राजधानी में हरियाली की सुरक्षा को मिला नया कवच, लोहे की जगह प्लास्टिक ट्री गार्ड लगाएगा वन विभाग

उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में सड़कों के किनारे लगे पौधों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने एक बड़ा कदम उठाया है। अब तक पौधों को बचाने के लिए इस्तेमाल होने वाले भारी लोहे के ट्री गार्ड की जगह प्लास्टिक के हल्के, टिकाऊ और किफायती ट्री गार्ड लगाए जाएंगे। इस बदलाव से चोरी और जंग जैसी वर्षों पुरानी समस्याओं से निजात मिलेगी।
वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, अब तक लोहे के ट्री गार्ड का इस्तेमाल किया जाता था, लेकिन उनकी दो बड़ी कमियां थीं। पहली, लोहे की कीमत अधिक होने के कारण इनके चोरी होने का खतरा हमेशा बना रहता था, जिससे विभाग को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता था। दूसरी, बारिश और नमी के कारण एक से डेढ़ साल में ही लोहे के ट्री गार्ड में जंग लग जाती थी और वे टूटने लगते थे, जिससे पौधों की सुरक्षा प्रभावित होती थी। इन समस्याओं को ध्यान में रखते हुए वन विभाग ने पहली बार प्लास्टिक ट्री गार्ड लगाने का फैसला किया है। इससे पहले गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान और तमिलनाडु जैसे राज्यों में प्लास्टिक ट्री गार्ड का सफल प्रयोग किया जा चुका है। वहां से मिले सकारात्मक अनुभवों के आधार पर अब उत्तर प्रदेश में इसकी शुरुआत की जा रही है।
रात में भी दिखेगा, दुर्घटनाओं में आएगी कमी
प्लास्टिक ट्री गार्ड का रंग हल्का हरा (लाइट ग्रीन) रखा गया है, जो रात के अंधेरे में हल्का रिफ्लेक्शन देगा। इससे सड़क पर चलने वाले वाहन चालकों और राहगीरों को डिवाइडर और पौधे साफ दिखाई देंगे, जिससे दुर्घटनाओं की संभावना कम होगी।
2500 स्थानों पर लगेगा प्लास्टिक ट्री गार्ड
शुरुआती चरण में लखनऊ में 2500 स्थानों पर इन ट्री गार्ड को लगाया जाएगा। यह एक पायलट प्रोजेक्ट होगा, जिसके तहत पहले शहर के बाहरी इलाकों में इन्हें स्थापित किया जाएगा। इसके बाद मुख्य सड़कों के डिवाइडर पर लगे लगभग ढाई हजार पौधों को प्लास्टिक ट्री गार्ड से सुरक्षित किया जाएगा।
अवधवन प्रभाग, लखनऊ रेंज के डीएफओ सितांशु पांडेय ने बताया कि इस पायलट प्रोजेक्ट की सफलता के बाद इसे पूरे जिले और राज्य के अन्य हिस्सों में भी विस्तार दिया जाएगा। प्लास्टिक ट्री गार्ड न केवल पर्यावरण के अनुकूल हैं, बल्कि शहरी सौंदर्याकरण में भी अहम भूमिका निभाएंगे।



