उत्तर प्रदेशराज्यलखनऊ

Yogi Cabinet : योगी मंत्रिमंडल का दूसरा विस्तार जल्द, गुजरात की तर्ज पर यूपी में बदले जा सकते मंत्री

  • भाजपा संगठन में भी भारी फेरबदल की तैयारी, दिल्ली में बनी सहमति

प्रदेश की राजनीति में एक बार फिर बड़े बदलाव की आहट तेज हो गई है। गुजरात मॉडल की तर्ज पर योगी सरकार 2.0 में दूसरा मंत्रिमंडल विस्तार और व्यापक फेरबदल की तैयारी अंतिम चरण में मानी जा रही है। करीब डेढ़ दर्जन मंत्रियों को बदले जाने की संभावना है। इसके साथ ही भाजपा संगठन में भी बड़े स्तर पर बदलाव को लेकर दिल्ली में सहमति बन चुकी है। इसी के साथ भाजपा संगठन में भी भारी फेरबदल की तैयारी है। इसे लेकर दिल्ली में सहमति बन गई है।

गुजरात में 2022 विधानसभा चुनाव से पहले तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल ने बड़ा दांव खेलते हुए 16 मंत्रियों से इस्तीफा लिया था और नए मंत्रिमंडल में 19 नए चेहरों को शामिल किया गया था। इसका सीधा असर चुनावी नतीजों में दिखा और भाजपा ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की।

इसी मॉडल को यूपी में अपनाने की तैयारी मानी जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली सरकार में फिलहाल 54 मंत्री हैं, जबकि संवैधानिक रूप से 60 मंत्रियों की सीमा है। यानी छह पद पहले से खाली हैं। ऐसे में मंत्रिमंडल विस्तार तय माना जा रहा है, लेकिन इस बार संदेश साफ है, सिर्फ विस्तार नहीं बल्कि परफॉर्मेंस के आधार पर बदलाव।

पार्टी और संगठन स्तर पर लंबे समय से यह फीडबैक मिल रहा है कि सरकार के कुछ मंत्रियों के कामकाज को लेकर असंतोष है। यह नाराजगी केवल जनता तक सीमित नहीं, बल्कि विधायकों, सांसदों और संगठन के पदाधिकारियों के जरिए भी शीर्ष नेतृत्व तक पहुंची है। आरएसएस और भाजपा के बीच हुई समन्वय बैठकों में भी मंत्रियों की सक्रियता, जनता से जुड़ाव और विभागीय प्रदर्शन को लेकर सवाल उठे हैं।

सूत्रों का कहना है कि जिन मंत्रियों के खिलाफ लगातार शिकायतें मिल रही हैं, उन्हें संगठन या चुनावी मैदान में भेजा जा सकता है। वहीं उनकी जगह ऐसे नए चेहरों को मौका मिलेगा, जो जमीनी पकड़ रखते हों और 2027 के विधानसभा चुनाव की रणनीति में फिट बैठते हों। सूत्रों के मुताबिक, मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर दो टाइमलाइन पर विचार चल रहा है, पहली होली से पहले और दूसरी पश्चिम बंगाल चुनाव के बाद। हालांकि पार्टी के भीतर यह भी संकेत हैं कि खाली पदों के साथ-साथ बड़े बदलाव एक साथ किए जा सकते हैं, ताकि बार-बार फेरबदल का संदेश न जाए।

सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर फोकस

मंत्रिमंडल विस्तार में सामाजिक और क्षेत्रीय संतुलन पर खास ध्यान दिया जाएगा। दलित, पिछड़े, ब्राह्मण और महिलाओं को अधिक प्रतिनिधित्व मिलने की संभावना जताई जा रही है। इसके अलावा पश्चिमी यूपी, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और तराई क्षेत्र से नए चेहरों को आगे लाने पर भी मंथन चल रहा है। कुछ ऐसे विधायक, जिन्होंने हाल के वर्षों में संगठन और सरकार के बीच बेहतर समन्वय दिखाया है, उन्हें मंत्री पद मिल सकता है।

भाजपा संगठन में भी होगा बड़ा फेरबदल

केवल सरकार ही नहीं, भाजपा संगठन में भी बदलाव तय माने जा रहे हैं। जिलों से लेकर क्षेत्रीय स्तर तक कई पदों पर नए चेहरों को लाने की तैयारी है। सभी मोर्चे में कमान बदली जा सकती है। दिल्ली में हुई बैठकों में यह सहमति बनी है कि सरकार और संगठन दोनों में एक साथ बदलाव कर चुनावी मशीनरी को पूरी तरह सक्रिय किया जाए।

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