उत्तर प्रदेशगोरखपुर

गोरखपुर: जीडीए ने किसानों के साथ की खुली बैठक, पुराने सर्किल रेट पर अपनी जमीन नहीं देंगे किसान

गोरखपुर। 7 वर्षों से सर्किल रेट बढ़ाया नहीं गया किसानों को 2016 के सर्किल रेट के आधार पर जीडी मुआवजा देने के लिए आतुर किसान नए सर्किल रेट 2023 के आधार पर मुवायजा लेने के लिए अडिग शहर की बढ़ती आबादी की आवासीय जरूरतों को पूरा करने के लिए शहर के उत्तरी क्षेत्र महुआतर से टिकरिया रोड और कुसमी जंगल के आसपास सहित 60 गांव को सम्मिलित कर नया गोरखपुर बसाने की प्रक्रिया तेज हो चुकी है लेकिन किसानों को पुराने सर्किल रेट पर मुआवजा देने के लिए जीडीए प्रयासरत आज जीडीए प्रशासन के जिम्मेदार अधिकारी देवीपुर पंचायत सभागार में बालापार देवीपुर ठाकुरपुर बिशुनपुर मानीराम गांव के किसानों की खुली बैठक आयोजित कर 2016 के सर्किल रेट पर मुआवजा देने के लिए किसानों को मनाने पर लगी रही।

लेकिन किसानों ने एक सुर में सुर मिलाते हुए जिम्मेदार अधिकारियों से कहा कि 2023 के सर्किल रेट से कम मुआवजा नहीं लिया जाएगा किसानों ने अधिकारियों से एक सुर में कहा कि सरकार अपने विधायकों व सांसदों का महंगाई भत्ता जोड़ते हुए वेतन बढ़ोतरी प्रत्येक वर्ष करते आ रही है लेकिन किसानों को मुख्यमंत्री के गृह जनपद में मुआवजा देना हुआ तो 2016 के सर्किल रेट के आधार पर मुवायजा देना कितना उचित है जीडीए खुद बताएं कर्मचारी का सातवां वेतन आयोग लागू होने के बाद अपना आठवां वेतन आयोग लागू कराने के लिए प्रयासरत हैं लेकिन किसानों को मुआवजा देने की बात आई तो 7 वर्ष पूर्व जो मुआवजा था उसी के आधार पर किसानों को मनाने के लिए जिम्मेदार आतुर हैं जो वर्तमान में सात गुना सर्किल रेट होना चाहिए।

आप को बताए चले 22 फरवरी 2023 को प्रदेश सरकार की ओर से प्रस्तुत किए गए बजट में नए शहर के लिए बजट का प्राविधान भी हो चुका है। शहर के उत्तरी बाहरी क्षेत्र में 60 गांवों को इसके लिए चिह्नित कर लिया गया है, लेकिन इन गांवों में जमीन अधिग्रहण के लिए किसानों को मुआवजे के लिए जूझना पड़ रहा है आज की खुली बैठक में किसानों ने एक मत से कहा है कि 2023 सर्किल रेट के आधार पर ही किसान मुआवजा लेकर अपनी जमीन देने के लिए तैयार होंगे अन्यथा अपनी जमीन नहीं देंगे अब देखना है कि सरकार किसानों के साथ उचित न्याय करते हुए 2023 के आधार पर मुआवजा देती है कि 2016 के सर्किल रेट के आधार पर किसानों से जमीन अधिग्रहित कर लेती है यह तो समय बताएगा कि शासन प्रशासन की क्या मंशा है।

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