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अमित शाह की बस्तर में माओवादियों से अपील- ‘हथियार डाल दो, विकास की मुख्यधारा में शामिल हो जाओ’

जगदलपुर। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने सोमवार को कहा कि माओवाद ने कभी किसी समाज को लाभ नहीं पहुंचाया और जहां भी यह मौजूद रहा, उसने तबाही फैलाई। उन्होंने इस संबंध में कोलंबिया, पेरू और कंबोडिया जैसे देशों का उदाहरण दिया। शाह ने छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले के मुख्यालय जगदलपुर में ‘बस्तर पंडुम 2026’ सांस्कृतिक कार्यक्रम के समापन समारोह को संबोधित करते हुए दोहराया कि देश से नक्सलवाद की समस्या 31 मार्च तक पूरी तरह खत्म हो जाएगी।

उन्होंने नक्सलियों से आत्मसमर्पण करने और मुख्यधारा में शामिल होने की अपील की और उन्हें सम्मानजनक पुनर्वास का वादा किया। उन्होंने कहा, ”छत्तीसगढ़ सरकार की माओवादी पुनर्वास नीति सबसे आकर्षक है।” उन्होंने इसको लेकर भी चिंता जतायी कि जो नक्सली अभी भी डटे हुए हैं, उनमें युवा आदिवासी लड़कियां भी शामिल हैं। शाह ने कहा, ”उन्हें (युवा आदिवासी लड़कियों को) पुनर्वास के लिए भेजा जाना चाहिए क्योंकि उनके सामने पूरी जिदगी पड़ी है।”

शाह ने आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों को किसी भी तरह का नुकसान नहीं पहुंचाए जाने का आश्वासन देते हुए चेतावनी दी कि जो लोग गोली चलाना जारी रखेंगे, आईईडी लगाएंगे और विद्यालयों एवं अस्पतालों को आग लगाएंगे, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, ”सशस्त्र हिंसा का कड़ा जवाब दिया जाएगा। अगर कोई हथियार उठाएगा, तो जवाब भी हथियारों से ही दिया जाएगा। माओवाद ने किसी भी समाज को लाभ नहीं पहुंचाया और जहां भी यह मौजूद रहा, वहां विनाश फैलाया, जिसमें कोलंबिया, पेरू और कंबोडिया जैसी देश भी शामिल हैं।”

शाह ने शेष सशस्त्र नक्सलियों से आत्मसमर्पण करने की अपील करते हुए कहा, ”हम किसी से लड़ना नहीं चाहते। हमारी लड़ाई अपने आदिवासी भाइयों और बहनों की रक्षा के लिए है। जब आईईडी लगाए जाते हैं, तो निर्दोष बच्चों की जान जा सकती है या वे स्थायी रूप से अपंग हो सकते हैं। यह क्रूरता कहां से आती है?” उन्होंने कहा कि माओवादियों ने दशकों तक स्कूल बंद रखे, जिससे कई पीढ़ियां शिक्षा से वंचित रहीं और बड़े पैमाने पर निरक्षरता फैली।

शाह ने कहा, ”हालांकि बस्तर अब तेज विकास के रास्ते पर है। स्कूल फिर से खुल रहे हैं, सड़कें बन रही हैं, मोबाइल टावर लगाए जा रहे हैं, डाकघर खोले जा रहे हैं और गांवों तक बिजली एवं पेयजल पहुंचाया जा रहा है। हमारा संकल्प है कि अगले पांच वर्षों में बस्तर देश का सबसे विकसित आदिवासी बहुल संभाग बने।” शाह ने कहा कि सरकार ने बस्तर इलाके में विकास को तेज करने के लिए एक रोडमैप तैयार किया है, जिसमें सात जिले हैं।

उन्होंने कहा कि इसका उद्देश्य दिसंबर 2027 तक सभी गांवों में बिजली पहुंचाना, हर गांव में मोबाइल कनेक्टिविटी सुनिश्चित करना और हर पांच किलोमीटर के अंदर एक डाकखाना या बैंक शाखा खोलना है। उन्होंने कहा, “आदिवासियों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदा जाएगा, घरों को रसोई गैस सिलेंडर दिए जाएंगे और हर घर में नल के पानी का कनेक्शन सुनिश्चित किया जाएगा। नक्सलवाद कम होने के साथ, बस्तर की अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए एडवेंचर टूरिज्म, होमस्टे, कैनोपी वॉक और ग्लास ब्रिज जैसी नयी पर्यटन पहल विकसित की जा रही हैं।”

