उत्तर प्रदेशराज्यलखनऊ

आयुष्मान भारत योजना में फिर साइबर सेंधमारी, प्राथमिकी दर्ज

  • हेराफेरी कर अधिकारियों के आधार लिंक मोबाइल नंबर हटाए गए पोर्टल से

लखनऊ। राजधानी लखनऊ में आयुष्मान भारत–प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के संचालन से जुड़ी स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रेहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज (साचीज) में एक बार फिर बड़ा साइबर जालसाजी उजागर हुई है। इस बार संबन्धित पोर्टल्स से अधिकारियों के मोबाइल नंबर बदलकर वित्तीय हानि पहुंचाने का खुलासा हुआ है। योजना के राज्य नोडल अधिकारी डॉ. सचिन वैश्य ने इस मामले में थाना हजरतगंज, कोतवाली लखनऊ में प्राथमिकी दर्ज करा दी है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, साइबर अपराधियों ने साचीज से जुड़े अधिकारियों और कर्मचारियों के आधार लिंक मोबाइल नंबरों को बिना अनुमति राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण (एनएचए) के पोर्टल पर बदल दिया और नए फर्जी नंबरों पर ओटीपी प्राप्त कर एनएचए के पोर्टलों में अनधिकृत लॉगिन कर कई संदिग्ध वित्तीय गतिविधियों अंजाम दे डाला। इसकी भनक अधिकारियों को मोबाइल पर अपडेट रिक्वेस्ट मैसेज मिलने पर हुई, हालांकि अब तक वित्तीय नुकसान का आंकड़ा नहीं जुटाया जा सका है।

फर्जी ओटीपी से पोर्टल में प्रवेश से सेवाओं पर खतरा

साचीज की मुख्य कार्यपालक अर्चना वर्मा ने बताया कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि फर्जी मोबाइल नंबरों और आधार प्रमाणीकरण प्रणाली में फर्जी प्रवेश कर यह साइबर फ्रॉड किया गया। संभव है कि अस्पतालों के भुगतान कराने के लिए फर्जीवाड़ा किया गया हो, क्योंकि जांच के बाद अधिकारियों के मोबाइल नंबर पर अप्रूवल आता है। मगर इस फर्जीवाड़े से सरकारी सेवाओं, बैंकिंग लेनदेन और डिजिटल सिस्टम की सुरक्षा पर गंभीर खतरा उत्पन्न हो गया है।

उन्होंने बताया कि साचीज द्वारा ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए पोर्टलों की सुरक्षा प्रणाली को और मजबूत किया जा रहा है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के सहयोग से आईपी एड्रेस मैपिंग पूरी कर ली गई है। साथ ही सख्त चेतावनी दी गई है कि यदि कोई व्यक्ति या संस्था फर्जी तरीके से आयुष्मान कार्ड बनाते या उपयोग करते पाए गए, तो उनके खिलाफ कठोर वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

पूर्व में भी सामने आ चुकी गड़बड़ी

जून माह में तकनीकी गड़बड़ी के चलते 39 अस्पतालों को 9.94 करोड़ रुपये का गलत भुगतान हो गया था। इस राशि की वसूली कर ली गई और सभी संबंधित अस्पतालों को आयुष्मान योजना की सूची से बाहर कर दिया गया।

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