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विभागीय अधिकारियों के संरक्षण मे फलफूल रहा प्रतिबंधित वृक्षों के अवैध कटान का धंधा, लकडी माफिया काट रहे चांदी

शीशम सगौन व पीपल के 120से अधिक प्रतिबंधित पेडों को काटकर अवैध तरीके से आरा मशीन पर करा दिया चिरान

ख्वाजा एक्सप्रेस संवाददाता 

बरेली। हमारे देश के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व प्रदेश के मुखिया योगी आदित्यनाथ पेड बचाओ पेड लगाओ पर्यावरण संरक्षण की ओर कदम बढाओ एवं एक पेड माँ के नाम के नारे के साथ पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा देने काम कर रहे है तथा वही योगी सरकार के द्वारा विगत आठ बर्षों में 205 करोड वृक्षारोपण कराया गया है। इस वर्ष भी सरकार वृक्षारोपण को लेकर सजग है तथा 37 करोड पौधारोपण का लक्ष्य रखा गया है तो वही कुछ भ्रष्ट हठधर्मिता वाले अधिकारी एवं बेखौफ लकड़ी माफिया सरकार की नीतियों को ठेंगा दिखाते हुए पलीता लगाने का कार्य कर रहे है मगर फिर भी उन पर कोई ठोस कार्यवाही अमल में नहीं लायी जाती है। ऐसे ही जनपद बरेली मे वन विभाग संबंधित दो मामले प्रकाश मे आये है।

 

एक मामले मे जांच के नाम पर बस खानापूर्ति कर मामले को निपटाने का कार्य किया जा रहा है तो वही दूसरा मामला शीशम ,सगौन,व पीपल के सैकडों प्रतिबंधित पेडो को काटकर ठेकेदार के द्वारा आरा मशीन को किराये पर लेकर अवैध कटी लकडी का चिरान कराकर ठिकाने लगाने की प्रक्रिया जोरो पर चल रही है। बताते चले कि जनपद बरेली कि तहसील सदर व तहसील आंवला से दो बडे मामले सामने आये है।पहला मामला तहसील सदर के ग्राम चौवारी स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय राजकीय इंटर कॉलेज से लाखो रूपये के 41 सरकारी प्रतिबंधित हरे भरे पेड़ों का काटने का मामला प्रकाश में आया था। जहां प्रधानाचार्य पियूष कुमार, लकड़ी ठेकेदारो व विभागीय अधिकारियों की संलिप्तता के कारण बगैर नीलामी किये सरकारी व प्रतिबंधित 41 पेड काट लिए गये। जिसमे नीम, शीशम, सरिस आदि सहित अन्य प्रजाति के पेड थे। ग्रामीणों ने बताया कि प्रधानाचार्य पियूष कुमार व लकड़ी ठेकेदार के द्वारा आपसी मिलीभगत के कारण 15 से 20 लाख रुपये के 41 प्रतिबंधित सरकारी पेड़ों को नीलामी से पहले ही काट लिया गया। जानकारी से ज्ञात हुआ कि विधालय प्रधानाचार्य के माध्यम से 18 लिपटिस 3 नीम व शीशम सहित कुल 21 पेड़ों की नीलामी विज्ञप्ति दिनांक 11.5.25 को प्रकाशन कराया गया था तथा जिसकी नीलामी की तिथि 16.5.2025 निर्धारित की गयी थी मगर वही ग्रामीणों ने शपथ पत्र देते हुए बताया कि पेड़ो को नीलामी तिथि से पूर्वता ही 09.05.25 से 13.05.25 तक सभी पेड़ों को काट कर ठिकाने लगा दिया गया। इन लोगो ने मामले के खुलासे के डर के कारण साक्ष्य मिटाने के लिए सभी पेड़ो की जड़ों को जेसीबी से निकलवा कर उस जगह को समतल भी करा दिया गया मगर फिर भी कुछ जड़ो के रह जाने के कारण मामला फिर प्रकाश में आ गया। ग्रामीणों की शिकायत के बावजूद भी आज तक इन लोगो पर कोई भी वैधानिक कार्यवाही नहीं की गयी। 

लकडी ठेकेदार ने विभागीय अधिकारियों के संरक्षण में अवैध तरीके से 120 से अधिक प्रतिबंधित पेडो को काटकर कर कमाई मोटी चांदी 

 

 वही दूसरा मामला तहसील आंवला के ग्राम सिरोही व देबचरा से प्रकाश मे आया है जहा लकड़ी ठेकेदार गुलाम रसूल के द्वारा 40 शीशम 1पीपल व 80 सगौन के प्रतिबंधित पेडो को विना किसी परमिट के विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों की आपसी सांठगांठ से अवैध तरीके से काट लिये गये । वही सूत्रो के द्वारा जानकारी दी गयी कि लकडी ठेकेदार गुलाम रसूल के द्वारा विभागीय सांठगांठ से अवैध तरीके से ग्राम सिरोही में रमेश गुप्ता के प्रतिबंधित 40शीशम, एक पीपल एवं ग्राम देबचरा में गंगाराम व बृज पाल के 80सागौन सहित कुल 120 से अधिक पेडो को विना परमिट के अवैध तरीके काट लिया गया तथा देबचरा मे ही एक आरा मशीन को किराये पर लेकर प्रतिबंधित पेडों को चीरने का काम किया गया तथा जिससे लकडी को वैध तरीके से बेचकर मोटा मुनाफा कमाया जा सके। वही आरा मशीन मालिक से जानकारी लेने पर उसने बताया कि मेरी आरामशीन जिसका रजिस्ट्रेशन मेरी पत्नी के नाम पर है। जिसको मेरे द्वारा लकडी ठेकेदार गुलाम रसूल को 20000 रूपये प्रतिमाह किराये पर दिया गया है तथा आरामशीन से अवैध रूप से शीशम सगौन सहित अन्य प्रकार की पेडों को चीरने का कार्य किया गया है। वही पेड़ विक्रेता रमेश गुप्ता ने भी बडी होशियारी दिखाते हुए तत्काल शीशम व पीपल के पेड़ों की जड़ों को उखाडने का कार्य किया गया तथा साक्ष्य मिटाने की पूरी कोशिश भी की गयी मगर उनकी थोडी लापरवाही के कारण उनकी पूरी मेहनत पर पानी फिर गया। 

अब देखने की बात है कि इन लोगो मे सबसे बडा दोषी कौन है पेडो के विक्रेता , लकडी ठेकेदार ,आरामशीन संचालक या फिर संरक्षण देते हुये अधिकारी  ,किन किन पर होती है कार्यवाही या फिर होगा विभागीय अधिकारियों के द्वारा खेला, या फिर ले देकर कर सव कुछ कर दिया जायेगा सैटल बताते चले कि ऐसी विभागीय मिलीभगत व लापरवाही के कारण लकड़ी माफियाओं में उनका कोई खौफ नहीं दिखता तथा वहीं विभागीय अधिकारी मूकबधिर बन कर देखते रहते हैं। कहने को तो जिलाधिकारी अविनाश सिंह व वनाधिकारी दीक्षा भंडारी अनैतिक कार्यो पर तत्काल संदर्भ लेते हुए कार्रवाई करते है मगर देखने की बात है कि इस पर क्या कार्यवाही अमल मे लायी जाती है।

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