पंजाबराज्य

भाजपा ने भारत को ‘विश्वगुरु’ बनाने का वादा किया था, लेकिन आज ताइवान जैसा छोटा देश भी भारत को पीछे छोड़ चुका है: हरपाल सिंह चीमा

चंडीगढ़ 27 मई

पंजाब के वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने बुधवार को कहा कि भाजपा की केंद्र सरकार के राज में भारतीय आर्थिकता लगातार कमजोर हो रही है। उन्होंने कहा कि भाजपा के बारह साल के राज ने देश को आर्थिक मंदी, बढ़ते कर्ज, महंगाई, बेरोजगारी और इन्वेस्टर्स के गिरते भरोसे के कगार पर ला खड़ा किया है।

एक बयान जारी कर वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि भाजपा सरकार ने भारत को “विश्वगुरु” बनाने का वादा किया था, लेकिन आज देश मुख्य आर्थिक संकेतक के मामले में छोटी आर्थिकता से भी पीछे रह गया है। उन्होंने कहा, “ताइवान का मार्केट कैपिटलाइजेशन अब भारत से आगे निकल गया है। सिर्फ 2.5 करोड़ की आबादी वाला देश 1.3 बिलियन की आबादी वाले देश से आगे निकल गया है। भारत, जो कभी जीडीपी साइज के मामले में दुनिया की चौथी सबसे बड़ी आर्थिकता था, अब छठे नंबर पर खिसक गया है।”

उन्होंने टिप्पणी की कि ज्योग्राफी और आबादी दोनों के मामले में भारत से बहुत छोटा देश आगे निकलने में कामयाब रहा है, जबकि भाजपा सरकार लगातार इकॉनमिक मामलों पर जवाबदेही से भाग रही है। मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “वे भारत को विश्व गुरु बनाना चाहते थे, लेकिन आज जापान से भी छोटा और सिर्फ़ 2.5 करोड़ की आबादी वाला देश हमसे आगे निकल गया है। मोदी जी को अब यह साफ़ करना चाहिए कि वे देश की आर्थिकता को कैसे मैनेज करने की योजना बना रहे हैं।”

वित्त मंत्री ने रिज़र्व बैंक ऑफ़ इंडिया (आरबीआई) के रिस्क बफ़र से जुड़े हालिया फ़ैसले पर भी केंद्र से सवाल किया। उन्होंने कहा कि यह फ़ैसला दिखाता है कि भाजपा सरकार लंबे समय में आर्थिकता को मज़बूत करने के बजाय कुछ समय के लिए अपने बजट को मैनेज करने में हिचकिचा रही है।

आरबीआई द्वारा केंद्र को रिकॉर्ड डिविडेंड ट्रांसफर करने से पहले अपने कंटिंजेंट रिस्क बफ़र को 7.5% से घटाकर 6.5% करने की रिपोर्ट का हवाला देते हुए, हरपाल सिंह चीमा ने कहा कि ऐसे फ़ैसले देश की वित्तीय स्थिरता को कमज़ोर कर सकते हैं।

मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “हमने यह मुद्दा तब भी उठाया था जब आरबीआई ने भारत सरकार को ‘रिकॉर्ड‘ डिविडेंड दिया था। भारत के सबसे ज़रूरी फाइनेंशियल इंस्टीट्यूशन की रिस्क-मैनेजमेंट कैपेसिटी की कीमत पर ऐसे ट्रांसफर नहीं किए जा सकते। यह सरकार सिर्फ़ अपने बजट को बैलेंस करने में दिलचस्पी रखती है, भले ही इसका मतलब तेल की कीमतें बढ़ाना हो, महंगाई बढ़ाना हो या आरबीआई की फाइनेंशियल ताकत को कमज़ोर करना हो।”

उन्होंने आगे कहा कि भाजपा सरकार को जवाब देना होगा कि सिर्फ़ बजट मैनेजमेंट के लिए आरबीआई की रिस्क-मैनेजमेंट कैपेसिटी से समझौता क्यों किया गया। हरपाल सिंह चीमा ने कहा, “भाजपा का इकोनॉमिक मैनेजमेंट साफ़ तौर पर फेलियर दिखाता है। आम नागरिक महंगाई, तेल की बढ़ती कीमतों और कमज़ोर होती इकोनॉमिक स्टेबिलिटी के रूप में इसकी कीमत चुका रहा है, जबकि सरकार लगातार फैक्ट्स छिपा रही है और लोगों को गुमराह कर रही है।”

पंजाब के वित्त मंत्री ने ज़ोर देकर कहा कि देश को पारदर्शी इकोनॉमिक गवर्नेंस, घरेलू डिमांड को मज़बूत करने, रोज़गार पैदा करने, महंगाई को कंट्रोल करने और इन्वेस्टर का भरोसा वापस लाने पर फोकस करने वाली पॉलिसियों की ज़रूरत है, न कि ध्यान भटकाने वाली राजनीति और हेडलाइन बटोरने वाले इंतज़ामों की। 

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