उत्तर प्रदेशलखनऊ

निर्मलेन्दू की पुस्तक ‘कश्मीर’ : इतिहास और परंपरा’का मनोज सिन्हा ने किया लोकार्पण

  • प्रदेश के इतिहास व साहित्य प्रेमियों में खुशी, निर्मलेंदू को दी बधाई

लखनऊ। जम्मू कश्मीर के उप राज्यपाल मनोज सिन्हा ने कुमार निर्मलेन्दु द्वारा लिखी गई पुस्तक ‘कश्मीर : इतिहास और परंपरा’ का लोकार्पण किया। कुमार निर्मलेन्दु द्वारा लिखी गई यह पुस्तक अभी हाल में ही राजकमल प्रकाशन समूह के लोकभारती प्रकाशन प्रयागराज से प्रकाशित हुई है। इस पुस्तक में कश्मीर के क्रमबद्ध इतिहास और वहाँ की लोकोन्मुख परंपराओं का एक व्यवस्थित अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। उनके इस पुस्तक लोकार्पण के बाद प्रदेश के साहित्य व पत्रकारिता जगत के लोगों ने भी बधाई दी है।

कुमार निर्मलेंदू उत्तर प्रदेश सरकार में अधिकारी हैं। इसके बावजूद इतिहास, साहित्य में विशेष रूचि के कारण वे अपने व्यस्त समय में भी लिखने का समय निकाल लेते हैं। निर्मलेंदू की पुस्तक के संदर्भ में राजीव रंजन का कहना है कि निर्मलेंदू इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र जीवन से ही साहित्य व इतिहास में विशेष रूचि रखते थे। निर्मलेंदू के बधाई देने वालों में प्रभात राय, राम प्रकाश, शिवमुनी आदि हैं।

इस पुस्तक का लोकार्पण करते हुए उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने कहा कि कुमार निर्मलेन्दु की इस पुस्तक में नए तथ्यों को उजागर किया गया है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि पाठक इस किताब को पढ़कर जम्मू कश्मीर के संबंध में एक सम्यक दृष्टि विकसित कर सकेंगे। लोकार्पण के अवसर पर वाराणसी के संत ‘पत्ती बाबा’ भी उपस्थित थे।

लेखक कुमार निर्मलेन्दु ने कहा कि इतिहास को अर्थपूर्ण तथ्यों का संपूर्ण आकलन माना गया है। इतिहास लेखन का उद्देश्य केवल दिशानिर्देश या सूचना देना नहीं है। उसका उद्देश्य देश-समाज को समुचित सलाह देना, सजग करना और प्रेरित करना भी है। ‘कश्मीर : इतिहास और परंपरा’ शीर्षक पुस्तक दरअसल उसी दिशा में बढ़ाया गया एक सुविचारित कदम है। कश्मीर के इतिहास पर पूर्व में लिखी गई किताबों में फारसी स्रोतों पर अधिक निर्भरता दिखाई देती है। कश्मीर ज्ञान की सारस्वत भूमि रही है। इसका एक नाम शारदा देश भी रहा है। कश्मीर में पैदा हुए अनेक आचार्यों ने संस्कृत काव्यशास्त्र परंपरा को नई ऊंचाइयाँ दी हैं।

‘कश्मीर : इतिहास और परंपरा’ शीर्षक इस पुस्तक में प्राचीन एवं मध्यकालीन कश्मीर के सांस्कृतिक, आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों का समग्रता में मूल्यांकन किया गया है। खास बात यह है इस किताब में उन परिस्थितियों का भी विश्लेषण किया गया है, जिसके कारण महाभारत काल से चली आ रही गौरवशाली परंपरा का पतन हुआ और कश्मीर का सांस्कृतिक वैभव नष्ट कर दिया गया।

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