शिक्षा के नाम पर प्राविधिक शिक्षा विभाग में खुली संगगठित लूट की दुकान

अनिल तिवारी, बेबाक पत्रकार
लखनऊ : उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भ्रष्टाचार पर जीरो टॉलरेंस की बात बार-बार दोहराई गई है परंतु प्राविधिक शिक्षा विभागज़ उत्तर प्रदेश में अवैध संबद्धीकरण दोहरे प्रभार का सिंडिकेट एवं महिला पॉलिटेक्निकों की बदहाली और माँग स्थानांतरण नीति 2026 के उल्लंघन तथा भ्रष्टाचार पर माननीय मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की नज़र ही नही जा रही है जहां शिक्षा के नाम पर संगठित लूट की दुकान चल रही है और विशेष तकनीकी सेल व अवैध अटैचमेंट की आड़ में करोड़ों की सैलरी का बंदरबाँट दूरस्थ संस्थाओं के दोहरे चार्ज देकर सुविधा शुल्क वसूली का बड़ा सिंडिकेट संचालित है।
उत्तर प्रदेश के प्राविधिक शिक्षा विभाग में पारदर्शी शासन एवं स्थानांतरण नीति 2026 की धज्जियाँ उड़ाते हुए एक विशाल संस्थागत भ्रष्टाचार का मामला प्रकाश में आया है। विभाग में सालों से जमे अधिकारियों अवैध संबद्धीकरण और नियमों को दरकिनार कर दिए जा रहे दोहरे प्रभार के नाम पर करोड़ों रुपए का खेल खेला जा रहा है। गरीब एवं निम्न तबके की छात्राओं तथा छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ कर महिला पॉलिटेक्निकों को बदहाली की कगार पर पहुँचा दिया गया है।
विभागीय सूचनाओं व गंभीर आरोपों के अनुसार इस पूरे भ्रष्टाचार व सिंडिकेट का मुख्य ताना-बाना विभागाध्यक्ष अवधेश पटेल एवं विभागाध्यक्ष आत्म प्रकाश सिंह द्वारा बुना जा रहा है।सूत्रों का दावा है कि अवधेश पटेल के फोन के माध्यम से विभागीय स्तर की तमाम डीलिंग संपादित की जाती हैं वहीं दूसरी ओर आत्म प्रकाश सिंह निदेशालय और शासन स्तर पर प्रशासनिक मैनेजमेंट की कमान संभालते हैं।
इन अधिकारियों ने विशेष तकनीकी सेल के नाम पर एक सुरक्षित ढाल तैयार की है। इस सेल के बहाने विकल्प कुमार सिंह, कमल कुमार, रोहित कटियार, जितेन्द्र यादव , श्रीमती पूजा सक्सेना, अलोक रंजन, मोइन अहमद, विवेकानंद, हेमदुरगपाल,अतुल राज, सुमित कुमार जैसे चहेते प्रवक्ताओं और अधिकारियों को मूल तैनाती से हटाकर वर्षों से लखनऊ और कानपुर जैसे सुगम स्थलों पर अटैच कर रखा गया है।
नियमों की धज्जियाँ उड़ाकर दोहरे प्रभार की मोटी फीस और दूरस्थ चार्ज का सुविधा शुल्क खेल स्थानांतरण एवं तैनाती नियमों की धज्जियाँ उड़ाते हुए योग्य एवं सक्षम अधिकारियों की उपस्थिति के बावजूद दूर-दराज की संस्थाओं एवं महत्वपूर्ण बोर्डों का अतिरिक्त प्रभार मनपसंद अधिकारियों को सौंपा जा रहा है।
* श्री संजीव सिंह प्रधानाचार्य राजकीय महिला पॉलिटेक्निक लखनऊ होने के बावजूद सचिव संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद JEECUP का नियम विरुद्ध दोहरा प्रभार संभाल रहे हैं।
