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शहरी विकास वर्ष में गुजरात बना टिकाऊ शहरी आयोजन और विकास का मॉडल

गांधीनगर। गुजरात सरकार ने ‘अर्निंग वेल, लिविंग वेल’ संकल्प के अंतर्गत गुजरात के शहरों को श्रेष्ठ सुविधायुक्त बनाने तथा नागरिकों को उच्च गुणवत्तायुक्त जीवन प्रदान करने के उद्देश्य के साथ वर्ष 2025 को ‘शहरी विकास वर्ष’ घोषित किया है। शहरी विकास वर्ष 2025 के अंतर्गत राज्य सरकार का टिकाऊ शहरी आयोजन तथा विकास का लक्ष्य है। शहरी विकास वर्ष के दौरान राज्य सरकार बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण शुरू कर नए ग्रीन स्पेस के निर्माण एवं 100 प्रतिशत लिगेसी वेस्ट की निकासी के लिए प्रतिबद्ध है।

गुजरात ने हमेशा टिकाऊ विकास को प्रोत्साहन दिया है, जिसके हिस्से के रूप में राज्य के शहरी क्षेत्रों में ग्रीन कवर बढ़ाने पर विशेष बल दिया गया है। शहरी विकास वर्ष के दौरान राज्य के विभिन्न शहरी क्षेत्रों में 240 हेक्टेयर से अधिक नए ग्रीन स्पेस विकसित किए जाएंगे, जिनमें बाग-बगीचे, वर्षा जल को भूमि में उतारने और भूमिगत जल रिचार्ज करने के लिए स्पंज पार्क्स एवं अर्बन फॉरेस्ट आदि शामिल हैं। हाल में इसके लिए विभिन्न परियोजनाओं का क्रियान्वयन विभिन्न चरणों में है। शहरी विकास वर्ष के दौरान राज्य सरकार द्वारा कुल 340 से अधिक परियोजनाएं पूर्ण करने का लक्ष्य रखा गया है, जिनमें से 146 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं।

इसके अतिरिक्त, शहरी विकास वर्ष के दौरान राज्य के शहरों को हरियाला बनाने की दिशा में 99 लाख पेड़-पौधे रोपने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इस लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 17 महानगर पालिका क्षेत्रों तथा 152 नगर पालिका क्षेत्रों में लगभग 90 लाख पेड़-पौधों का रोपण किया गया है।

गुजरात सरकार ने शहरी क्षेत्रों में वर्षा जल संग्रह की क्षमता बढ़ाने के लिए कैच द रेन पहल शुरू की है। इसके अंतर्गत राज्य के 17 महानगर पालिका क्षेत्रों तथा 152 नगर पालिका क्षेत्रों में कुल लगभग 2,900 रेन वॉटर हार्वेस्टिंग सिस्टम विकसित किए गए हैं, जिसके कारण शहरों में वर्षा जल का संग्रह करने की क्षमता में लगभग 4.19 लाख किलोलीटर की वृद्धि हुई है। इसके अलावा 2,603 परियोजनाएं हाल में कार्यान्वित हैं, तो 1,230 परियोजनाएं निविदा के चरण में हैं, और 6,642 नई परियोजनाएं आयोजनाधीन हैं।

इसके साथ ही तालाबों के रीडेवलपमेंट एवं पुनर्स्थापना पर भी विशेष ध्यान दिया गया है। शहरी विकास वर्ष 2025 के अंतर्गत कुल 140 लेकफ्रंट प्रोजेक्ट्स का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिनमें 54 प्रोजेक्ट पूरे हो चुके हैं, 57 चल रहे हैं, 9 निविदा चरण में हैं और 20 प्रोजेक्ट आयोजनाधीन हैं।

राज्य सरकार ने टिकाऊ विकास को प्रोत्साहन देने के लिए राज्यभर में 285 से अधिक सौर परियोजनाएं (सोलर प्रोजेक्ट्स) शुरू करने का लक्ष्य रखा है, जिससे शहरों में नवीकरणीय ऊर्जा का उपयोग बढ़ाकर कार्बन उत्सर्जन कम किया जा सके। इसके अतिरिक्त, मलिन जल के पुनरुपयोग के लिए 20 रीयूज ऑफ ट्रीटेड वेस्ट वाटर (आरटीडब्लूडब्लू) प्रोजेक्ट्स कार्यान्वित किए जा रहे हैं, जिसमें दैनिक अनुमानित 656 मिलियन लीटर पानी पुनः उपयोग के लिए उपलब्ध होगा।

इसी प्रकार शहरी प्रदूषण के विरुद्ध वायु गुणवत्ता सुधारने के लिए शहरी विकास विभाग का राज्य की सभी महानगर पालिकाओं को समाविष्ट करने वाले ‘क्लीन एयर एक्शन प्लान्स’ को लॉन्च करने का लक्ष्य है। राज्य की शेष चार बड़ी महानगर पालिकाओं भावनगर, जामनगर, जूनागढ़ तथा गांधीनगर के लिए भी क्लीन एयर एक्शन प्लान तैयार किया गया है।

उल्लेखनीय है कि गुजरात सरकार शहरों में वर्षों से पड़े कूड़े-कचरे की वैज्ञानिक निकासी द्वारा पर्यावरण सुरक्षा, जन स्वास्थ्य तथा शहरी विकास को मजबूत बनाने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसके अंतर्गत राज्य सरकार ने मार्च 2026 तक राज्य के शहरों में 100 प्रतिशत लिगेसी वेस्ट की निकासी का लक्ष्य निर्धारित किया है। राज्य के शहरी क्षेत्रों में कुल 304.09 लाख मीट्रिक टन लिगेसी वेस्ट चिह्नित किया गया है, जिसमें से अब तक 281.802 लाख मीट्रिक टन कूड़े की वैज्ञानिक तरीके से निकासी की गई है।

इसके अतिरिक्त शहरी स्वच्छता एवं कूड़ा प्रबंधन को प्राथमिकता देते हुए 2,756 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से 1,823 से अधिक परियोजनाओं पर कार्य किया जाएगा। राज्यभर में शहरों के सार्वजनिक स्थलों से गंदगी तथा अस्वच्छता को दूर करने के लिए 1,533 गार्बेज वल्नरेबल पॉइंट्स (जीवीपी) की पहचान कर उसकी निकासी का लक्ष्य रखा गया है। टिकाऊ शहरी आयोजन एवं विकास को प्रोत्साहन देने वाली यह प्रत्येक पहल विकसित गुजरात से विकसित भारत के लक्ष्य को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

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