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मेहुल चोकसी: हीरों की चकाचौंध वाला डायमंड किंग, शहंशाह से कैसे बना भगोड़ा, जानें पूरी कहानी

पंजाब नेशनल बैंक लोन घोटाले के आरोपी भगोड़े मेहुल चोकसी को बेल्जियम के एक अस्पताल से गिरफ्तार कर लिया गया है। उसपर पीएनबी से लोन के रूप में लिए गए 13,500 करोड़ रुपये के घोटाले का आरोप है। बेल्जियम के हॉस्पिटल से उसे गिरफ्तार किया गया है और उसे फिलहाल बेल्जियम डिटेंशन सेंटर में रखा गया है। जिस समय उसे गिरफ्तार किया गया उस समय वह बेल्जियम से फरार होकर स्विट्जरलैंड भागने की फिराक में था। जानकारी के मुताबिक मेहुल चोकसी को साल 2018 और 2021 में मुंबई की कोर्ट द्वारा जारी किए गए दो गैर जमानती वारंट के आधार पर 12 अप्रैल 2025 को गिरफ्तार किया गया है।

गोल्ड एटीएम की खबर से मचा था तहलका

29 नवंबर, 2011 को मुंबई में एक ख़बर ने तहलका मचा दिया था कि यहां भारत का पहला गोल्ड एटीएम लगाया गया है और इस एटीएम से लोग सोने-चांदी के सिक्के और हीरे जवाहरात ख़रीद सकते हैं। उस एटीएम को लगाया था गीतांजलि नामक कंपनी ने और ये कंपनी थी मेहुल चोकसी की। इस तरह मेहुल चोकसी उस वक़्त भारत के हीरा कारोबार के पोस्टर बॉय बन गया था। उसकी कहानी भी उसी तहलका मचाने वाली एटीएम जैसी ही है, जिसकी हर शुरुआत हीरे जैसी चमकदार थी। उसके तौर-तरीक़े हमेशा सोने जैसे लचीले रहे। लेकिन, बाद में आपको ऐसा लकता कि किसी ने गहनों की दुकान से आपको ठग लिया हो।

बहन के नाम पर रखा कंपनी का नाम-गीतांजलि

मेहुल ने पिता चीनूभाई चोकसी के हीरों के सिर्फ़ कटिंग-पॉलिशिंग का ही कारोबार था जिसे मेहुल चोकसी ने विदेशों तक पहुंचा दिया और नाम और शोहरत हासिल की। मेहुल चोकसी ने बहन के नाम पर अपनी कंपनी का नाम रखा था-गीतांजलि। इस कंपनी ने 2006 में आईपीओ में क़दम रखा, तो 330 करोड़ रुपए इकट्ठा किए। फिर साल 2013 में वो वक़्त आया, जब सेबी ने मेहुल की कंपनी को हेर-फ़ेर के शक में 6 महीने के लिए स्टॉक मार्केट में ट्रेडिंग से रोक दिया। नकली हीरे को लेकर कंपनी की बहुत बदनामी हुई और कर्मचारियों को ही नौकरी के लाले पड़ गए।

फिर मेहुल चोकसी ने दांव खेला और अपने प्रोडक्ट को सही साबित करने की ठानी। इस तरह से 2008 में कटरीना कैफ़ ने उनके हीरों का प्रचार किया, तो एक साल में कंपनी की बिक्री 60 फ़ीसदी बढ़ गई।2018 में कंपनी के पूर्व मैनेजिंग डायरेक्टर संतोष श्रीवास्तव ने आरोप लगाए कि गीतांजलि अपने ग्राहकों को नकली हीरे बेचती थी। इस तरह से एक और झटका लगा।

करोड़ों के घोटाले का हुआ पर्दाफाश

चोकसी की कंपनियों ने 2011 से ही बैंकिंग सिस्टम की खामियों का फायदा उठाकर पंजाब नेशनल बैंक से फर्जी लेन-देन शुरू कर दिया और बैंक के ही कुछ कर्मचारियों की मिलीभगत से उसने लेटर्स ऑफ अंडरटेकिंग (LoUs) के जरिये अरबों रुपये का कर्ज ले लिया, जिसका कोई पुख्ता गारंटी या बैकअप नहीं था। इन LoUs के आधार पर चोकसी की गीतांजलि ग्रुप और उसके सहयोगी कंपनियों को अंतरराष्ट्रीय बैंकों से कर्ज मिला, जिसे न तो चुकाया गया और न ही सही तरीके से बही खातों में दिखाया गया।

2018 में पीएनबी ने मेहुल चोकसी की कंपनी के इस घोटाले का खुलासा किया, जो पूरे देश को हिला देने वाली खबर थी। इस खुलासे में करीब 13,850 करोड़ की धोखाधड़ी सामने आई, जिसके मुख्य आरोपी मेहुल चोकसी और उसका भांजा नीरव मोदी थे।

हरिप्रसाद ने कहा-चोकसी का प्रत्यर्पण आसान नहीं

पंजाब नेशनल बैंक घोटाले के मुखबिर हरिप्रसाद एसवी ने सोमवार को भगोड़े कारोबारी मेहुल चोकसी के भारत प्रत्यर्पित होने की संभावनाओं पर संदेह जताया और कहा, “प्रत्यर्पण कोई आसान काम नहीं है। चोकसी का बटुआ भरा हुआ है और वह विजय माल्या की तरह इस प्रक्रिया से बचने के लिए यूरोप में सबसे अच्छे वकीलों को नियुक्त करेगा। मुझे नहीं लगता कि भारत के लिए उसे वापस लाना आसान होगा।

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