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संविधान का गला घोंटने वाले पापियों को न भूलें… इमरजेंसी का जिक्र कर PM मोदी का कांग्रेस पर बड़ा हमला

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आपातकाल को संविधान का गला घोंटने और उसकी पीठ में छुरा घोंपने वाला पाप बताते हुए शुक्रवार को लाल किले की प्राचीर से कहा कि देश की किसी भी पीढ़ी को ऐसा करने वाले पापियों को नहीं भूलना चाहिए।

पीएम मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए कहा, “50 साल पहले, भारत के संविधान का गला घोंटा गया था। पीठ में छुरा घोंपा गया। देश को जेलखाना बना दिया गया। आपातकाल लगा दिया गया था। देश की किसी भी पीढ़ी को संविधान की हत्या के इस पाप को नहीं भूलना चाहिए।”

प्रधानमंत्री ने ऐतिहासिक लाल किले की प्राचीर से अपने संबोधन में कहा, “उन्हें (देश के लोगों को) संविधान की हत्या करने वाले पापियों को नहीं भूलना चाहिए। हमें भारत के संविधान के प्रति अपने समर्पण को और मजबूत करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। यही हमारी प्रेरणा है।”

कर सुधारों ने नागरिकों का जीवन आसान बनाया: मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि सरकार ने नागरिकों का जीवन आसान बनाने के लिए कर सुधार किए हैं और बेहतर क्षमताओं के कारण ही कर-मुक्त सालाना आय की सीमा को 12 लाख रुपये तक बढ़ाने में मदद मिली। मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में कहा कि सरकार ने आयकर रिफंड को तेज करने और ‘फेसलेस’ मूल्यांकन को लागू करने के लिए सुधार किए हैं।

उन्होंने कहा, ”हमने नागरिकों का जीवन आसान बनाने के लिए भी सुधार किए हैं। आयकर रिफंड, फेसलेस मूल्यांकन, कर-मुक्त आय सीमा को बढ़ाकर 12 लाख रुपये सालाना करना, ये सभी कर सुधारों का परिणाम हैं। किसी ने कभी सोचा भी नहीं था कि 12 लाख रुपये तक की आय पर कर राहत संभव है। जब किसी राष्ट्र की क्षमता बढ़ती है, तो उसके नागरिकों को लाभ होता है।”

सरकार ने 2025-26 के आम बजट में आयकर छूट की सीमा सात लाख रुपये सालाना से बढ़ाकर 12 लाख रुपये कर दी थी। मानक कटौती को ध्यान में रखते हुए प्रभावी कर छूट 12.75 लाख रुपये प्रति वर्ष है। इस तरह सालाना 12.75 लाख रुपये तक कमाने वाले वेतनभोगी व्यक्ति को कोई आयकर नहीं देना होगा।

परिश्रम के तप में होती है इतिहास बदलने की क्षमता : मोदी

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा है कि परिश्रम के तप की ताकत अद्भुत होती है और उसकी तप में हमेशा इतिहास रचने की क्षमता रही है इसलिए जीवन में परिवर्तन के लिए समय को अपने हिसाब से मोड़ना होगा ताकि सारी बाधाओं पर जीत हासिल की जा सके। श्री मोदी ने लाल किला से 79वें स्वतंत्रता दिवस पर देश को संबोधित करते हुए शुक्रवार को कहा कि कठिन परिश्रम और समय का सही उपयोग ही वह शक्ति है, जो हमें असाधारण बनाती है और इतिहास रचने की क्षमता प्रदान करती है। परिश्रम में ही वह ताकत है जो हर व्यक्ति के सपने को साकार करती है।

प्रधानमंत्री ने कविता की पंक्ति सुनाते हुए कहा…
“परिश्रम में तपा है,
उसने ही इतिहास रचा है।
जिसने फौलादी चट्टानों को तोड़ा है,
उसने समय को मोड़ा है।
समय को मोड़ देने का भी
यही समय है,
सही समय है।”
उन्होंने कहा कि ये पंक्तियां बहुत सुंदर हैं जो हमें हर क्षण की महत्ता समझने और उसे व्यर्थ न गँवाने के लिए प्रेरित करती है।

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