उत्तर प्रदेशलखनऊ

पूर्व छात्र सम्मेलन के साथ 103वां स्थापना दिवस आयोजित, स्टूडेंट्स को मिला सम्मान, बीते दौर की हुई रोचक चर्चा

लखनऊ:  लखनऊ विश्वविद्यालय ने कुलपति प्रोफेसर आलोक कुमार राय के नेतृत्व में अंतर्राष्ट्रीय पूर्व छात्र सम्मेलन के साथ अपना 103वां स्थापना दिवस मनाया। इस संयुक्त आयोजन में  केन्द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुई। कार्यक्रम की शुरुआत शाम 5:00 बजे संस्कृति निदेशक प्रोफेसर मधुरिमा लाल के मार्गदर्शन में विश्वविद्यालय के संकाय सदस्यों और छात्रों द्वारा प्रस्तुत सांस्कृतिक कार्यक्रम मगलाचरण से हुई। इसके बाद शाम-ए-अवध कार्यक्रम में प्रोफेसर मधुरिमा लाल ने बेगम अख्तर की गजल पेश की वहीं विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा कथक नृत्य प्रस्तुत किया गया।

इसके बाद विश्वविद्यालय के चार विद्यार्थियों द्वारा कथक की दूसरी विधा “जश्न-ए-महफ़िल” प्रस्तुत की गई। इसके बाद लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्रों द्वारा सूफी नृत्य प्रस्तुत किया गया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. किरणलता डंगवाल एवं डॉ. अनुपमा श्रीवास्तव ने किया। वहीं विश्वविद्यालय के  प्रोफेसर आलोक कुमार राय ने अपने संबोधन में मुख्य केन्द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी को धन्यवाद दिया। इस दौरान प्रो. राय ने कहा किसी भी विश्वविद्यालय की स्थापना एक दीर्घकालिक प्रक्रिया है। इसलिए किसी भी संस्थान और संस्कृति को समय-सीमा में बांधना उचित नहीं है और दोनों को संपूर्णता में देखना जरूरी है। वर्तमान में समय तेजी से बदल रहा है और समाज वैकल्पिक तौर-तरीकों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता का अवलोकन कर रहा है। कई प्रयास विरोधाभासी प्रतीत होते हैं जैसे हम विशिष्ट के साथ-साथ समावेशी भी चाहते हैं। लेकिन एक उत्कृष्ट संस्थान में विरोधाभासी विचारों के लिए विशिष्टता और समावेशिता के बीच तर्कसंगत संतुलन विकसित करने की क्षमता होती है ताकि यह फलदायी और सकारात्मक परिणाम दे सके।

कुलपति ने कहा उन्होंने कहा कि, विश्वविद्यालय का शोध गांव के अंदरूनी हिस्सों से लेकर चंद्रमा की खोज तक है जो भौगोलिक डेटा और अन्य महत्वपूर्ण मापदंडों को विकसित करने में सहायता करता है जो देश के किसानों की सहायता करते हैं। संस्था की भूमिका केवल शिक्षण और सीखने तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उसे समाज और मानव जाति की सहायता करनी चाहिए। इसके लिए विश्वविद्यालय की संस्कृति, शिक्षण और सीखने में महत्वपूर्ण परिवर्तन और सुधार की आवश्यकता है। यह देखना महत्वपूर्ण है कि संस्थान इस तरह के बदलाव के लिए तैयार है। उन्होंने कहा किसी संस्था की स्थापना और उद्देश्य तभी सार्थक हो सकता है जब वह समाज और मानव जाति से जुड़ा हो। यह तभी प्राप्त किया जा सकता है जब समय की आवश्यकता के अनुसार व्यापक अवधारणा और व्यापक कार्यान्वयन को विकसित करके समाज और उद्योग की मांग के अनुसार पाठ्यक्रम और पाठ्यचर्या विकसित की जाए।

