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न्यूयॉर्क मेयर ममदानी ने खालिद के नाम लिखा लेटर : तो भड़की भाजपा, कहा- आंतरिक मामलों में दखल बर्दाश्त नहीं करेगा भारत

नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने शुक्रवार को न्यूयॉर्क सिटी के मेयर जोहरान ममदानी पर कार्यकर्ता उमर खालिद के बारे में ‘नोट’ लिखकर भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप का आरोप लगाया। पार्टी ने यह भी स्पष्ट किया कि भारत इस तरह के किसी भी प्रयास को बर्दाश्त नहीं करेगा।

भारत के आंतरिक मामलों में टिप्पणी करने को लेकर ममदानी के अधिकार पर सवाल उठाते हुए, भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता गौरव भाटिया ने न्यूयॉर्क शहर के मेयर को ऐसे प्रयासों के खिलाफ चेतावनी देते हुए कहा, ‘‘यदि भारत की संप्रभुता को चुनौती दी जाती है, तो 140 करोड़ भारतीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में एकजुट होकर खड़े होंगे।’’

उन्होंने कहा कि भारत की जनता को देश की न्यायपालिका पर ‘‘पूरा भरोसा’’ है। यह टिप्पणी ममदानी द्वारा खालिद के लिए लिखे गए ‘नोट’ के बाद आई, जिसमें उन्होंने ‘कड़वाहट’ पर खालिद के विचारों और उसे अपने भीतर हावी न होने देने के महत्व को याद किया था। ममदानी के इस ‘नोट’ को खालिद की सहयोगी बनोज्योत्सना लाहिड़ी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट किया।

हस्तलिखित ‘नोट’ पर ममदानी के दस्तखत भी हैं। उन्होंने लिखा है, ‘‘प्रिय उमर, मैं अक्सर आपके उन शब्दों को याद करता हूं जिनमें कड़वाहट को खुद पर हावी नहीं होने देने की बात कही गयी थी। आपके माता-पिता से मिलकर खुशी हुई। हम सब आपको लेकर चिंतित हैं।’’ इस पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए भाटिया ने आरोप लगाया, ‘‘यदि कोई भी किसी आरोपी के समर्थन में सामने आता है और भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करता है, तो देश इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।’’

भाजपा प्रवक्ता ने यहां पार्टी मुख्यालय में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में ममदानी की चिट्ठी के बारे में पूछे जाने पर कहा, ‘‘यह बाहरी व्यक्ति कौन होता है जो हमारे लोकतंत्र और न्यायपालिका पर सवाल उठाए और वह भी ऐसे व्यक्ति के समर्थन में जो भारत को तोड़ना चाहता है? यह उचित नहीं है।’’

फरवरी 2020 के दिल्ली दंगा मामले में ‘‘मुख्य साजिशकर्ता’’ होने के आरोप में खालिद और कुछ अन्य लोगों के खिलाफ कड़े गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 (यूएपीए) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया था। इस दंगे में 53 लोग मारे गए थे और 700 से अधिक लोग घायल हुए थे। यूएपीए के तहत जमानत हासिल करना अधिक कठिन हो जाता है और यह साबित करने का भार आरोपी पर होता है कि मामला झूठा है।

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