* डॉ संतोष कुमार सिंह सचिव फीस नियमन समिति के साथ-साथ सचिव प्राविधिक शिक्षा परिषद बोर्ड का महत्वपूर्ण दोहरा प्रभार देख रहे हैं।
* श्रीमती कविता त्रिपाठी नियमानुसार शासकीय सेवा में एक ही मंडल या जिले में अधिकतम 7 वर्ष की सीमा निर्धारित है लेकिन मैडम पिछले 20 वर्षों से लखनऊ जिले व मंडल में जमी हुई हैं। यही नहीं 80 किमी दूर हरदोई और सीतापुर का दोहरा प्रभार भी इन्हीं के पास है।
* श्री जानबेग लोनी गाजियाबाद के साथ-साथ बादलपुर का दोहरा चार्ज संभाल रहे हैं।
* श्री ए के पौराणिक मानिकपुर और बरगढ़ का दोहरा चार्ज देख रहे हैं।
* श्री बसंत लाल श्रावस्ती और ग्रांट का दोहरा चार्ज संभाल रहे हैं।
* श्री सुनील सोनकर बलिया और आजमगढ़ का दोहरा चार्ज देख रहे हैं।
महिला पॉलिटेक्निकों की बर्बादी और एकल पदों के अधिकारियों का अवैध अटैचमेंट विभागीय सिंडिकेट की इस मनमानी का सबसे भयानक असर प्रदेश की महिला पॉलिटेक्निक संस्थाओं पर पड़ा है। महिला पॉलिटेक्निकों में तैनात एकल पद ऐसे पद जिनका विकल्प संस्था मे उपलब्ध नहीं होता धारण करने वाले महत्वपूर्ण अधिकारियों को भी लखनऊ और कानपुर में अटैच कर लिया गया है।
* श्री प्रवीण कुमार कर्मशाला अधीक्षक
* श्री मुरलीधर पांडे टेक्नीशियन
* श्री विकल्प कुमार सिंह विभागाध्यक्ष
* श्री अवधेश पटेल विभागाध्यक्ष
* हरिनाम विभागाध्यक्ष
इन अधिकारियों ने सालों से चॉक-डस्टर तक को हाथ नहीं लगाया है। ये अधिकारी मूल संस्थानों से नदारद रहकर लखनऊ में अटैच हैं जबकि सरकार प्रतिमाह इन पर करोड़ों रुपए वेतन के रूप में खर्च कर रही है।
संस्थानों में गरीब व वंचित तबके से आने वाली छात्राओं की पढ़ाई और प्रायोगिक कार्य पूरी तरह ठप हैं। ताज्जुब की बात यह है कि संस्थानों के प्रधानाचार्य जो आम कर्मचारियों की एक दिन की अनुपस्थिति पर नोटिस थमा देते हैं वे इन सालों से अटैच अधिकारियों पर पूरी तरह मौन हैं जो निदेशालय से लेकर संस्थानों तक फैले सुविधा शुल्क सिंडिकेट को साबित करता है।
4 स्थानांतरण नीति 2026 के उल्लंघन एवं अनियमितताओं का विस्तृत विवरण
* श्री पी के सिंह प्रधानाचार्य रा महिला पॉलिटेक्निक वाराणसी झांसी मंडल में 20 से अधिक वर्षों तक तैनात रहने के बावजूद पुनः तालबेहट ललितपुर में ही पोस्टिंग दे दी गई।
* श्री पी एन जायसवाल विभागाध्यक्ष केमिकल जमुनियाडीह बाराबंकी कानपुर में 10 से अधिक वर्षों की तैनाती के बाद पुनः नीति का उल्लंघन कर रा पॉलीटेक्निक कानपुर भेज दिया गया।
* श्री बी एन चौधरी प्रधानाचार्य शासकीय पॉलीटेक्निक मऊ स्थानांतरण नीति के विपरीत नियम विरुद्ध तरीके से MMIT गोरखपुर में स्थानांतरण किया गया।
