी किसानों के हक में बोलने का अधिकार है। किसानी मेरा पेशा है राजनीति नही। किसानों के नजर में इस किसान बिल में खोट नजर आ रहा है। उन्होंने  मोदी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा कि किसानों के दम पर ही देश प्रदेश में सरकार बनी है । जो सरकार बनाये थे वही आज नाराज है। इससे कही न कही सरकार का अड़ियल रुख है। सरकार को किसानों की बात माननी चाहिये।

अमर सिंह चौधरी विधायक अपनादल एस ने कहा कि मैं किसान का बेटा हु। किसानी ही मेरी बपौती है। राजनीति मेरी बपौती नही है। सबसे पहले मेरा जो धरोहर है जिससे  ये देश जाना जाता है। अन्नदाताओ के बदौलत ये कृषि प्रधान देश है। यहाँ के लोग जो कृषक है अन्नदाता है। जब इनके ऊपर बात है तो हम भी किसान है हम अपने किसान भाइयों के हक की बात रखने का हक रखते है। किसान बिल पर सरकार यह कह रही है की किसानों का इससे फायदा है जो हमारे किसान भाई है किसान नेता है किसानों के लिए लड़ने का काम करते है उनके नजर में कही न कही इस बिल में खोट है। देश की सरकार व देश के मुखिया प्रधानमंत्री वचनबद्ध है की हम किसानों की आय दूगनी करंगे।  किसानों को उन्नत शील करेंगे। कही न कही हमारे किसानों के मन मे ये बाते आ रही जैसे हरियाणा पंजाब व अन्य राज्यों के किसान है, जो किसानों के नेता है और राजनीति से परे है वे लोग ये सोचे की कही न कही इस विल में खोट है। तो मैं कहता हूँ की 2014 में महंगाई को लेकर बेरोजगारी को लेकर किसान मुद्दे को लेकर भ्रष्टाचार को लेकर उत्तर प्रदेश और देश मे एनडीए की सरकार बनी तो जनता खुश हुई अच्छा किया । फिर 2019 का चुनाव हुआ उस से बढ़ कर जनता ने आप की सरकार को बहुमत दिया। जनता खुश थी आज जब किसान बिल आ गया तो वही  जनता जो आप से खुश थी आज वे नाराज हो गई।तो इनको यह सोचना चाहिए की कही न कही इस बिल में खोट है  किसान विरोध कर रहा है।  इस पर अमल करना चाहिए और किसानों को बैठा कर दिखा दे कि इसमें क्या विसंगती है? लेकिन वह दिखा नही रहे। कई मर्तवा सरकार  की तरफ से किसानों की बैठक हुई लेकिन कुछ हल नही निकला और अब तक आंदोलन चल रहा है। मैं बस एक ही बात कहना चाहता हूं किसान होने के नाते की हमे जो चीजें नही चाहिए हम आप से वैसे भी खुश है हम आप को सरकार में ला रहे है फिर आप ज़बरदस्ती क्यों हमे दे रहे है? हम पुराने वाले से खुश है नई बिल से नही खुश है।किसानों को शका इस लिए आ रही है  जो भारत के उद्योग पति है अडानी अम्बानी जैसे लोग पानी पत से लेकर गुजरात तक बड़े बड़े गोडाउन पहले से कैसे बना रखा है? ये किसके लिए बना रखा है? तो इससे शंका लग रहा है की किसानों की जमीने लीज पर ली जायेगी। किसानों को बंधक बनाया जायेगा। आने वाले समय मे किसान बंधक बन जाएंगे। बगैर उनकी मर्जी के ना कोई खरीदार रहेगा ना कोई बेचने वाला ना कोई लेने वाला न कोई पूछने वाला। तो इससे शंका रहता है की देश की जनता प्रदेश की जनता देश का किसान गांव के किसान एनडीए सरकार से खुश होकर बहुमत पर बहुमत बढ़ाये जा रहे है

हम जबर्दस्ती नही चाहते हम वैसे ही खुश है हमारे ऊपर क्यों मार रहे। हमे नही चाहिए हम वैसे ही खुश है हमको उस बिल से तरक्की नही चाहिए। तो हमें ऐसा लगता है की सवा सौ करोड़ बनाम चार वाली सरकार है? चार उद्योगपति नाराज ना हो चाहे जनता किसान नाराज हो जाए तो बात नही। उनको तो जैसे तैसें बहला फुसला कर सरकार तो बना ही लेंगे ये नियत आ रही है हम किसान है राजनीति कोई बपोती नही है जो अच्छा लगेगा देगा जो अच्छा नही लगे न दे जनता देती है जनता जिताती है जनता के लिए मैं कटिबद्ध हु जनता के लिए जनता की बात मैं रखूंगा मैं किसान हूँ। अडाणी अम्बानी क्या जाने किसको खेती कहते है? किसको हरेरी कहते है किसको चारा कहते है किसको जंघा कहते किसको खोपी कहते है ये सब उनको क्या पता है किसान का मैं बेटा हूँ किसानी मेरी बपौती है किसानों के साथ मैं रहूंगा टिकट मिले या न मिले राजनीति में रहूँ या न रहूँ?

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