लखनऊ विश्वविद्यालय में हमने सभी शैक्षिक कार्यक्रमों को सटीकता और सटीकता के साथ व्यवस्थित करने के लिए अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास किया। उन्होंने कहा कि इस विश्वविद्यालय की स्थापना के शताब्दी वर्ष में कुलपति के रूप में शामिल होने पर उन्हें गर्व महसूस हो रहा है। उन्होंने कहा कि उन्होंने इसके प्रतिष्ठित इतिहास को देखा और इसके गौरवशाली भविष्य का विश्लेषण किया। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ वर्षों के दौरान विश्वविद्यालय ने उत्कृष्टता की खोज में दो महत्वपूर्ण बिंदुओं पर ध्यान केंद्रित किया है। जिसमें पहला समाज के हर वर्ग को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और दूसरा इस यूनिवर्सिटी की पूरे विश्व में पहचान है।

विश्वविद्यालय की पहचान उम्र से नहीं बल्कि उपलब्धियों से है
कुलपति ने इस बात पर जोर दिया कि इस विश्वविद्यालय की पहचान इसकी उम्र से नहीं बल्कि समाज और देश के प्रति इसके योगदान के साथ-साथ इसकी विश्व स्तरीय उपलब्धियों से है। उन्होंने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय की सभी गतिविधियां छात्र केन्द्रित हैं और लखनऊ विश्वविद्यालय प्रदेश एवं देश के अन्य उच्च शिक्षा संस्थानों के विकास के लिये प्रतिबद्ध है। लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए यह महत्वपूर्ण है कि वह शिक्षा के क्षेत्र में अपनी महिमा और उत्कृष्टता से देश को गौरवान्वित करे। इस प्रक्रिया में विश्वविद्यालय अनुयायी से आरंभकर्ता में परिवर्तित हो गया।

एनईपी लागू करने में देश में एलयू का पहला स्थान
कुलपति ने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय एनईपी-2020 लागू करने वाला देश का पहला विश्वविद्यालय है। NAAC A++ मान्यता प्राप्त करने वाला यह राज्य का पहला विश्वविद्यालय है। साथ ही, एनआईआरएफ, क्यूएस और टीएचई रैंकिंग पाने वाला यह राज्य का पहला विश्वविद्यालय है। साथ ही, यह पहला विश्वविद्यालय है जिसने नियमित श्रेणी के तहत ऑनलाइन शिक्षा शुरू की थी। उन्होंने कहा कि, विश्वविद्यालय ने नीति आयोग, शिक्षा विभाग और अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। यूनिवर्सिटी ने 4 साल का यूजी प्रोग्राम, 1 साल का पीजी प्रोग्राम भी बताया था। इसने नया पीएचडी अध्यादेश और अंशकालिक पीएचडी कार्यक्रम विकसित किया था जिसका राज्य के अन्य विश्वविद्यालयों द्वारा पालन नहीं किया जाता है। इसके अलावा, विश्वविद्यालय ने कई छात्र केंद्रित कार्यक्रम जैसे कॉफी विद वीसी, छात्र ओपीडी, टीआरईई और अन्य कार्यक्रम शुरू किए थे। साथ ही, अनुसंधान प्रोत्साहन नीति, परामर्श नीति ने सार्थक परिणाम देना शुरू कर दिया था। हाल ही में विश्वविद्यालय के शिक्षा स्तर और माहौल को बेहतर बनाने के लिए 200 नए संकाय सदस्यों की भर्ती की गई है। साथ ही उन्होंने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय ने कृषि संकाय की स्थापना की है जिसके लिए राज्य सरकार ने जमीन भी स्वीकृत कर दी है. इसके अलावा, विश्वविद्यालय ने वैकल्पिक चिकित्सा विभाग की स्थापना की है जिसे हम एक संकाय के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रख रहे हैं। इसके अलावा, विश्वविद्यालय जल्द ही प्रदर्शन कला संकाय विकसित करने का लक्ष्य बना रहा है। अंत में उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय के क्षैतिज एवं ऊर्ध्वाधर विकास में सभी हितधारकों की सहायता आवश्यक है।