* श्री आत्म प्रकाश सिंह विभागाध्यक्ष कंप्यूटर साइंस संबद्धीकरण एवं पोस्टिंग लगातार नियमों को दरकिनार कर केवल लखनऊ और कानपुर के बीच सीमित रखी गई।
* श्री संजीव सिंह प्रधानाचार्य रा महिला पॉलिटेक्निक लखनऊ लखनऊ में 20 वर्ष से अधिक सेवा के बाद पुनः लखनऊ में तैनाती और सचिव संयुक्त प्रवेश परीक्षा परिषद JEECUP का दोहरा प्रभार दिया गया।
* डॉ संतोष कुमार सिंह विभागाध्यक्ष या अधिकारी सचिव फीस नियमन समिति के साथ-साथ सचिव प्राविधिक शिक्षा परिषद बोर्ड का भी नियम विरुद्ध दोहरा प्रभार संभाल रहे हैं।
* श्री इंद्रजीत सचान विभागाध्यक्ष शासकीय पॉलीटेक्निक लखनऊ पिछले 20 से अधिक वर्षों से निरंतर शासकीय नियमों का उल्लंघन कर लखनऊ में ही मलाईदार पद पर कार्यरत हैं।
* श्री प्रवेश वर्मा विभागाध्यक्ष या प्रभारी प्रधानाचार्य मोहम्मदी गंभीर आरोपों और तत्कालीन जाँच रिपोर्ट के बावजूद दंडात्मक कार्यवाही न होना विभागीय संरक्षण को दर्शाता है।
जानकारी में आया है कि श्री अवधेश पटेल विभागाध्यक्ष स्थानांतरण के समय प्रधानाचार्य एवं विभागाध्यक्ष लोगो को फोन कर करके वसूली का कार्य पूरे मनोयोग से कर रहे थे।
अवधेश कुमार पटेल के संबंध में आरोप है कि वे माननीय मंत्री श्री आशीष पटेल के स्वजातीय एवं रिश्तेदार हैं तथा छात्र जीवन से ही उनके निकट संपर्क में रहे हैं। यह भी बताया जाता है कि दोनों ने बुंदेलखंड इंजीनियरिंग कॉलेज से अध्ययन किया। कथित रूप से श्री अवधेश कुमार पटेल ने इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में बी टेक किया तथा अध्ययन के दौरान वे श्री आशीष पटेल से एक वर्ष वरिष्ठ थे। एक वर्ष अनुत्तीर्ण होने के पश्चात दोनों एक ही बैच में आ गए।
अवधेश कुमार पटेल ने वर्ष 2008 में तकनीकी शिक्षा विभाग में प्रवक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग के पद पर सेवा प्रारंभ की। उपलब्ध मानव संपदा अभिलेख भी उनकी नियुक्ति दिनांक 13 अगस्त 2008 तथा इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग में उनकी सेवा की पुष्टि करते हैं।
आरोप है कि श्री आशीष पटेल के तकनीकी शिक्षा मंत्री बनने के पश्चात श्री अवधेश कुमार पटेल नियम-विरुद्ध तरीके से उनके साथ संबद्ध रहकर कार्य करते रहे जबकि ऐसी संबद्धता के संबंध में कोई विधिवत आदेश उपलब्ध नहीं कराया गया। इस कारण उनकी भूमिका अधिकारिक स्थिति तथा विभागीय कार्यों में उनकी वास्तविक भूमिका को लेकर गंभीर प्रश्न उठते हैं।
यह भी आरोप है कि मंत्री से निकटता के प्रभाव का उपयोग करते हुए श्री अवधेश कुमार पटेल ने विभागीय मामलों में अपना प्रभाव बढ़ाया तथा कुछ व्यक्तियों के माध्यम से अनुचित लाभ एवं भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने का प्रयास किया।
