उत्तर प्रदेशलखनऊ

उत्तर प्रदेश बनेगा ग्लोबल सेवा का हब, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स नीति को दी मंजूरी

  • कैबिनेट की बैठक में रखे गए सभी 11 प्रस्तावों को मिली मंजूरी
  • दो लाख नई नौकरियों का रास्ता होगा साफ
  • सस्ती दरों पर बिजली खरीदेगा उत्तर प्रदेश
  • योगी कैबिनेट में कई ऐतिहासिक निर्णय
  • 2025-2026 के लिए नई ट्रांसफर नीति को हरी झंडी

लखनऊ। योगी सरकार की कैबिनेट की बैठक में कुल 11 प्रस्तावों का मंजूरी दी गई। कैबिनेट ने एक और ऐतिहासिक कदम उठाते हुए ग्लोबल केपेबिलिटी सेंटर्स नीति” को भी इस बैठक में मंजूर कर लिया गया। नीति के बल पर प्रदेश को भारत का अगला वैश्विक सेवा केंद्र बनाने और वन ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य तक पहुंचाना संभव होगा। इस नई नीति के तहत यूपी में आईटी, बैंकिंग, हेल्थकेयर, इंजीनियरिंग और अगली पीढ़ी की तकनीकों में काम करने वाली वैश्विक कंपनियों को बड़े पैमाने पर निवेश के लिए आकर्षित किया जाएगा। इससे न केवल रोजगार के लाखों अवसर खुलेंगे, बल्कि प्रदेश के टियर-2 शहरों में भी आर्थिक गतिविधियों में जबरदस्त बढ़ोतरी भी होगी। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में लोकभवन में कैबिनेट की बैठक के बाद राज्य के वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने कैबिनेट के फैसलों की जानकारी पत्रकारों को दी।

उन्होंने बताया कि इस बैठक में कुल 11 प्रस्ताव रखे गए थे और इन सभी 11 प्रस्तावों को हरी झंडी मिल गई। आउटसोर्स के लिए भारत आ रहीं मल्टीनेशनल कंपनियांपत्रकार वार्ता के दौरान नीति के संबंध में प्रमुख सचिव औद्योगिक विकास आलोक कुमार ने बताया कि प्रदेश में साइंस, लॉ, इंजीनियरिंग समेत बहुत सारे सेक्टर्स का टैलेंट काफी बड़ी मात्रा में मौजूद है। कम पैसे में बेहतर क्वालिटी का काम लेने के लिए कई मल्टीनेशनल कंपनियां अपने ऑफशोर डेवलपमेंट सेंटर्स यहीं पर स्थापित कर रही हैं। इसे ही ग्लोबल कैपेसिटी सेंटर कहते हैं। इसमें पहले नंबर पर सॉफ्टवेयर और आईटी आता है, जिसमें मशीन लर्निंग, क्लाउड कंप्यूटिंग, रोबोटिक प्रॉसेस ऑटोमेशन, एआई संचालित डेवलपमेंट, साइबर सुरक्षा, इंजीनियरिंग डेवलपमेंट आते हैं।

उन्होंने बताया कि इंजीनियरिंग डिजाइन का बहुत सारा एलिमेंट है, जो बहुत कॉस्टली और टाइम कंजूमिंग होता है और हम काफी सस्ते दामों में और उच्च गुणवत्ता के साथ इस काम को कर सकते हैं। इसी प्रकार से बैंक्स, फाइनेंशियल सर्विसेज और इंश्योरेंस सेक्टर में बहुत सारे काम आउटसोर्स करने के लिए मल्टीनेशन कंपनियां भारत आ रही हैं। इसी तरह, ऑटोमोटिव सेक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर विनिर्माण सेक्टर की भी बहुत सारी कंपनियां यहां आई हैं। उनके सॉफ्टवेयर डेवलपिंग का बहुत सारा काम इन जीसीसी में होगा। उन्होंने बताया कि आज भारत में लगभग 1700 जीसीसी हैं और इनके तेजी से बढ़ने की उम्मीद है। नोएडा में अभी माइक्रोसॉफ्ट ने 10 हजार सीटर डेवलपमेंट सेंटर का शिलान्यास किया है।