 यूनिवर्सिटी का मैं हमेशा कर्जदार रहूंगा-जस्टिस ए आर मसूदी 
लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र व वर्तमान में जस्टिस ए आर मसूदी ने कहा, मैं 1985 में कश्मीर के कुपवाड़ा से लखनऊ विश्वविद्यालय आया। मैं अपने गांव का पहले प्रयास में हाईस्कूल पास करने वाला शख्स रहा। 8वीं बाद ट्यूशन शुरू कर दिया। बीएससी करने के बाद जब कश्मीर यूनिवर्सिटी से एमएससी नहीं कर पाया। मसूदी ने कहा, मां की बचत के 1200 रुपए लेकर कश्मीर छोड़ दिया था। अलीगढ़ जब पहुंचा तो देर हो चुकी थी, किसी ने राय दी कि लखनऊ यूनिवर्सिटी में सेशन लेट से चलता है इसलिए वहां आपको प्रवेश मिल सकता है। उन्होंने कहा मां ने पैसे शर्ट के अंदर सिल दिए थे। यूनिवर्सिटी ने भले ही सत्र देर से शुरू किया पर मुझ जैसे विद्यार्थी को जगह दी है। लखनऊ विश्वविद्यालय से पढ़ने के बाद मुझे इस शहर और इस विश्वविद्यालय का कर्ज उतारने का मौका दिया।

हम चाहते हैं कि हमारे छात्र सिर्फ किताबी ज्ञान तक ही न सीमित रखें
इस मौके पर केन्द्रीय शिक्षा राज्य मंत्री अन्नपूर्णा देवी ने कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय एक सदी से भी अधिक समय से एक ऐसा वातावरण बना रहा है जहां विज्ञान, कला, वाणिज्य, इंजीनियरिंग और आधुनिक शिक्षा को एकीकृत किया जा सके। हम नहीं चाहते कि हमारे छात्र किताबी शिक्षा से गुजरें, बल्कि हम चाहते हैं कि वे अपने आत्मविश्वास और क्षमताओं से समृद्ध हों ताकि वे समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें। उन्होंने कहा कि, सभी को यह समझना चाहिए कि शिक्षा एक यात्रा है, जो न केवल पढ़ाई के स्तर के बारे में बल्कि व्यक्तिगत और सामाजिक विकास के बारे में भी होनी चाहिए। एक शैक्षणिक संस्थान में आपको नए दृष्टिकोण, सोचने के नए अवसर मिलते हैं, जो आपके जीवन को समृद्धि और सार्थकता की ओर आगे ले जाते हैं। उन्होंने सभी से आत्मनिर्भरता, अध्ययन और सहयोग की भावना के साथ नए सपनों की ऊंचाइयों की ओर बढ़ने की अपील की। हम सब मिलकर इस नए चरण में योगदान देंगे और लखनऊ विश्वविद्यालय को उत्कृष्टता का केंद्र बनाएंगे जो ज्ञान और तर्क की नई सीमाएं बनाएगा। उन्होंने सभी छात्रों से कहा कि वे अपनी पढ़ाई के प्रति समर्पित रहेंगे और अपने लक्ष्य को हासिल करने के लिए कड़ी मेहनत करेंगे। विश्वविद्यालय के साथ जुड़कर वे अपने ज्ञान, शोध और नैतिक मूल्यों से समृद्ध होंगे। साथ ही, उन्होंने कहा कि, इस विश्वविद्यालय में उन्हें नए दोस्त और नेतृत्व के अवसर मिलेंगे जो उनके भविष्य को बदलने में मदद करेंगे। उन्होंने कहा कि, यह गर्व की बात है कि लखनऊ विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र देश और दुनिया भर में महत्वपूर्ण पदों पर कार्यरत हैं। यह इस बात की स्वीकृति है कि हमारी शिक्षा और प्रशिक्षण की गुणवत्ता छात्रों को सशक्त बनाने में सफल रही है। साथ ही, इस विश्वविद्यालय के पूर्व छात्र विभिन्न क्षेत्रों में अपने प्रदर्शन और दक्षता के लिए पहचान हासिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि, वह उन सभी पूर्व छात्रों को सम्मानित करने में गर्व महसूस करती हैं जो नेतृत्व, उद्यमिता और अपनी अभिनव दृष्टि के माध्यम से समाज में अपनी छाप छोड़ रहे हैं।

