पंजाबराज्य

मुख्यमंत्री की ओर से पंजाब के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों की निगरानी के लिए उच्च-स्तरीय कमेटी का गठन

  • मुख्यमंत्री ने वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक कर राज्य में बाढ़ की स्थिति का लिया जायजा
  • मुख्य सचिव को राहत कार्यों में तेजी लाने के लिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करने के लिए कहा
  • लोगों को संकट से निकालने के लिए राज्य सरकार की दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराई
  • पहाड़ी क्षेत्रों से नदियों में जलस्तर बढ़ने से राज्य में हालात गंभीर हुए

चंडीगढ़। पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज तीन वरिष्ठ अधिकारियों की एक उच्च-स्तरीय कमेटी का गठन किया है, जो राज्य के बाढ़ प्रभावित जिलों में चल रहे राहत और बचाव कार्यों की दैनिक आधार पर निगरानी करेगी।

यहां बाढ़ की स्थिति का जायजा लेने के लिए एक उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि राजस्व विभाग, जल संसाधन और खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों वाली यह कमेटी अमृतसर और अन्य बाढ़ प्रभावित जिलों में स्थायी रूप से तैनात रहेगी।

उन्होंने डिप्टी कमिश्नरों और अन्य अधिकारियों को निर्देश दिए कि इस उच्च-स्तरीय समिति के आदेशों का अक्षरशः पालन सुनिश्चित किया जाए ताकि बाढ़ पीड़ितों को अत्यंत आवश्यक राहत प्रदान की जा सके। भगवंत सिंह मान ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य सरकार लोगों को इस संकट से निकालने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है और इस नेक कार्य के लिए कोई कसर बाकी नहीं छोड़ी जाएगी।

मुख्यमंत्री ने मुख्य सचिव को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का दौरा कर बचाव और राहत कार्यों को और प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करने के लिए कहा। उन्होंने कहा कि मुख्य सचिव को बाढ़ प्रभावित जिलों का दौरा करना चाहिए और लोगों की सहायता के लिए सरकारी तंत्र को पूरी तरह से झोंक देना चाहिए। भगवंत सिंह मान ने कहा कि राहत कार्यों में व्यापक स्तर पर तेजी लाने का एकमात्र उद्देश्य लोगों को अधिकतम राहत प्रदान करना होना चाहिए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि पहाड़ी राज्यों से नदियों में जलस्तर बढ़ने से राज्य में स्थिति गंभीर हो गई है। उन्होंने कहा कि आज तक रावी नदी में 14.11 लाख क्यूसेक पानी आया है, जो अब तक इस नदी में सबसे अधिक है। यहां तक कि जब 1988 में राज्य में सबसे भयानक बाढ़ आई थी, तब भी इस नदी में 11.20 लाख क्यूसेक पानी आया था। भगवंत सिंह मान ने कहा कि राज्य सरकार ने नदियों से अधिकतम पानी निकालने के लिए हरियाणा और राजस्थान को पहले ही पत्र लिखकर भेज दिया है।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित पांच जिलों में भारतीय सेना को पहले ही तैनात किया जा चुका है और राज्य की मशीनरी व उपकरणों का उपयोग कर प्रशासन द्वारा सेना के साथ मिलकर राहत कार्य चलाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि एन.डी.आर.एफ. की 17 टीमें राहत कार्यों के लिए तैनात की गई हैं ताकि पीड़ित लोगों का बचाव किया जा सके।

बैठक के दौरान मुख्यमंत्री को बताया गया कि बाढ़ के कारण फंसे लोगों को निकालने के लिए युद्धस्तर पर कार्य किए जा रहे हैं और बाढ़ से हुए नुकसान का आकलन करने के साथ-साथ प्रभावित क्षेत्रों में बीमारियों को फैलने से रोकने के लिए निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि राहत और बचाव कार्यों को पूरा करने के लिए विभिन्न विभागों के कर्मचारी दिन-रात लोगों की मदद के लिए जुटे हुए हैं। भगवंत सिंह मान ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में नदियों के किनारे टूटे तटबंधों को भरने के साथ-साथ मेडिकल टीमों को प्रत्येक गांव में बीमारियों से बचाव के लिए स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के निर्देश दिए।