उन्होंने कहा कि बस्तर में आदिवासी युवाओं के लिए रोजगार सृजित करने के उद्देश्य से 118 एकड़ में एक नया औद्योगिक क्षेत्र स्थापित किया जा रहा है। शाह ने सिंचाई योजनाओं को उल्लेखित करते हुए कहा कि इंद्रावती नदी पर नयी परियोजनाएं शुरू की जाएंगी, जिनसे दंतेवाड़ा, बीजापुर और सुकमा जिलों में 2.75 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई होगी और 120 मेगावाट बिजली का उत्पादन भी होगा।

उन्होंने कहा, ”सरकार बस्तर की संस्कृति को दशकों तक संरक्षित रखने के लिए प्रतिबद्ध है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का लक्ष्य बस्तर की संस्कृति को पूरे देश और दुनिया तक पहुंचाना है। बस्तर की पहचान बंदूक और विस्फोटक नहीं हो सकते। इसकी असली पहचान इसकी संस्कृति और धरोहर है।”

केंद्रीय गृहमंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ निर्णायक लड़ाई के लिए छत्तीसगढ़ पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (आईटीबीपी) और सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के कर्मियों को धन्यवाद दिया और शहीद हुए सुरक्षा बलों के परिवारों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त की। शाह ने छत्तीसगढ़ में ‘बस्तर पंडुम 2026’ का आयोजन करने के लिए विष्णु देव साय सरकार की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस कार्यक्रम की 12 प्रतिस्पर्धाओं में से प्रत्येक में शीर्ष तीन विजेताओं को राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया जाएगा, जहां वे अपनी कला का प्रदर्शन करेंगे और भोज में शामिल होंगे।

उन्होंने कहा कि बस्तर पंडुम महोत्सव इस साल काफी विस्तारित किया गया है, जिसमें सात जिलों, 1,885 ग्राम पंचायतों और 32 जनपद मुख्यालयों के प्रतिभागियों के साथ 12 शैलियों में प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया।उन्होंने कहा कि पिछले साल केवल सात शैलियों को शामिल किया गया था और इस विस्तार से आदिवासी संस्कृति को और अधिक बढ़ावा देने और मजबूत करने के प्रयासों को दर्शाया गया है।

शाह ने कहा कि कुछ साल पहले जहां बस्तर में नक्सल हिंसा के चलते मोर्टार गोले दागे जाने, गोलीबारी और आईईडी धमाकों के कारण भय का माहौल था, वहीं अब इस आयोजन के माध्यम से 55,000 से अधिक लोग एकत्रित होकर अपनी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर रहे हैं और उसका जश्न मना रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार बस्तर की संस्कृति को आने वाले वर्षों और दशकों तक संरक्षित रखना चाहती है।

उन्होंने कहा कि इतनी अनूठी आदिवासी संस्कृति दुनिया के किसी और हिस्से में दुर्लभ है। उन्होंने कहा कि बस्तर के पारंपरिक आभूषण, लोकगीत और नृत्य ना केवल इस क्षेत्र बल्कि पूरे देश का खजाना हैं और बस्तर पंडुम ने इन्हें प्रदर्शित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी है। उन्होंने कहा कि ये सांस्कृतिक परंपराएं भगवान राम के युग से संरक्षित हैं और बस्तर की प्रमुख कला और संस्कृति आने वाले दिनों में राष्ट्रीय पहचान हासिल करती रहेगी।

शाह ने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का (सात फरवरी को) संभागीय स्तर के बस्तर पंडुम कार्यक्रम का उद्घाटन करने के लिए धन्यवाद किया और उनसे अनुरोध किया कि सभी 12 शैलियों के शीर्ष तीन विजेताओं को उनकी कला प्रदर्शित करने और भोजन के लिए राष्ट्रपति भवन में आमंत्रित किया जाए, जिस पर उन्होंने सहमति जतायी।

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