पूर्व छात्रों को सम्मानित होते देखकर वर्तमान छात्र सीख लें- अनपूर्णा
केन्द्रीय राज्य मंत्री ने कहा कि, इन सभी पूर्व छात्रों को सम्मानित होते देख वर्तमान छात्रों को यह सीख लेनी चाहिए कि आने वाले समय में वे विभिन्न क्षेत्रों में सकारात्मक बदलाव लाएंगे और अपने विश्वविद्यालय का नाम और रोशन करेंगे। उनकी सफलता से हम नए उच्च मानकों की ओर बढ़ने के लिए प्रोत्साहित होंगे और उदाहरण स्थापित करेंगे कि अच्छी शिक्षा और नेतृत्व से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि स्थापना दिवस के इस शुभ अवसर पर विश्वविद्यालय की उत्कृष्टता पर चर्चा जरूरी है. किसी भी शैक्षणिक संस्थान के लिए अपने छात्रों को उत्कृष्टता की ओर प्रेरित करना एक महत्वपूर्ण पहलू है। विश्वविद्यालय का मिशन छात्रों को एक रचनात्मक, नैतिक और उदार मानव समाज का नेतृत्व करने के लिए तैयार करना है। हम गर्व के साथ कह सकते हैं कि लखनऊ विश्वविद्यालय इन लक्ष्यों को प्राप्त करने में सफल रहा है। यही कारण है कि हम सोच सकते हैं कि हमारे छात्र नए और उत्कृष्ट बुनियादी शोध करें और न केवल देश बल्कि दुनिया भर की समस्याओं का समाधान खोजें। इसके अलावा, हमारे विश्वविद्यालय में एक सकारात्मक और विविध सामाजिक-सांस्कृतिक संस्कृति के लिए भी प्रयास किए जा रहे हैं। हम छात्रों को विभिन्न भाषाओं, सांस्कृतिक और धार्मिक मूल्यों का समर्थन करते हुए एक-दूसरे के साथ सहयोग करने का अवसर प्रदान करते हैं।

नैक से ए डबल प्लस होना विश्वविद्यालय के लिए गौरव की बात
केन्द्रीय राज्यमंत्री ने कहा कि, लखनऊ विश्वविद्यालय ‘राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद’ NAAC द्वारा A++ की सर्वश्रेष्ठ रैंकिंग प्राप्त करने वाला पहला राज्य विश्वविद्यालय है। यह बात इसलिए और भी गौरवपूर्ण हो जाती है क्योंकि उत्तर प्रदेश के अन्य विश्वविद्यालयों ने भी लखनऊ विश्वविद्यालय से प्रेरणा लेकर आगे प्रयास किये और उन्हें भी लखनऊ विश्वविद्यालय की तरह सकारात्मक और उत्कृष्ट परिणाम मिले। उन्होंने आगे कहा कि, लखनऊ यूनिवर्सिटी NIRF रैंकिंग में टॉप 150 शिक्षण संस्थानों में भी जगह पाने में सफल रही है. राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 ने भारतीय शिक्षा प्रणाली में महत्वपूर्ण बदलावों की शुरुआत की है और उच्च शिक्षा के क्षेत्र में नए दिशानिर्देश प्रदान किए हैं। हमें यह बताते हुए खुशी हो रही है कि लखनऊ विश्वविद्यालय को राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 का अनुपालन करने वाला देश का पहला विश्वविद्यालय होने का दर्जा प्राप्त है। यह एक बड़ी उपलब्धि है। उन्होंने आगे कहा कि, यह दर्जा प्राप्त करना लखनऊ विश्वविद्यालय के लिए गर्व की बात है और यह दर्शाता है कि संस्थान शिक्षा में उत्कृष्टता के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के उद्देश्यों को पूरा करने में इसका योगदान महत्वपूर्ण है और यह लखनऊ विश्वविद्यालय को पूरे देश में एक प्रेरक विश्वविद्यालय के रूप में स्थापित करने में सफल रहा है।

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