सबसे गंभीर प्रश्न उनकी विभागाध्यक्ष पद पर पदोन्नति को लेकर उठाया जाता है। आरोप है कि लोक सेवा आयोग के माध्यम से सीधी भर्ती के लिए निर्धारित पदों पर विभागीय पदोन्नति समिति DPC के माध्यम से पदोन्नति कराते समय संबंधित माननीय उच्च न्यायालय एवं माननीय उच्चतम न्यायालय के आदेशों तथा लागू सेवा नियमों की अनदेखी की गई। इस पूरी प्रक्रिया की वैधानिकता पात्रता एवं नियम-संगतता की स्वतंत्र जाँच आवश्यक है।
इसके अतिरिक्त यह भी आरोप लगाया जाता है कि विभागाध्यक्ष पद के लिए अपेक्षित M Tech की योग्यता उनके पास नहीं थी। कथित रूप से उन्होंने KNIT सुल्तानपुर से पार्ट-टाइम M Tech करने का प्रयास किया था किंतु वे उसे सफलतापूर्वक पूर्ण नहीं कर सके।
यह अत्यंत आश्चर्य का विषय है कि जिस पद को माननीय उच्चतम न्यायालय के निर्णय के पश्चात निर्धारित योग्यता एवं उच्च शिक्षा के बिना श्री अवधेश कुमार पटेल प्राप्त नहीं कर सकते थे आरोप है कि वही पद उन्हें माननीय मंत्री श्री आशीष पटेल के प्रभाव के कारण प्रदान कर दिया गया। यदि यह तथ्य सही है तो यह उन योग्य एवं उच्च शिक्षित शिक्षकों के अधिकारों पर गंभीर आघात है जो निर्धारित योग्यता एवं पात्रता रखते हुए भी पदोन्नति की प्रतीक्षा कर रहे थे।
इतना ही नहीं आरोप है कि श्री अवधेश कुमार पटेल को सामान्य पदोन्नति की पहली सीढ़ी से सीधे पाँचवीं सीढ़ी पर पहुँचा दिया गया जो अपने आप में एक अत्यंत असाधारण और चौंकाने वाला मामला प्रतीत होता है।
श्री अवधेश कुमार पटेल 5400 Grade Pay पर कार्यरत थे। आरोप है कि उन्हें सामान्य क्रम के 6000 7000 तथा 8000 Grade Pay प्रदान किए बिना सीधे 9000 Grade Pay दे दिया गया। अर्थात् कथित रूप से उनका वेतन लगभग 100000 से बढ़ाकर 250000 के स्तर तक पहुँचा दिया गया।
यदि ये सभी तथ्य अभिलेखों से प्रमाणित होते हैं तो यह प्रश्न स्वाभाविक रूप से उठता है कि एक कर्मचारी को सामान्य पदोन्नति की कई सीढ़ियाँ पार कर सीधे उच्चतम Grade Pay प्रदान करने का वैधानिक आधार क्या था, क्या इसके लिए कोई विशेष शासनादेश सेवा नियम अथवा सक्षम प्राधिकारी की विधिवत स्वीकृति उपलब्ध थी।
यदि ऐसी कोई वैधानिक व्यवस्था थी तो उसका लाभ अन्य समान रूप से पात्र एवं योग्य शिक्षकों को क्यों नहीं मिला, आशीष पटेल के प्रभाव एवं निकटता के कारण श्री अवधेश कुमार पटेल को नियमों से हटकर असाधारण लाभ प्रदान किए गए है जो केवल एक व्यक्ति को लाभ पहुँचाने का मामला नहीं है बल्कि यह योग्य एवं उच्च शिक्षित शिक्षकों के अधिकारों समान अवसर सेवा नियमों की निष्पक्षता तथा सरकारी व्यवस्था में पारदर्शिता से जुड़ा गंभीर प्रकरण है।



