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UP Budget Session : विधान परिषद में बोले सीएम योगी- प्रतिपक्ष से सम्मान की उम्मीद करना बेवकूफी

लखनऊ। उत्तर प्रदेश विधान परिषद में सोमवार को बजट सत्र पर चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने समाजवादी पार्टी (सपा) समेत सभी विपक्ष पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि प्रतिपक्ष से सम्मान या सकारात्मक अपेक्षा करना बेवकूफी होगी। राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव की चर्चा के दौरान दिए गए अपने संबोधन में मुख्यमंत्री योगी ने कहा कि मुख्य प्रतिपक्षी का आचरण संवैधानिक प्रमुख के प्रति अशोभनीय और दुर्भाग्यपूर्ण रहा है।

सीएम योगी ने कहा, “राज्यपाल प्रदेश की संवैधानिक प्रमुख होती हैं। उनके प्रति मुख्य प्रतिपक्ष का व्यवहार लोकतंत्र को कमजोर करता है और यह अवमानना के दायरे में आता है। खैर, जिस प्रकार का प्रतिपक्ष है, उससे सम्मान की अपेक्षा करना बेवकूफी होगी।”

मुख्यमंत्री ने राज्यपाल के अभिभाषण को पिछले 8-9 वर्षों की सरकार की उपलब्धियों का दस्तावेज बताते हुए कहा कि देश-दुनिया मानती है कि उत्तर प्रदेश में बदलाव आया है। उन्होंने विपक्षी सरकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि संकुचित एजेंडे वाली सरकारों ने प्रदेश में पहचान का संकट खड़ा किया था। पिछली सरकारों ने राज्य को अराजकता और अव्यवस्था का गढ़ बना दिया था, जहां सत्ता के संरक्षण में गुंडे-माफिया समानांतर सरकार चला रहे थे।

178 निजी अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त किये : ब्रजेश पाठक

उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री एवं स्वास्थ्य मंत्री ब्रजेश पाठक ने सोमवार को कहा कि राज्य में विभिन्न शिकायतों पर कार्रवाई करते हुए 178 निजी अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त किये गये हैं। उनमें से 59 के लाइसेंस आवश्यक सुनवाई के बाद बहाल कर दिये गये हैं। विधानसभा में समाजवादी पार्टी (सपा) के सदस्य अतुल प्रधान के एक अनुपूरक प्रश्न का जवाब देते हुए पाठक ने कहा, ”निजी अस्पतालों के खिलाफ करीब 500 शिकायतें मिलीं और हमने 1678 अस्पतालों के लाइसेंस निरस्त कर दिए थे। इसके बाद कुछ अस्पतालों ने सम्बन्धित प्राधिकरण में अपील की थी, जिसमें सुनवाई के बाद 59 निजी अस्पतालों के लाइसेंस बहाल कर दिये गये थे।”

पाठक ने सदन को यह भी बताया कि नियमों का उल्लंघन कर संचालित किये जा रहे 281 निजी अस्पतालों के खिलाफ प्राथमिकी भी दर्ज करायी गयी है। इसके अलावा 533 अस्पताल सील किये गये। उन्होंने कहा, ”अब तक 1542 अस्पतालों को नोटिस जारी करके कहा गया है कि वे अपने कामकाज में सुधार करें।” सपा सदस्य ने अपने तारांकित प्रश्न में जानना चाहा था कि क्या सरकार के पास राज्य में निजी अस्पतालों द्वारा इलाज के खर्च के नाम पर भारी रकम वसूले जाने, डॉक्टरों के परामर्श शुल्क और अलग-अलग चिकित्सीय परीक्षणों की दरें तय करने और उनमें मनमानी बढ़ोत्तरी को रोकने के लिए कोई योजना है ?

इसके लिखित जवाब में पाठक ने कहा, ”राज्य सरकार की ऐसी कोई नीति नहीं है जिससे राज्य में निजी चिकित्सकों के परामर्श शुल्क और अलग-अलग मेडिकल टेस्ट की दरें निर्धारित की जा सकें, उनमें एकरूपता सुनिश्चित की जा सके और मनमानी बढ़ोत्तरी को रोका जा सके।” उन्होंने कहा, ”राज्य सरकार द्वारा बनाए गए अलग-अलग अस्पतालों में आम जनता को मुफ़्त इलाज (चिकित्सीय परामर्श और दवाओं सहित) की सुविधा दी जा रही है।”

पाठक ने कहा कि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना (पीएमजेएवाई) के तहत आयुष्मान कार्ड धारकों को एक लाख रुपये तक का इलाज नि:शुल्क उपलब्ध कराया जाता है। सरकारी और निजी अस्पतालों में तय पैकेज के हिसाब से पांच लाख रुपये तक का इलाज और 70 साल से अधिक उम्र के वरिष्ठ नागरिकों को आयुष्मान वय वंदना योजना के तहत लाभ दिये जाते हैं।

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