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समस्याओं से घिरा देश… संसद में प्रियंका गांधी ने सरकार को घेरा, वंदे मातरम पर चर्चा को बताया मुद्दे से भटकाने वाला

दिल्ली। कांग्रेस नेता प्रियंका गांधी वाड्रा ने सोमवार को लोकसभा में कहा कि जो लोग संविधान का विरोध करते रहे वही आज देश के महान नेताओं के निर्णयों पर सवाल खड़े कर रहे हैं। वाड्रा ने वंदेमातरम् के 150 वर्ष पूरे होने के मौके सदन में चर्चा में शामिल होते हुए कहा कि आजादी के बाद वंदेमातरम् को राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, पंडित जवाहर लाल नेहरू, सरदार वल्लभभाई पटेल, मौलाना अबुल कलाम आजाद, बाबा साहेब डॉ भीमराव अंबेडकर आदि महापुरुषों ने राष्ट्र गीत के रूप में मान्यता देने पर सहमति दी थी।

उन्होंने कहा कि ‘संविधान विरोधी’ लोग आज उनके निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं, क्या ये लोग उन महान शख्सियतों से बड़े हो गये। वाड्रा ने कहा कि देश इस समय तमाम समस्याओं से घिरा हुआ है लेकिन सत्तारूढ़ दल उन पर चर्चा कराने की बजाय ऐसे मुद्दों पर चर्चा करा रहा है जिन पर ऐसा करने की जरूरत ही नहीं है। सत्तारूढ़ दल की नीतियां देश को नुकसान पहुंचा रही हैं।

वंदेमातरम् देश के कण-कण में जीवित है, इस पर बहस नहीं हो सकती, लेकिन सत्तारूढ़ दल ने चर्चा की मांग की तो चर्चा की जा रही है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भाषण अच्छा देते हैं, लेकिन तथ्यों के मामले में वह कमजोर हैं। मोदी ने वंदेमातरम् पर अपने संबोधन में कुछ तथ्य गलत रखे हैं। उन्होंने कहा कि 1875 में बंकिमचंद्र चटर्जी ने वंदेमातरम् के दो अंतरे लिखे थे, और 1882 में उनका उपन्यास आनंद मठ आया, जिसमें उन्होंने वंदेमातरम् में चार अंतरे और जोड़े थे।

उन्होंने कहा कि वर्ष 1905 में कांग्रेस के वाराणसी अधिवेशन में इसका गायन किया गया और इसे सभी भारतीय आयोजनों के लिए अपनाया गया। बाद के दिनों में इसे हर कोई गाने लगा और यह गीत मातृभूमि के लिए मर मिटने का प्रेरक गान बन गया। ब्रिटिश साम्राज्य इस गीत की गूंज से कांपने लगा। वाड्रा ने कहा कि 1937 में नेताजी सुभाष चंद्र बोस और गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगौर जैसी महान विभूतियों की सहमति से इसके दो अंतरे निकाले गये। उनका कहना था कि इन अंतरों का साम्प्रदायिक अर्थ निकाला जा सकता है।

उन्होंने कहा कि राष्ट्र गीत और राष्ट्र गान को गुरुदेव रवीन्द्र नाथ टैगोर ने चुना था। श्रीमती वाड्रा ने कहा कि श्री नरेन्द्र मोदी करीब 12 वर्ष से प्रधानमंत्री हैं, पंडित जवाहर लाल नेहरू तो इतने वर्षाें तक आजादी के आंदोलन के दौरान जेल में रहे थे। श्री मोदी बार-बार पंडित नेहरू की कमियां गिनाते रहते हैं, वह मांग करती हैं कि पूर्व प्रधानमंत्री के कार्यकलापों पर इस सदन में 10 घंटे, दो दिन या तीन दिन की चर्चा करा ली जाये और फिर इस मुद्दे को हमेशा के लिए बंद कर दिया जाये।

उसके बाद इस सदन में प्रदूषण, महंगाई, बेरोजगारी, सुरक्षा, आरक्षण, युवाओं की समस्याओं, महिलाओं के हालात आदि पर चर्चा की जाये। उन्होंने कहा कि सत्तारूढ़ दल ध्यान भटकाने के उपक्रम करता रहता है। इनका शासन दमन, दिखावा, चुनाव की राजनीति और इंवेट मैनेजमेंट तक सीमित रहता है। वंदे मातरम् पर चर्चा भी बंगाल चुनाव को देखते हुए करायी जा रही है। उन्होंने कहा कि राष्ट्र गीत वंदे मातरम् हमेशा से प्यारा है, पवित्र है और पवित्र रहेगा।

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