पंजाबराज्य

बाढ़ प्रभावित इलाकों में से लगभग 20,000 लोगों को सुरक्षित निकाला गया, 174 राहत कैंपों में बसेरा कर रहे हैं 5167 लोग: हरदीप सिंह मुंडियां

  • अब तक 3.54 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए, 30 लोगों की गई जान और 1400 गाँव बाढ़ की चपेट में आए
  • बाढ़ के कारण 1.48 लाख हेक्टेयर से अधिक फ़सल क्षेत्र को नुकसान पहुँचा

चंडीगढ़। पंजाब के राजस्व, पुनर्वास और आपदा प्रबंधन मंत्री स. हरदीप सिंह मुंडियां ने आज बताया कि पंजाब हाल के दशकों की सबसे बड़ी बाढ़ों में से एक का सामना कर रहा है, जिसमें 23 ज़िले बाढ़ की चपेट में आने से 30 लोगों की जान गई हैं और 3.54 लाख से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री स. भगवंत सिंह मान के नेतृत्व में राज्य सरकार बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में समय पर राहत पहुँचाने, लोगों को सुरक्षित बाहर निकालने और उनके पुनर्वास को सुनिश्चित करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

कैबिनेट मंत्री ने जानकारी देते हुए बताया कि अब तक निचले और बाढ़ प्रभावित इलाकों से 19,597 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। इनमें गुरदासपुर से (5581 व्यक्ति), फिरोज़पुर (3432), अमृतसर (2734), फाज़िल्का (2422), होशियारपुर (1615), कपूरथला (1428) और पठानकोट (1139) शामिल हैं। इसके अलावा बरनाला (369), जालंधर (474), रूपनगर (65), मानसा (163), मोगा (115) और तरन तारन से (60) लोगों को भी सुरक्षित बाहर निकाला गया है।

उन्होंने आगे बताया कि प्रभावित परिवारों को आश्रय और आवश्यक सुविधाएँ प्रदान करने के लिए पंजाब भर में 174 राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इनमें बरनाला में 29 शिविर, पटियाला में 26, गुरदासपुर में 25, होशियारपुर में 20, अमृतसर में 16, पठानकोट में 14, फाज़िल्का में 10, मोगा में 9, फिरोज़पुर और जालंधर में 8-8, कपूरथला में 4, रूपनगर में 3 और मानसा व संगरूर में 1-1 शिविर शामिल हैं। इस समय इन शिविरों में 5167 लोग रह रहे हैं, जिनमें से सबसे अधिक होशियारपुर (1041 व्यक्ति), फाज़िल्का (1304), फिरोज़पुर (706), गुरदासपुर (424), अमृतसर (371), बरनाला (369) और जालंधर (474) के हैं। इसके अलावा मानसा के 163, मोगा के 115, संगरूर के 60, कपूरथला के 57, पठानकोट के 48 और रूपनगर के 35 लोग शामिल हैं।

गाँवों के नुकसान के बारे में जानकारी देते हुए स. मुंडियां ने बताया कि कुल 1400 गाँव बाढ़ की चपेट में आए हैं। इनमें सबसे अधिक प्रभावित गुरदासपुर जिले के (324 गाँव), अमृतसर (135), होशियारपुर (119), कपूरथला (115), मानसा (108), फिरोज़पुर (93), पठानकोट (82), फाज़िल्का (72), जालंधर (62) और तरन तारन (66) गाँव हैं। इसके अलावा मोगा के 48 गाँव, रूपनगर के 44, बरनाला के 34, लुधियाना के 26, श्री मुक्तसर साहिब के 23, पटियाला के 16, फरीदकोट के 15, संगरूर के 13 और मलेरकोटला के 5 गाँव प्रभावित हुए हैं।

स. हरदीप सिंह मुंडियां ने बताया कि बाढ़ के कारण पंजाब के 13 जिलों में कुल 3,54,626 की आबादी प्रभावित हुई है। सबसे अधिक प्रभावित जिलों में गुरदासपुर में 1,45,000 लोग, अमृतसर में 1,17,534, फिरोज़पुर में 38,112 और फाज़िल्का में 21,562 लोग प्रभावित हुए हैं। अन्य जिलों में पठानकोट में 15,053, कपूरथला में 5748, एस.ए.एस. नगर में 7000, होशियारपुर में 1960 और जालंधर में 991 लोग प्रभावित हुए हैं। कम प्रभावित जिलों में बरनाला (403), मोगा (800), रूपनगर (300) और मानसा (163) लोग प्रभावित हुए हैं।

उन्होंने बताया कि राज्य में 1,48,590 हेक्टेयर क्षेत्र में खड़ी फसल को नुकसान पहुँचा है। इनमें सबसे अधिक प्रभावित क्षेत्रों में गुरदासपुर (40,193 हेक्टेयर), मानसा (27,291), अमृतसर (23,000), कपूरथला (14,934), फिरोज़पुर (14,665) और तरन तारन (11,883 हेक्टेयर) शामिल हैं। इसके अलावा होशियारपुर (5971), जालंधर (3000) और पठानकोट (2442) हेक्टेयर भी प्रभावित हुए। इसी तरह एस.ए.एस. नगर (2000), पटियाला (1450), मोगा (949), रूपनगर (300), फरीदकोट (141), लुधियाना (108), बठिंडा (97), श्री मुक्तसर साहिब (84), फाज़िल्का (64), एसबीएस नगर (7), मलेरकोटला (5), संगरूर (3), बरनाला (2) और फतेहगढ़ साहिब में (1) हेक्टेयर फसल क्षेत्र को नुकसान पहुँचा है।

राहत कार्यों में सुरक्षा बलों की तैनाती के बारे में कैबिनेट मंत्री ने बताया कि प्रभावित जिलों में 23 एन.डी.आर.एफ. टीमें पूरी मेहनत से काम कर रही हैं, जिनमें पठानकोट में (1) टीम, गुरदासपुर (6), अमृतसर (6), फिरोज़पुर (3), फाज़िल्का (3), बठिंडा (1), जालंधर (2) और रूपनगर में (1) टीम शामिल है। सेना, वायुसेना और नौसेना ने बचाव और राहत कार्यों के लिए 12 टुकड़ियाँ तैनात की हैं और 8 टुकड़ियों को तैयार रखा गया है। इसके साथ ही 2 इंजीनियर टीमें और लगभग 35 हेलीकॉप्टर राहत कार्यों में लगे हुए हैं। बीएसएफ सीमा जिलों में ज़मीनी स्तर पर सहायता प्रदान कर रही है। इसके अलावा राहत सामग्री पहुँचाने और लोगों को बाहर निकालने के लिए 114 नावें और राज्य का एक हेलीकॉप्टर भी काम में लगाया गया है।

कैबिनेट मंत्री ने बताया कि 1 अगस्त से 2 सितम्बर तक 12 जिलों में कुल 30 लोगों की जान गई है, जिनमें से सबसे अधिक 6 मौतें पठानकोट में हुई हैं और पठानकोट के 3 लोग अब भी लापता हैं। उन्होंने आगे कहा कि बाढ़ का पानी कम होने के बाद पशुओं और बुनियादी ढाँचे के नुकसान का आकलन किया जाएगा, लेकिन शुरुआती रिपोर्टें भारी नुकसान की ओर इशारा करती हैं।

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