उत्तर प्रदेश

जनपद के कलाकार राहिल खान ऐतेहासिक कांड पर बन रही फिल्म “”प्रतिकार 1922 चौरी चौरा”” में गोरखपुर के सेशन जज एच.ई.होल्मस की भूमिका में आएंगे नजर

गोरखपुर । धोती, लुंगी, बनियान, सिर पर पगड़ी, ब्रिटिश पुलिस की प्रताड़ना की चेहरे और शरीर खिंची लकीरों के साथ ढेर सारे स्वतंत्रता संग्राम सेनानी। साथ में खाकी हाफ-पैंट शर्ट में ब्रिटिश पुलिस के सिपाही, लाल साफा में ब्रिटिश काल के चौकीदार। घनी मूछों और खाकी वर्दी में स्टार एवं पिस्टलधारी ब्रिटिश हुकूमत के दारोगा। इनकी चहलकदमी लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही थी। अरे यह क्या इलाहाबाद हाईकोर्ट बेंच पर मौजूद ब्रिट्रिश हुकूमत के जज एडवर्ड ग्रिम वुड मेयर्स सामने पंडित महामना मदन मोहन मालवीय। कटघरे में और आसपास खड़े कुछ क्रांतिकारी, तभी आवाज आती है टेक, एक्शन-मीलॉड इन्होंने ही थाने में आग लगाई थी। इन्हें मॉफी नहीं फंदे पर लटकाने का हुक्म जारी किया जाए।
यह सब चल रहा था योगीराज बाबा गंभीरनाथ महराज ऑडीटोरियम और उसके आसपास। जहां पर चौरीचौरा शताब्दी वर्ष के उपलक्ष में बनाई जा रही फिल्म 1922 प्रतिकार चौरीचौरा की 18 सितंबर से शूटिंग चल रही है। अंग्रेजी हुकूमत के समय गोरखपुर सेशन कोर्ट के जज एच. ई. होलम्स (आर्टिस्ट राहिल खान) द्वारा चौरीचौरा कांड के क्रांतिकारियों को सजा सुना दी गयी है। अब मामला हाईकोर्ट इलाहाबाद में चल रहा है। यहां अंतिम सुनवाई जज एडवर्ड ग्रिम वुड मेयर्स (आर्टिस्ट अजय मलकानी) की पीठ में चल रही है। अग्रणी पंक्ति के क्रांतिकारी, चौरीचौरा कांड की जांच कर रहे दारोगा अशफाक हुसैन खान (आर्टिस्ट अशोक बंथिया मनोज जोशी के सीरियल चाणक्य के आमात्य राक्षस फेम) मौजूद रहकर अपना पक्ष रख रहे हैं। उधर, बाबा राघवदास, वरिष्ठ अधिवक्ता पंडित महामना मदन मोहन मालवीय (आर्टिस्ट रविशंकर खरे, भारतेंदु नाट¬ एकेडमी लखनऊ के अध्यक्ष) क्रांतिकारियों का पक्ष बड़े ही जोरदार तरीके से रख रहे हैं। पंडित महामना मदन मोहन मालवीय ने निचली अदालत से फांसी की सजा पाये 172 क्रांतिकारियों में से 151 को अपनी दलीलों के माध्यम से बचा लिया। इनमें से 19 को फांसी की सजा हुई जबकि तीन क्रांतिकारियों की सुनवाई के दौरान ही मौत हो गयी थी । फिल्म को डायरेक्ट कर रहे हैं इलाहाबाद के रहने वाले अभिक भानू। इनके सहयोगी के रूप में कलाओं को सीख रहे असिस्टेंट डायरेक्टर गोरखपुर के अनुभव शर्मा एक-एक बिंदु पर कलाकारों को एक्शन बता रहे थे। मुख्य क्रांतिकारी की भूमिका में सदर सांसद रवि किशन शुक्ल हैं जिन्हें भगवान अहीर का रोल अदा करने की जिम्मेदारी है।
चौरीचौरा कांड
गांधी जी द्वारा छेड़े गये असहयोग आंदोलन के दौरान 4 फरवरी 1922 को ब्रिाटिश भारत में संयुक्त राज्य के गोरखपुर जिले के चौरीचौरा में हुआ था। प्रदर्शनकारियों के एक बड़े समूह ने संघर्ष के दौरान चौरीचौरा चौकी को फूंक दिया था। जिसमें तीन नागरिको समेत 22 पुलिसकर्मियों की मौत हो गयी थी। इस कांड में कुल 172 को सेशन कोर्ट ने फांसी की सजा सुनाई थी। बाबा राघवदास और पंडित मदन मोहन मालवीय द्वारा हाईकोर्ट में पक्ष रखा गया। नतीजा रहा कि 150 क्रांतिकारियों को फांसी की सजा से बचा लिया गया। भगवान अहीर समेत 19 को फांसी की सजा दी गयी। केस की सुनवाई के दौरान तीन क्रांतिकारियों ने दम तोड़ दिया था।
फिल्मों की शूटिंग के लिए यूपी में अच्छा अवसर
1922 प्रतिकार चौरीचौरा को डायरेक्ट कर रहे अभिक भानू ने कहा कि यूपी में फिल्मों को शूट करने के लिए अच्छा अवसर मिल रहा है। अच्छी फिल्मों के लिए योगी सरकार लागत में 25 प्रतिशत की छूट दे रही है। गोरखपुर शहर 8000 साल पुराना है लेकिन सीएम बनने के बाद योगी आदित्यनाथ ने इसे नई सोच के साथ शहर को डेवलप कर रहे हैं। फिल्मकारों को शासन के साथ ही स्थानीय प्रशासन का भी अच्छा सहयोग मिल रहा है। फिल्मों की शूटिंग के लिए गोरखपुर में बेहतर माहौल है और लोगों का अच्छा सहयोग मिल रहा है। फिल्म की 50 दिनों की कुल शूटिंग है जो कुसम्ही जंगल, बुढिया माई, गोला बाजार, राप्ती नदी के विभिन्न तट के साथ योगीराज बाबा गंभीरनाथ ऑडीटोरियम में बनाए गये सेट पर होनी है।

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