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जिलाजेल को जल्द ही मिलेगी ओवरक्राउडिंग से मुक्ति तकरीबन 86 करोड़ की लागत से संतकबीरनगर की जेल बनकर तैयार

जिलाजेल को जल्द ही मिलेगी ओवरक्राउडिंग से मुक्ति
तकरीबन 86 करोड़ की लागत से संतकबीरनगर की जेल बनकर तैयार

बस्ती जेल प्रशासन को शासन से हरी झंडी मिलने का इंतजार

बस्ती
मण्डल के संतकबीरनगर जिले के पुलिस लाइन रोड पर तकरीबन छियासी  करोड़ रुपए की लागत से बनकर तैयार हुई जेल में वहां के करीब 535 बंदियों को अब शीघ्र ही शिफ्ट किए जाने की तैयारियां की जा रही है। नई जेल में  शिफ्ट करने की अनुमति के लिए विभाग ने मुख्यालय में फाइल भेज दी है। अनुमति मिलने का इंतजार है। नई जेल में कैदियों के शिफ्ट होते ही एक ओर तो जेलकर्मियों को सुरक्षा की दृष्टि से राहत मिलेंगी, दूसरी ओर बस्ती जेल को ओवरक्राउडिंग से मुक्ति मिल जायेगी और वहाँ के कैदियों को भी अत्याधुनिक सुविधाओं का लाभ मिल सकेगा। वहां नवीन जेल का निर्माण लगभग सात वर्ष में  पूर्ण हो पाया है

खूंखार बंदियों के लिए अलग से सेल

करीब 44.179 एकड़ में बने नवीन जिला कारागार में खूंखार बंदियों के लिए अलग से व्यवस्था की गई है। जेल में  हार्डकोर बंदियों के लिए अलग से सेल बनाए गए है, जिसमें सुरक्षा की विशेष व्यवस्था के साथ दो दरवाजों के अंदर कैदी को रखा जाएगा। वहीं अन्य  बंदियों के लिए बैरक  भी सुविधा युक्त बनाई गई है।
जेल में महिला कैदियों को रखने के लिए अलग से बैरक के साथ उनका वार्ड भी अलग से बनाया गया है, जहां पर महिला बंदियों के रहने, खाने के साथ अन्य सुविधाएं सीमित दायरे में रहेगी। शासन के उच्च पदस्थ सूत्रों के मुताबिक़ बहुत शीघ्र ही संतकबीरनगर व इटावा ज़िले में नई जेल बनकर तैयार है कभी भी इनके लोकार्पण का आदेश आ सकता है

क्षमतासे तीन गुना अधिक रह सकेंगे बंदी

नई जेल में कैदियों को रखने की क्षमता 562 की बनायी गई है  बैरक लगभग 80-80 कैदियों की है फिर भी कैपेसिटी से तीन गुना बंदी रक्खे जा सकते हैं बंदियों के लिए जेल की चारदीवारी के अंदर ही मिनी हॉस्पिटल की सुविधा रहेगी, जिसमें एक डॉक्टर एक कंपाउण्डर बंदियों के स्वास्थ्य का परीक्षण करने के लिए लगाए जाएंगे। साथ ही बेडों की व्यवस्था भी कराई जाएगी। जेल में कंपाउण्डर के लिए भी एक क्वार्टर होगा। अभी बंदियों की शिफ्टिंग करने की अनुमति के लिए कारागार मुख्यालय में फाइल भेजी गई है। अनुमति मिलते ही बंदियों को शिफ्ट कर दिया जाएगा।

अदालत में पेशी पर जाने के लिए करना पड़ता है अस्सी किमी का सफ़र

जनपद संतकबीरनगर को चौबीस साल  बाद कैदियों को अपने जिले की जेल का सौगात मिलने वाला है फिलहाल उन्हें  लगभग ढाई दसक से हर पेशी पर हाजिर होने के लिए अस्सी किलोमीटर आनेजाने  का लंबा सफ़र तय करना पड़ता है  । संतकबीरनगर जिले के 1997 में सृजन के बाद बहुप्रतीक्षित निर्माणाधीन जिला जेल बहुत समस्याओं के बीच अंततः जेल के आरंभ होने की घड़ी अब करीब है आपराधिक मामलों में सजा काट रहे और मुकदमे के दौरान विचाराधीन कैदियों को रखने के लिए कोई जेल  संतकबीरनगर में नही है  इसलिए सारे कैदियों को पडोसी जनपद बस्ती  की जेल में रखा जाता है  । जिले के कैदियों को पेशी के दौरान बस्ती से प्रतिदिन दो वाहनों से लाया जाता है  जिसमे काफी दिक्कतें और धन लगता था । सुरक्षा और कैदियों की दिक्कतों को देखते हुए काफी लंबे समय से जिले में बनकर तैयार जेल को चलाने की प्रशासनिक कवायद शुरू हो गई है  । इस संबंध में पूछे जाने पर वरिष्ठ अधीक्षक कारागार दिलीप कुमार पाण्डेय ने बताया कि बस्ती जेल में संतकबीरनगर के लगभग 535 बंदी निरूद्ध हैं जिसमें 428  विचाराधीन बंदी ,66 सजायाफ्ता पुरूष कैदी हैं जबकि 28 विचाराधीन  बंदी और सात सजायाफ्ता महिला कैदी तथा उनके पाँच बच्चे भी जेल में हैं शासन से आदेश मिलते ही वहां के बन्दियों को यहां से शिफ्टिंग के लिए भेज दिया जाएगा

डिप्टी जेलर का बलिया तबादला

बस्ती जिलाकारागार में तैनात रहे उपकारापाल का जिला जेल बलिया तबादला हो गया है डिप्टी जेलर श्री सिंह को बलिया के लिए रिलीव कर दिया है इनके स्थान पर अभी किसी उपकारापाल की शासन से यहाँ तैनाती नहीं हो सकी है
इस बात की पुष्टि जेल सुप्रिंटेंडेंट दिलीप कुमार पाण्डेय ने की है

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