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कैबिनेट मीटिंग में योगी सरकार का बड़ा फैसला : विभाजन के वक्त पाकिस्तान से आये परिवारों को मिलेगा ‘भूमि स्वामित्व’ का अधिकार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई मंत्रिमंडल की बैठक में कुल 22 प्रस्ताव पेश किए गए, जिन्हें कैबिनेट ने सर्वसम्मति से मंजूरी प्रदान कर दी। बैठक में परिवहन विभाग से जुड़े कई अहम प्रस्तावों को स्वीकृति दी गई। मंत्रिमंडल ने विभाजन के वक्त पाकिस्तान से विस्थापित होकर पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर जिलों में आये 12 हजार 380 परिवारों को भूमि के स्वामित्व का अधिकार देने से सम्बन्धित प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी।

इसके साथ ही राज्य सरकार ने पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (पीपीपी) मॉडल पर 49 नए बस अड्डों के निर्माण को हरी झंडी दे दी है। इससे पहले पहले चरण में 23 बस अड्डों की प्रक्रिया शुरू की जा चुकी है। नई स्वीकृतियों के साथ अब प्रदेश के 52 जनपद इस योजना के दायरे में आ जाएंगे।

प्रस्तावित बस अड्डों को आधुनिक सुविधाओं से लैस करते हुए एयरपोर्ट की तर्ज पर विकसित किया जाएगा। इसके अलावा बस अड्डों के निर्माण के लिए विभिन्न जनपदों में सरकारी भूमि उपलब्ध कराने के प्रस्तावों को भी मंजूरी दी गई है। हाथरस जनपद के सिकंदराराऊ कस्बे में कृषि विभाग की 2 हेक्टेयर भूमि निःशुल्क बस अड्डे के लिए उपलब्ध कराई जाएगी। बुलंदशहर के डिबाई क्षेत्र में सिंचाई विभाग की भूमि तथा बलरामपुर के तुलसीपुर में लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) की भूमि बस अड्डा निर्माण के लिए हस्तांतरित किए जाने को स्वीकृति दी गई है।

उत्तर प्रदेश मंत्रिमंडल ने विभाजन के वक्त पाकिस्तान से विस्थापित होकर पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर जिलों में आये 12 हजार 380 परिवारों को भूमि के स्वामित्व का अधिकार देने से सम्बन्धित प्रस्ताव को मंगलवार को मंजूरी दे दी। वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिये गये इस निर्णय की जानकारी दी।

उन्होंने बताया कि भारत-पाकिस्तान के विभाजन के समय विस्थापित होकर पीलीभीत, लखीमपुर खीरी, रामपुर और बिजनौर में विस्थापित होकर आए तथा संशोधित नागरिकता अधिनियम 2019 के तहत भारतीय नागरिकता के लिए पात्र अथवा अनुसूचित जनजाति समुदाय अथवा उपनिवेशन योजना के तहत बसाए गए परिवारों को भूमि पर स्वामित्व के अधिकार प्रदान करने के संबंध में मंत्रिमंडल ने सहमति दे दी है।

वित्त मंत्री ने बताया कि लखीमपुर खीरी जिले में ऐसे परिवारों की कुल संख्या 2350, पीलीभीत में 4000, बिजनौर में 3856 और रामपुर में 2174 है। खन्ना ने बताया कि इन परिवारों के जो लोग बंटवारे के समय शरणार्थी के रूप में इन चार जिलों में आए थे, उन्हें पिछले करीब 70 वर्षों से स्वामित्व के अभाव में खेती के लिए बैंक से कर्ज प्राप्त करने एवं सरकारी खरीद केंद्रों पर अपनी फसल बेचने के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।

उन्होंने बताया कि मंत्रिमंडल ने खासतौर से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता द्वितीय संशोधन-2026 के माध्यम से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता 2006 में परिवर्तन करते हुए धारा 76 (1) के अंतर्गत आवश्यक कार्रवाई कर इन परिवारों को यह लाभ असंक्रमणीय अधिकार संहिता के लागू होने की तारीख से प्रदान किया जा रहा है। खन्ना ने बताया कि इन परिवारों को एक एकड़ की अधिकृत सीमा तक जमीन लेने का अधिकार होगा, बशर्ते वह जमीन सीलिंग में ना आती हो और साथ ही साथ खलिहान, चारागाह या तालाब की जमीन ना हो।

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