उन्होंने कहा कि राहत कार्यों के साथ-साथ मेडिकल टीमें आने वाले समय में पानी के नमूने लेने, घरों और गांवों के अंदर व बाहर स्प्रे का छिड़काव, पानी का क्लोरीनीकरण, बुखार का सर्वेक्षण, मलेरिया और डेंगू का समय पर पता लगाने के लिए कार्ड टेस्ट और सैनिटरी नैपकिन व मच्छरदानी वितरण के कार्यों के लिए तैयार रहें।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि जल आपूर्ति और स्वच्छता विभाग को गांवों में साफ और पीने योग्य पानी उपलब्ध कराने के लिए पानी के टैंकरों को तब तक सेवा में लगाया जाए, जब तक जल आपूर्ति योजनाओं के माध्यम से आपूर्ति पूरी तरह से बहाल नहीं हो जाती। भगवंत सिंह मान ने कहा कि इसी तरह पानी की गुणवत्ता जांचने वाली टीमें सभी गांवों में पानी की गुणवत्ता की जांच करें ताकि किसी भी महामारी के फैलाव से बचा जा सके। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रभावित गांवों के लोगों को पानी के साथ-साथ सूखे राशन की किट, चीनी, चावल, आटा, घी, दूध पाउडर उपलब्ध कराया जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि बाढ़ प्रभावित निचले गांवों से पानी निकालने के लिए पंपिंग कार्य पहले ही युद्धस्तर पर चल रहे हैं। उन्होंने मंडी बोर्ड और लोक निर्माण विभाग को बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में पुलों, सड़कों और सरकारी इमारतों को हुए नुकसान का विस्तृत सर्वेक्षण करने के लिए भी कहा। भगवंत सिंह मान ने कहा कि प्रभावित लोगों को राहत शिविरों और मेडिकल शिविरों के माध्यम से और यहां तक कि उनके घरों पर जाकर चिकित्सा सहायता प्रदान की जाए। उन्होंने कहा कि गांवों में मोबाइल मेडिकल यूनिट तैनात की जाएं ताकि लोगों को उच्च गुणवत्ता वाली स्वास्थ्य सुविधाएं प्रदान की जा सकें।

मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि बाढ़ प्रभावित गांवों में डेंगू के लार्वा का पता लगाने के लिए समर्पित एंटी-लार्वा टीमें तैनात की जाएं। उन्होंने कहा कि विशेष टीमें गांवों का दौरा कर लोगों को मलेरिया, डेंगू, दस्त, टाइफाइड और त्वचा संबंधी समस्याओं जैसी बीमारियों को रोकने के उपायों के बारे में जागरूक करें। उन्होंने कहा कि इन बीमारियों से निपटने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता है।

भगवंत सिंह मान ने आगे कहा कि प्रभावित पशुओं के उपचार और टीकाकरण, पशुओं के कीटाणु नाशन और चारा/फीड की व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पशु चिकित्सा टीमें तैनात की जाएं। उन्होंने कहा कि गांवों में व्यापक स्तर पर स्वच्छता अभियान चलाने के साथ-साथ जलजनित बीमारियों के फैलाव को रोकने के लिए फॉगिंग टीमें तैनात की जाएं और सैनिटरी व मनरेगा कार्यकर्ताओं को गांवों की सफाई का कार्य सौंपा जाए।

इसके साथ ही उन्होंने नालों/नालियों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव करने के लिए भी कहा ताकि दुर्गंध को रोकने के साथ-साथ इससे होने वाली बीमारियों के फैलाव को रोका जा सके। इस अवसर पर स्थानीय निकाय मंत्री डॉ. रवजोत, मुख्य सचिव के.ए.पी. सिन्हा और अन्य उपस्थित थे।

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