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कानपुर में गंगा में डूबे स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर; आस्ट्रेलिया से सीधे घाट पर पहुंचे माता-पिता बेटे को पुकारते रहे; महाराष्ट्र में तैनात जज पत्नी का इंतजार

कानपुर: जिले के बिल्हौर थाना क्षेत्र में नानामऊ घाट के पास शनिवार सुबह डूबे वाराणसी में स्वास्थ्य विभाग के डिप्टी डायरेक्टर आदित्य वर्धन सिंह का अभी तक पता नहीं चल सका है. सोमवार को सात समंदर पार से उनके माता-पिता घाट पर पहुंचे तो बेटे को आवाज लगाते रहे. कहते रहे- आदित्य तुम कहां हो. यह कहते हुए बिलखते भी रहे. पिता रमेश चंद्र और मां शशि प्रभा अपने सगे-संबंधियों के साथ घाट पर पहुंचे थे. उनके साथ आदित्य के चचेरे भाई बिहार के सीएम के निजी सचिव अनुपम सिंह भी थे. बता दें कि आदित्य की पत्नी शैलजा महाराष्ट्र के अकोला में एडीजे हैं और वह 12 साल की बेटी के साथ वहीं रहती हैं. फिलहाल वह नहीं पहुंच सकी हैं.

कानपुर में गंगा में डूबे डिप्टी डायरेक्टर आदित्य वर्धन की हो रही है तलाश.

60 घंटे बाद भी नहीं लगा सुराग : शनिवार सुबह करीब 6.30 बजे वाराणसी के उपनिदेशक स्वास्थ्य आदित्य वर्धन सिंह बिल्हौर के नानामऊ घाट के पास ही डूब गए थे. यह बात पुलिस के आला अफसर मान रहे हैं. आदित्य वर्धन के डूबने के 60 घंटे बाद भी सोमवार देर शाम तक एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, सिविल पुलिस व गोताखोरों की टीमें उन्हें तलाश नहीं सकी हैं. सोमवार को आदित्य के पिता रमेश चंद्र पत्नी के साथ कानपुर आ गए थे. उनके साथ आदित्य के बहन व बहनोई भी कानपुर आए हुए हैं. वहीं इस पूरे मामले पर सोमवार को कानपुर के डीएम राकेश सिंह ने भी बिल्हौर के पुलिस अफसरों से बात की.

28 किलोमीटर तक गंगा में चला सर्च अभियान: इस पूरे मामले को लेकर बिल्हौर थाना प्रभारी अशोक कुमार सरोज ने बताया कि सोमवार सुबह से ही गंगा में बिल्हौर से लेकर गंगा बैराज तक करीब 28 किलोमीटर तक सर्च अभियान चलाया गया. गोताखोरों की टीमों ने मोटरबोट से आदित्य वर्धन को तलाशा, मगर उनका कोई भी पता नहीं लग सका. वहीं मामला हाईप्रोफाइल होने के चलते गंगा बैराज पर भी कानपुर के प्रशासनिक अफसर ने कार्ट के अफसर को तैनात कर दिया है. गंगा बैराज के दोनों ओर ही अफसर तैनात रहे और हर गतिविधि पर नजर रख रहे, लेकिन आदित्य वर्धन का कोई पता नहीं लगा सका. थाना प्रभारी का कहना था कि बिल्हौर के नानामऊ घाट से लेकर गंगा बैराज तक जितने घाट हैं, उन घाटों पर भी पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है. आसपास के लोगों से भी पूछताछ की जा रही है.

पत्नी अकोला में एडीजे तो चचेरे भाई अनुपम बिहार में मुख्यमंत्री के सचिव: आदित्य वर्धन जहां वाराणसी में स्वास्थ्य विभाग में उपनिदेशक के पद पर कार्यरत थे, वहीं उनकी पत्नी शैलजा महाराष्ट्र के अकोला में एडीजे हैं. वह अपनी 12 साल की बेटी के साथ वहीं रहती हैं. जबकि आदित्य वर्धन के चचेरे भाई अनुपम सिंह बिहार में मुख्यमंत्री के सचिव हैं और उनकी पत्नी प्रतिमा सिंह भी बिहार कैडर की आईएएस अफसर हैं. आदित्य के पिता सेवानिवृत्त अभियंता रमेश चंद्र की पुत्री गुड़िया वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया में उच्च पद पर तैनात हैं. वह कुछ दिनों पूर्व अपनी पुत्री से मिलने आस्ट्रेलिया गए थे. वहीं से सीधे घाट पर पहुंचे हैं. जबकि चाचा शिवकुमार कन्नौजिया की पुत्री नोएडा में वरिष्ठ चिकित्सक हैं.

दोस्तों संग गंगा स्नान को गए थे: उन्नाव के बेहटा मुजावर थाना क्षेत्र के ग्राम कबीरपुर खंभौली निवासी डिप्टी डायरेक्टर आदित्य अपने तीन अन्य साथियों संग शनिवार सुबह गंगा स्नान करने नानामऊ घाट पहुंचे थे. स्नान करते समय वह अचानक गहरे पानी में चले गए. उनके साथियों ने उन्हें पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वह पलक झपकते ही गंगा की तेज धारा में बह गए. घटना की सूचना मिलते ही परिजनों में हाहाकार मच गया. डिप्टी डायरेक्टर का तीसरे दिन भी सुराग नहीं लगा. एसडीआरए, एनडीआरएफ समेत करीब 75 पुलिसककर्मियों को लगाया गया है. उन्नाव के अलावा कानपुर में भी रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है. गोताखोर भी तलाश में जुटे हुए हैं. इसके पहले रविवार को पूरे दिन एसडीआरएफ और पीएससी बल की बाढ़ राहत टीमों ने अलग-अलग क्षेत्र नानामऊ गंगा तट से लेकर शिवराज पुर थाना अंतर्गत खेरेश्वर गंगा तट तक नदी की तलहटी को खंगाला लेकिन कुछ पता नहीं चल सका.

मल्लाह बोला था-पहले दस हजार ट्रांसफर करो तब जान बचाऊंगा

गंगा के गहरे पानी में डूबते-उतराते समय आदित्य वर्धन गौरव ने अपने दोनों हाथों को पानी के ऊपर उठाकर बचाने की गुहार लगाई थी. तभी साथी प्रदीप कुमार तिवारी ने घाट पर ही नाव के ऊपर मौजूद मल्लाह शैलेश कश्यप निवासी ग्राम नानामऊ से डूब रहे डिप्टी डायरेक्टर को बचाने की याचना की. इसपर मल्लाह ने दस हजार रुपए तुरंत उसके बैंक खाते में ट्रांसफर करने की मांग की. प्रदीप तिवारी ने 10 हजार रुपए मल्लाह के खाते में स्थानांतरित भी कर दिए किंतु तब तक बहुत देर हो चुकी थी और आदित्य वर्धन गंगा नदी की तेज धारा में विलीन हो गए. बाद में मल्लाह शैलेश कश्यप अपनी नाव गंगा तट पर ही छोड़ कर घटनास्थल से भाग निकला.

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