एमएक्यू ने भी 3 हजार सीटर इंजीनियरिंग डेवलपमेंट सेंटर का सेटअप किया है। हमको एनसीआर और नोएडा के साथ ही वाराणसी, कानपुर और प्रयागराज जैसे शहरों में भी इन सेंटर्स को लाने की व्यवस्था करनी है।  योगी सरकार की यह नीति भारत की सबसे प्रतिस्पर्धी और समर्पित नीति मानी जा रही है। इसमें निवेशकों को संचालन से लेकर कौशल विकास तक हर स्तर पर व्यापक सहायता मिलेगी। इसके तहत, आॅपरेशनल सब्सिडी के अंतर्गत किराया, बिजली, बैंडविड्थ और डेटा सर्विस पर 20 फीसदी सब्सिडी, 80 करोड़ तक की सहायता प्राप्त होगी।

वहीं, पेरोल सब्सिडी के तहत यूपी निवासी कर्मचारियों के वेतन पर 1.8 लाख रुपये तक प्रतिवर्ष की प्रतिपूर्ति का लाभ मिलेगा। फ्रेशर और इंटर्न सब्सिडी के तहत नए ग्रेजुएट्स को भर्ती करने पर 20,000 और इंटर्नशिप पर 5000 प्रति माह तक की सहायता प्राप्त होगी। ईपीएफ, ट्रेनिंग और आर एंड डी अनुदान के तहत सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के लिए विशेष प्रावधान किया गया है। सिंगल विंडो सिस्टम के तहत इन्वेस्ट यूपी के जरिए सारी स्वीकृतियां ऑनलाइन और सरल होंगी। उन्होंने बताया कि इस नीति के लागू होने से आईटी, एनालिटिक्स, एचआर, कस्टमर सपोर्ट और फाइनेंस जैसे क्षेत्रों में दो लाख से ज्यादा गुणवत्तापूर्ण नौकरियां सृजित होंगी। साथ ही, वैश्विक निवेश भी तेजी से प्रदेश में प्रवेश करेगा। इससे न केवल शहरी बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी आर्थिक विकास को गति मिलेगी। जीसीसी नीति महिलाओं, एससी/एसटी, ट्रांसजेंडर और दिव्यांगजनों के लिए रोजगार में विशेष प्रोत्साहन देती है। इसके अलावा, स्टार्टअप्स को आइडिएशन, पेटेंट और रिसर्च के लिए भी भरपूर मदद दी जाएगी।

अनियोजित पार्किंग से मुक्ति, नगर निगमों की बढ़ेगी आययोगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश नगर निगम (पार्किंग स्थान का सन्निर्माण, अनुरक्षण व प्रचालन) नियमावली 2025 प्रख्यापित करने के प्रस्ताव को भी अनुमोदित किया है। पत्रकारों को नगर विकास व ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने बताया कि प्रदेश में निजी वाहनों में भारी वृद्धि के कारण सड़कों के साथ-साथ पार्किंग स्थलों पर भी दबाव बढ़ रहा है। अनियोजित पार्किंग की समस्या विकराल हो जा है। ऐसे में उत्तर प्रदेश के नगर निगमों में एक समान पार्किंग नियम लागू किए जाने का अनुमोदन किया गया है। नियमावली जारी होने से न केवल पार्किंग जनित राजस्व में वृद्धि होगी और हानि को भी रोका जा सकेगा। स्मार्ट तकनीक के उपयोग से पार्किंग स्थलों का प्रभावी ढंग से प्रबंधन हो सकेगा।

