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8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ेगी सैलरी? 18 हजार बेसिक पर जानें फिटमेंट फैक्टर का पूरा हिसाब

नई दिल्ली। केंद्र सरकार के कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के लिए 8वें वेतन आयोग को लेकर इंतजार बढ़ता जा रहा है। आयोग के गठन के करीब 10 महीने पूरे होने जा रहे हैं और सभी हितधारकों के साथ परामर्श की प्रक्रिया जारी है। ऐसे में कर्मचारियों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार की ओर से जारी नया बेसिक वेतन कितना होगा और फिटमेंट फैक्टर भी कितना तय किया जाएगा?

8वें वेतन आयोग की अध्यक्षता न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) रंजना प्रकाश देसाई कर रही हैं। आपको बता दें कि आयोग को अपनी सिफारिशें देने के लिए 18 महीने का समय दिया गया है। वेतन, भत्ते और पेंशन से जुड़े कई अहम मुद्दों पर गंभीरता के साथ विचार होना है, लेकिन इन सभी के बीच सबसे ज्यादा चर्चा फिटमेंट फैक्टर पर है।

पहले समझिए फिटमेंट फैक्टर क्या होता है

फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है, जिसके आधार पर मौजूदा मूल वेतन को संशोधित कर नया मूल वेतन यानी का बेसिक सैलरी निर्धारित की जाती है। इसलिए फिटमेंट फैक्टर जितना अधिक होगा, कर्मचारियों के संशोधित बेसिक पे पर उतना ही बड़ा असर पड़ेगा।

फिलहाल केंद्रीय कर्मचारियों का न्यूनतम मूल वेतन 18,000 रुपए है। इसे 7वें वेतन आयोग की सिफारिशों के आधार पर तय किया गया था।

7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 था और इससे पहले 6वें वेतन आयोग में यह 1.86 निर्धारित था।

अब 8वें वेतन आयोग को लेकर कर्मचारी और पेंशनभोगी संगठन लगातार इससे ज्यादा फिटमेंट फैक्टर की मांग कर रहे हैं।

18,000 बेसिक पर 3.61 फैक्टर लगा तो कितना होगा वेतन?

सर्वे ऑफ इंडिया (Survey of India) की मिनिस्टीरियल स्टाफ एसोसिएशन यानी MSA ने 3.61 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है।

अगर इसी फैक्टर को स्वीकार किया जाता है तो मौजूदा 18,000 के न्यूनतम बेसिक सैलरी के आधार पर संशोधित बेसिक सैलरी करीब 64,980, यानी लगभग 65,000 हो सकती है।

यानी प्रस्ताव के हिसाब से बेसिक पे में करीब 46,980 का अंतर बन सकता है।

3.833 फिटमेंट फैक्टर पर 69 हजार के करीब बेसिक

नेशनल काउंसिल-जेसीएम स्टाफ साइड और भारत पेंशनर्स समाज ने 3.833 फिटमेंट फैक्टर की मांग की है। 18,000 के मौजूदा न्यूनतम मूल वेतन पर इस फैक्टर के आधार पर संशोधित बेसिक करीब 69,000 तक पहुंच सकता है। यह भी ध्यान रखना जरूरी है कि यह केवल मांग के आधार पर निकाला गया अनुमान है, अंतिम वेतन नहीं।

4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग, ₹72 हजार तक पहुंच सकता है बेसिक

आपको बता दें कि भारतीय प्रतिरक्षा मजदूर संघ ने सबसे ज्यादा 4.00 फिटमेंट फैक्टर की मांग रखी है।

अगर सरकार इस प्रस्ताव को स्वीकार करती है तो 18,000 का मौजूदा न्यूनतम बेसिक करीब 72,000 हो सकता है।

इस तरह 3.61 और 4.00 फिटमेंट फैक्टर के प्रस्तावों के बीच न्यूनतम मूल वेतन में करीब 7,020 प्रति माह का अंतर बनता है।

आपकी सैलरी पर इसका क्या मतलब होगा?

यहां एक बात समझना बेहद जरूरी है। 65,000 रुपए, 69,000 रुपए या 72,000 रुपए को हाथ में आने वाली सैलरी न समझें।

ये आंकड़े केवल 18,000 के मौजूदा न्यूनतम बेसिक पर अलग-अलग प्रस्तावित फिटमेंट फैक्टर लगाने से निकलते हैं। कर्मचारी की वास्तविक मासिक सैलरी इससे अलग होगी, क्योंकि वेतन में बेसिक पे के अलावा महंगाई भत्ता और दूसरे भत्ते भी शामिल होते हैं।

8वें वेतन आयोग की अंतिम सिफारिशों के बाद नए वेतन मैट्रिक्स और दूसरे घटकों को ध्यान में रखकर ही वास्तविक वेतन का पता चलेगा।

पेंशनभोगियों के लिए भी क्यों अहम है फिटमेंट फैक्टर?

फिटमेंट फैक्टर का असर सिर्फ नौकरी कर रहे कर्मचारियों तक सीमित नहीं है। पेंशन और कई सेवानिवृत्ति लाभ मूल वेतन से जुड़े होते हैं।

इसलिए यदि अपेक्षाकृत अधिक फिटमेंट फैक्टर को मंजूरी मिलती है तो पेंशनभोगियों को भी इसका लाभ मिल सकता है। हालांकि उनकी वास्तविक पेंशन में कितनी बढ़ोतरी होगी, यह अंतिम नियम और आयोग की सिफारिशों के बाद ही स्पष्ट होगा।

अभी कितना इंतजार करना होगा?

फिलहाल कर्मचारी संगठनों और पेंशनभोगी संगठनों की ओर से अलग-अलग मांगें आयोग के सामने रखी जा रही हैं। आयोग की प्रक्रिया पूरी होने और रिपोर्ट सरकार को सौंपे जाने के बाद ही फिटमेंट फैक्टर पर तस्वीर साफ होगी।

इसलिए अभी 65 हजार, 69 हजार या 72 हजार को 8वें वेतन आयोग की तय सैलरी मानना सही नहीं होगा।

अंतिम वेतन वृद्धि केवल फिटमेंट फैक्टर से तय नहीं होगी। इसमें नए वेतन मैट्रिक्स, महंगाई भत्ता, अन्य भत्ते और आयोग की अंतिम सिफारिशों की भूमिका भी होगी।

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