उत्तर प्रदेशराज्यलखनऊ

लखनऊ : करोड़ों के मुद्रा लोन घोटाले का मास्टर माइंड गिरफ्तार

एसटीएफ व साइबर क्राइम थाने की संयुक्त टीम ने रविवार सुबह आईआईएम रोड स्थित सहारा होम्स के पास से बड़े जालसाज को गिरफ्तार किया। आरोपियों ने अपने गिरोह के सदस्यों के साथ फर्जी दस्तावेज तैयार कर बैंक अधिकारियों व कर्मचारियों से मिली भगत की। इसी दस्तावेजों के आधार पर 100 से अधिक लोगों, फर्मों व कंपनियों के नाम पर सैकड़ों करोड़ का मुद्रा लोन कराया। गिरफ्तार आरोपी गिरोह का मास्टर माइंड बताया जा रहा है।

एसटीएफ के एएसपी विशाल विक्रम सिंह के मुताबिक गिरफ्तार आरोपी आमिर अहसन मऊ के मोहम्मदाबाद गोहना स्थित सैयदवाड़ा का रहने वाला है। उसने बीए की पढ़ाई की है। साथ में ड्राफ्टमैन डिप्लोमा कर चुका है। आरोपी के पास से एक मोबाइल फोन, आधार कार्ड, तीन क्रेडिट/डेबिट कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, चार चार पहिया वाहन (दो इनोवा क्रिस्टा, एक एक्सयूवी-500, एक सियाज) तथा 730 रुपये नकद बरामद किया गया है। एसटीएफ अधिकारी के मुताबिक हजरतगंज वजीर हसन रोड स्थित इनकम टैक्स कालोनी निवासी राज बहादुर गुरुंग ने शिकायत की।

शिकायत की जांच अपर पुलिस अधीक्षक एसटीएफ विशाल विक्रम सिंह के नेतृत्व में साइबर टीम कर रही थी। पीड़ित ने बताया कि व्यवसाय के लिए लोन की जरूरत पर उसके परिचित ने नावेद हसन से संपर्क कराया, जो विभिन्न बैंकों के मैनेजरों से पहचान होने का दावा कर लोन दिलाने का काम करता था। पीड़ित से कई दस्तावेजों पर हस्ताक्षर कराए गए और बाद में बताया गया कि लोन स्वीकृत नहीं हुआ। कुछ महीनों बाद ईएमआई का संदेश आने पर सिविल स्कोर जांच में उसके नाम से दो लोन स्वीकृत होने का खुलासा हुआ।

बैंक मैनेजर सहित चार आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार

इस मामले में एसटीएफ ने 13 सितंबर 2025 को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया, जानकीपुरम शाखा के मैनेजर गौरव सिंह समेत चार आरोपियों को गिरफ्तार कर साइबर क्राइम थाना, लखनऊ में एफआईआर दर्ज कराया था। पूछताछ व दस्तावेजों के विश्लेषण में सामने आया कि पूरे गिरोह का संचालन नावेद के साथ मिलकर आमिर अहसन कर रहा था, जिसकी तलाश जारी थी।

फर्जी फोटो व दस्तावेजों से कराया जाता था लोन

पूछताछ में आमिर अहसन ने बताया कि वर्ष 2018 में उसकी मुलाकात नावेद से हुई थी, जिसके बाद दोनों ने फर्जी तरीके से लोन कराने की योजना बनाई। गिरोह लोगों के आधार व पैन कार्ड पर लगी फोटो एडिट कर उनकी जगह अपने सदस्यों की फोटो लगाता था। बैंक कर्मियों की साठगांठ से फर्जी कंपनियों के नाम पर कोटेशन तैयार कर मुद्रा लोन स्वीकृत कराया जाता था और बाद में रकम हड़प ली जाती थी। गिरोह ने अलग-अलग बैंकों से 100 से अधिक व्यक्तियों, फर्मों व कंपनियों के नाम पर फर्जी तरीके से लोन कराकर करोड़ों रुपये अर्जित करने की बात स्वीकार की है। पुलिस के अनुसार आरोपियों द्वारा बताए गए बैंक खातों, वॉलेट और अन्य वित्तीय लेन-देन की जांच की जा रही है। बरामद इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों का फॉरेंसिक परीक्षण भी कराया जाएगा तथा गिरोह के अन्य सदस्यों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।

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