पार्किंग शुल्क नगर निगमों की आय का नियमित स्रोत बनेगा स्टेज कैरिज बस अड्डा, कॉन्ट्रैक्ट कैरिज व ऑल  इंडिया टूरिस्ट बस पार्क की होगी। योगी कैबिनेट ने उत्तर प्रदेश स्टेट कैरिज बस अड्डा, कॉन्ट्रैक्ट कैरिज व ऑल  इंडिया टूर्स्ट बस पार्क (स्थापना एवं विनियमन) नीति-2025 को भी मंजूर कर लिया है। इससे प्रदेश में यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने में मदद मिलेगी। वित्त एवं संसदीय कार्य मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि नीति के अंतर्गत प्रदेश भर में बस अड्डों/पार्कों की स्थापना के लिए आवेदन आमंत्रण जिलाधिकारी की अध्यक्षता में होगा। उनके द्वारा स्टेट कैरिज बस अड्डा, कॉन्ट्रैक्ट कैरिज व ऑल इंडिया टूरिस्ट पार्क नियामक प्राधिकारी का गठन किया जाएगा।  योगी सरकार ने नई स्थानांतरण नीति को वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए प्रभावी किया गया है।

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने बताया कि नई नीति में पिछली नीति के ज्यादातर प्रावधानों को शामिल किया गया है। इसके जरिए जून 2025 तक समूह क व ख के जो अधिकारी किसी जिले में सेवाकाल के 3 वर्ष पूरे कर चुके हैं, उन्हें अन्य जिलों में तथा मंडल में 7 वर्ष पूरे कर चुके अधिकारी व कर्मचारियों का स्थानांतरण किया जाएगा। मंडलीय कार्यालयों में की गई तैनाती इस अवधि में नहीं गिनी जाएगी, मगर यहां भी 3 वर्ष से अधिक कार्यरत अधिकारी व कर्मचारियों को प्राथमिकता के आधार पर स्थानांतरित किया जाएगा। स्थानांतरण समूह क व ख के संवर्गवार कार्यरत अधिकारियों की संख्या के अधिकतम 20 प्रतिशत व समूह ग व घ में यह क्रमश: 10 प्रतिशत रहेगा। समूह ख व ग के लिए मेरिट बेस्ड ऑनलाइन सिस्टम के आधार पर की जाएगी। इस क्रम में मंदित बच्चों व पूर्णत: दिव्यांग बच्चों के माता-पिता की तैनाती ऐसे स्थानों पर हो सकेगी जहां उचित देखभाल और चिकित्सा की समुचित व्यवस्था होगी।

उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक बड़ी और दूरदर्शी पहल की है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में आयोजित कैबिनेट बैठक में मंगलवार को 1600 मेगावाट क्षमता की तापीय परियोजना से कुल 1500 मेगावॉट ऊर्जा बिड प्रॉसेस के माध्यम से 25 वर्षों तक खरीदने का निर्णय लिया गया है। बिडिंग प्रक्रिया में सबसे कम टैरिफ दर (5.38 रुपये प्रति यूनिट) की पेशकश करने वाली निजी कंपनी को परियोजना के लिए चुना गया है।

इससे यूपी पावर कॉपोर्रेशन (यूपीपीसीएल) को 25 वर्षों में लगभग 2958 करोड़ रुपये की बचत होगी। योगी सरकार की इस नई पहल से उत्तर प्रदेश को साल 2030-31 से 1500 मेगावॉट बिजली बेहद सस्ती दर पर मिलने लगेगी। यह नई परियोजना मौजूदा और आगामी तापीय परियोजनाओं की तुलना में कहीं ज्यादा किफायती है। जहां जवाहरपुर, ओबरा, घाटमपुर, पनकी जैसी परियोजनाओं से बिजली 6.6 रुपये से लेकर 9 रुपये प्रति यूनिट तक मिल रही है, वहीं डीबीएफओओ के तहत प्रस्तावित इस परियोजना के तहत 2030-31 में प्लांट के कमीशन होने के बाद बिजली सिर्फ 6.10 रुपये प्रति यूनिट की दर से प्राप्त होगी।

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