धरातल पर प्रशासन की तस्वीर: खुद ट्रैक्टर चलाकर एसडीएम ने हटाया अवैध कब्जा
- सादगी में संवेदनशीलता, कार्रवाई में ईमानदारी बनी दिशा श्रीवास्तव की प्रशासनिक पहचान
गौरव कुशवाहा
देवरिया। प्रशासनिक सेवा केवल कुर्सी तक सीमित नहीं होती बल्कि जब कोई अधिकारी जनता के अधिकार की रक्षा के लिए खुद मैदान में उतरता है, तब उसकी पहचान सरकारी अफसर से कहीं अधिक जनता के प्रहरी के रूप में होती है। सलेमपुर की उपजिलाधिकारी दिशा श्रीवास्तव ने रविवार को कुछ ऐसा ही उदाहरण पेश किया, जिसने न सिर्फ प्रशासनिक कार्यशैली को नई दिशा दी, बल्कि आमजन के मन में प्रशासन के प्रति भरोसा और सम्मान और गहरा कर दिया।
15 मार्च से जिलाधिकारी दिव्या मित्तल के निर्देशन में जिले में अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध कब्जामुक्ति अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान के दूसरे दिन करौता गांव में जब प्रशासनिक अमला चकमार्ग पर अवैध कब्जा हटाने पहुंचा तो गांववालों ने एक ऐसा दृश्य देखा जिसे वे शायद ही कभी भुला पाएं। एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने बिना किसी औपचारिकता या हिचक के ट्रैक्टर का स्टेयरिंग संभाल लिया और खुद उस रास्ते से कब्जा हटाने में जुट गईं, जो वर्षों से बंद पड़ा था।

जहां आमतौर पर अधिकारी आदेश देते हैं और मातहत अमल करते हैं, वहीं दिशा श्रीवास्तव ने इस परंपरा को तोड़ते हुए खुद पहल की। यह उनकी सादगी नहीं बल्कि उस प्रशासनिक दृष्टिकोण की गवाही है, जिसमें काम की प्राथमिकता सर्वोपरि होती है। वे जानती हैं कि आमजन की पीड़ा तब ही दूर होगी जब व्यवस्था की नकेल खुद हाथ में ली जाएगी।
ग्रामीण महिलाओं से लेकर बुजुर्गों तक ने जब एसडीएम को खुद ट्रैक्टर चलाते देखा तो हर किसी के चेहरे पर एक संतोष और गर्व की भावना थी। यह केवल अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई नहीं थी, बल्कि जनता को यह भरोसा दिलाने का संकल्प था कि उनका अधिकार और उनकी जमीन सुरक्षित है।
दिशा श्रीवास्तव की कार्यशैली बताती है कि प्रशासनिक सेवा का अर्थ केवल फाइलों पर हस्ताक्षर नहीं बल्कि माटी से जुड़कर न्याय सुनिश्चित करना है। सलेमपुर तहसील में उन्होंने अपनी कर्मठता और संवेदनशीलता से आमजन के हक की लड़ाई को सरल बना दिया है। उनकी यही जमीनी सोच उन्हें आम अफसरों से अलग करती है।
एसडीएम दिशा श्रीवास्तव का ट्रैक्टर चलाते वीडियो जब सोशल मीडिया पर आया तो यह केवल एक दृश्य नहीं था, बल्कि यह उस नई प्रशासनिक सोच का प्रतीक बन गया, जहां अफसर जनता के लिए जीते हैं, उनके बीच रहते हैं और उनकी समस्याओं का समाधान खुद करते हैं। लोग उन्हें जमीन से जुड़ा अधिकारी और जनता की आवाज कहकर संबोधित कर रहे हैं।
सलेमपुर में उनके नेतृत्व में जो बदलाव दिख रहा है वह केवल प्रशासनिक नहीं बल्कि सामाजिक भी है। उनके आने से अतिक्रमण, भ्रष्टाचार और अन्याय के खिलाफ एक स्पष्ट संदेश गया है कि अब काम करने वाले अफसर मैदान में हैं। उनकी पारदर्शी कार्यप्रणाली और जनसेवा की भावना ने उन्हें जनता के दिलों में बसा दिया है।
एसडीएम दिशा श्रीवास्तव ने यह साबित कर दिया कि कुर्सी पर बैठना एक जिम्मेदारी है और उस जिम्मेदारी का निर्वहन तभी होता है जब जनता की पुकार को सुना और समझा जाए। करौता गांव में कब्जा मुक्त चकमार्ग से गुज़रते ग्रामीणों की आंखों में जो राहत है, वह किसी भी पुरस्कार या प्रशंसा से कहीं अधिक मूल्यवान है।



