सिविल अस्पताल में पार्किंग बड़ी समस्या, जल्द निकलेगा हल!
नवागत निदेशक डॉ. कजली गुप्ता ने संभाला कार्यभार, बोलीं बैठकर काम नहीं होता

- इटावा व प्रयागराज के चिकित्सालयों में किये गये सुधार के लिये रहीं चर्चित
- अस्पताल में इधर-उधर पड़े मेडिकल कचरे और बेकार पड़े सामानों को हटाने के निर्देश
लखनऊ। राजधानी के सरकारी अस्पतालों की दुर्दशा हमेशा से एक बड़ा मुद्दा रहा है, हालांकि समय रहते इन अस्पतालों की चिकित्सकीय सुविधायें बेहतर भी हुई हैं, मगर सबसे बड़ी परेशानी दिन-प्रतिदिन इन अस्पतालों की ओपीडी में बढ़ते जा रहे मरीजों की अपार संख्या और उसके अनुपात में काफी कम डॉक्टरों की टीम का होना।
बहरहाल, यह सब एक बेहतर मेडिकल मैनजमेंट से ही सम्भव हो सकता है। लोगों से काम लेने से पहले खुद उस काम को करना पड़ता है, जिसके बाद ही कर्मचारी और सभी गतिविधियां सुचारु रूप से चल पाती हैं। सिविल अस्पताल के निदेशक पद पर कार्यभार संभालने के बाद मेरी सबसे पहली प्राथमिकता आने वाले मरीज और उन्हें मिलने वाली सुविधा है। अस्पताल में सबसे बड़ी समस्या पार्किंग की है। इस पर मेरा विशेष ध्यान है। यह बातें शुक्रवार को राजधानी के सबसे वीआईपी सरकारी अस्पतालों में शुमार डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी अस्पताल (सिविल अस्पताल) की नवागंतुक निदेशक डॉक्टर कजली गुप्ता ने तरुणमित्र टीम से रूबरू होते हुए एक साक्षात्कार के दौरान कहीं।
दरअसल ,सिविल अस्पताल राजधानी के सबसे संवेदनशील इलाके में मौजूद है। यहां से राज्यपाल सहित सीएम आवास की दूरी कुछ सौ मीटर ही है। वहीं इस अस्पताल में प्रदेश भर से लोग बेहतर इलाज के लिए आते हैं। ऐसे में अस्पताल पहुंचने वाले मरीजों को बेहतर इलाज के साथ ही कोई असुविधा न हो इस पर भी अस्पताल प्रशासन विशेष ख्याल रखता है। सिविल अस्पताल में रोजाना हजारों की तादाद में मरीज आते हैं। इसके साथ ही इमरजेंसी में भी लोगों की आवाजाही लगी रहती है। मरीजों और तीमारदारों के वाहन से कई बार अस्पताल में प्रवेश करने के लिए भी जद्दोजहद करनी पड़ती है।
गुरूवार को जब नवागंतुक निदेशक ने आकर कार्यभार संभाला तो उन्हें भी इस समस्या का सामना करना पड़ा। जिसके बाद उन्होंने अपने चैंबर में जाने से पूर्व ही पूरे अस्पताल की व्यवस्था का निरीक्षण कर डाला। उन्होंने अस्पताल में जो खामियां मौके पर नजर आई उन्हें तत्काल सही करने के निर्देश दिए। उन्होंने एम्बुलेंस का भी निरीक्षण किया। इसके बाद वह पूरे अस्पताल के डॉक्टरों और कर्मचारियों से मिलीं और यह सिलसिला गुरूवार को भी जारी रहा। सुबह अस्पताल पहुंचते ही उन्होंने अस्पताल में पार्किंग को लेकर चिंता जताई। अस्पताल में इधर-उधर निष्प्रयोज्य पड़े मेडिकल कचरे और अन्य बेकार पड़े सामानों को शीघ्र हटवाने के निर्देश दिये।
अस्पताल परिसर में खड़े होने वाहनों के लिए भी एक योजना बनाने के लिए संबंधित लोगों को निर्देश दिए हैं। निदेशक सिविल अस्पताल का कहना रहा कि अस्पताल में मरीजों के लिए पर्याप्त जगह होनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अस्पताल परिसर में गलत तरीके से कोई भी वाहन खड़ा न किया जाए। आपको बता दें डॉक्टर कजली गुप्ता ने इटावा और इलाहाबाद में अपने चिकित्सकीय सेवा के दौरान काफी कुछ सुधार संबंधित अस्पतालों में किया था।
उनके अनुसार उस दौरान इन अस्पतालों में लम्बे समय से बंद पड़े अलमारियों को खुलवाया, धूल फांक रहीं फाईलों को साफ कराया, हर एक अस्पताल कर्मी से सीधे बातचीत शुरू की, रेजिडेंट डॉक्टरों को गलती करने पर डांटा तो बेहतर कार्य के लिये प्रोत्साहित भी किया। कुल मिलाकर डॉ. कजली टीम वर्क की तरह काम करना पसंद करती हैं, कहती हैं कि केवल अस्पताल के केबिन में बैठने से काम नहीं होता बाहर निकलना पड़ता है, और शायद इसीलिये बातों-बातों में जब उनसे यह पूछा गया कि अब तो केवल नौ माह आपके कार्यकाल के बचे हैं, तो उनका जवाब यही रहा कि काम करने के लिये तो एक माह भी काफी है।



