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माघ मेला: त्रिवेणी की रेती पर सजा तंबुओं का शहर, 4 लाख से अधिक कल्पवासियों के जप-तप

पौष पूर्णिमा के स्नान पर्व के साथ ही प्रयागराज के संगम तट पर आस्था, तप और साधना की त्रिवेणी प्रवाहित होने लगेगी। गंगा-यमुना की रेती पर तंबुओं का अस्थायी शहर बस चुका है और शनिवार से माघ मेले का विधिवत शुभारंभ होगा। माघ मेला 15 फरवरी महाशिवरात्रि तक चलेगा। इस दौरान चार लाख से अधिक कल्पवासी जप, तप और संकल्प के साथ एक माह का कठिन कल्पवास करेंगे।

माघ मेला देश का सबसे बड़ा वार्षिक धार्मिक-सांस्कृतिक आयोजन है, जहां पौष पूर्णिमा से ज्ञान, भक्ति और साधना की विविध धाराएं एक साथ प्रवाहित होती हैं। संगम क्षेत्र में दंडी संन्यासी, रामानंदी आचार्य, खालसा पंथ के संतों के साथ-साथ चतुष्पीठों के शंकराचार्यों की उपस्थिति अध्यात्म को विराट स्वरूप देती है। ठिठुरती ठंड में गंगा-यमुना की रेती पर तपस्या करने वाले कल्पवासियों की संख्या इस वर्ष अभूतपूर्व रूप से बढ़ी है।

कल्पवासियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए मेला प्रशासन ने पहली बार 950 बीघे क्षेत्र में एक अलग नगर बसाया है, जिसे ‘प्रयागवाल’ नाम दिया गया है। यह नगर नागवासुकी मंदिर के सामने गंगा पार विकसित किया गया है। एडीएम माघ मेला दयानंद प्रसाद के अनुसार, महाकुंभ 2025 की स्मृतियों और 12 वर्ष बाद कल्पवास के संकल्प की परंपरा के चलते इस वर्ष कल्पवासियों की संख्या में वृद्धि हुई है। उम्र और स्वास्थ्य को ध्यान में रखते हुए श्रद्धालुओं को गंगा तट के निकट ही बसाया गया है, ताकि दैनिक स्नान में कठिनाई न हो।

योगी सरकार द्वारा मेला क्षेत्र को दिव्य, भव्य और स्वच्छ स्वरूप देने पर विशेष जोर है। कल्पवासियों के शिविरों में स्वच्छता को प्राथमिकता दी जा रही है, सिंगल यूज प्लास्टिक से परहेज की अपील की गई है। बुजुर्ग श्रद्धालुओं को शीतलहर से बचाने के लिए अलाव और अन्य सुरक्षात्मक इंतजाम किए गए हैं।

माघ मेला 2026 के प्रमुख स्नान पर्व

• पौष पूर्णिमा : 3 जनवरी

• मकर संक्रांति : 14 जनवरी

• मौनी अमावस्या : 18 जनवरी

• बसंत पंचमी : 23 जनवरी

• माघी पूर्णिमा : 1 फरवरी

• महाशिवरात्रि : 15 फरवरी

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