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साइबर अपराध के खिलाफ मजबूत तंत्र की जरूरत, सभी एजेंसियां मिलकर कर रहीं काम : केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने “साइबर-आधारित धोखाधड़ी से निपटना और इसके तंत्र को समाप्त करना” विषय पर राष्ट्रीय सम्मेलन को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि आई4सी, राज्य पुलिस, सीबीआई, एनआईए, ईडी, दूरसंचार विभाग, बैंकिंग प्रणाली, आईटी मंत्रालय, आरबीआई और न्यायपालिका जैसे संस्थान सभी साइबर अपराध को रोकने और कम करने के लिए प्रयास कर रहे हैं।

अपने संबोधन में अमित शाह ने कहा कि जनवरी 2020 से 2025 तक आई4सी के रिपोर्टिंग पोर्टल का व्यापक उपयोग हुआ है। 30 नवंबर 2025 तक इसे 23 करोड़ से अधिक बार इस्तेमाल किया गया, जो इसकी बढ़ती अहमियत को दर्शाता है। इसी अवधि में 82 लाख साइबर अपराध की शिकायतें दर्ज हुईं, जिनमें से लगभग 1 लाख 84 हजार एफआईआर में परिवर्तित की गईं और अनेक मामलों का निराकरण भी हुआ।

उन्होंने बताया कि गृह मंत्रालय ने साइबर अपराध के खिलाफ काफी पहले ही एक व्यापक रणनीति अपनाई है, जिसमें रियल-टाइम रिपोर्टिंग, फॉरेंसिक लैब का नेटवर्क, क्षमता निर्माण, अनुसंधान एवं विकास, साइबर जागरूकता को समाज तक पहुंचाना और साइबर स्पेस में साइबर हाइजीन सुनिश्चित करना शामिल है। इन सभी प्रयासों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित कर हमें एक मजबूत और सुरक्षित तंत्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ना होगा।

गृह मंत्री ने कहा कि जनवरी 2019 में गृह मंत्रालय ने आई4सी की स्थापना की। आई4सी एक अद्भुत इंफ्रास्ट्रक्चर खड़ा करने में सफल रहा है। विभिन्न एजेंसियों के बीच इसने बेहतर समन्वय स्थापित किया, आवश्यक साइबर इंफ्रास्ट्रक्चर कई स्थानों पर खड़ा किया और साइबर अपराधियों के खिलाफ प्रभावी कदम उठाए हैं।

उन्होंने सीबीआई और आई4सी को बधाई देते हुए कहा कि यह एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसमें कई सरकारी एजेंसियां मिलकर काम कर रही हैं। गृह मंत्रालय स्वतंत्र रूप से योगदान दे रहा है और आई4सी, राज्य पुलिस, सीबीआई, एनआईए, ईडी, दूरसंचार विभाग, बैंकिंग प्रणाली, आईटी मंत्रालय, आरबीआई और न्यायपालिका जैसे संस्थान सभी साइबर अपराध को रोकने और कम करने के लिए प्रयासरत हैं। प्रत्येक एजेंसी की अपनी भूमिका और जिम्मेदारी होती है।

उन्होंने बताया कि 11 साल पहले 25 करोड़ इंटरनेट उपभोक्ता थे, जो आज बढ़कर 100 करोड़ हो गए हैं। ब्रॉडबैंड कनेक्शनों में भी 16 गुना वृद्धि होकर यह संख्या 100 करोड़ से अधिक हो चुकी है। 1 जीबी डेटा की कीमत में 97% की कमी आई है, जिससे कनेक्टिविटी और उपयोग में वृद्धि हुई है। 11 साल पहले 546 पंचायतें भारतनेट से जुड़ी थीं, जबकि आज 2 लाख पंचायतें इससे जुड़ चुकी हैं। यूपीआई लेन-देन के तहत वर्ष 2024 में 233 ट्रिलियन भारतीय रुपए मूल्य के 181 बिलियन डिजिटल ट्रांजेक्शन किए गए। दुनिया में हर दूसरा डिजिटल ट्रांजेक्शन भारत में हो रहा है। 2024 में भुगतान प्रणाली के कुल 97% ट्रांजेक्शन डिजिटल थे और वॉल्यूम के हिसाब से 99% लेन-देन डिजिटल माध्यम से हुए।

सम्मेलन का प्राथमिक उद्देश्य भारत में साइबर-सक्षम धोखाधड़ी के पैमाने, रुझानों और विकसित होते स्वरूप की साझा समझ विकसित करना था।

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