
जिला अदालत ने नगर निगम के चर्चित स्मार्ट पार्किंग प्रोजेक्ट से जुड़े मामले में गिरफ्तार आरोपी संदीप भोरा को जमानत दे दी है।
पुलिस ने संदीप भोरा को 28 जनवरी को गिरफ्तार किया था। वह लंबे समय से फरार चल रहा था और उसके खिलाफ तीन गैर-जमानती वारंट जारी किए गए थे। वारंट जारी होने के बाद पुलिस ने उसे दबोच लिया। गिरफ्तारी के बाद आरोपी की ओर से अदालत में जमानत याचिका दायर की गई।
बचाव पक्ष की दलील
बचाव पक्ष के वकील रमन सिहाग ने अदालत में तर्क दिया कि मामला आपराधिक नहीं बल्कि सिविल प्रकृति का है। उन्होंने कहा कि आरोपी के खिलाफ किसी आपराधिक मंशा का ठोस प्रमाण प्रस्तुत नहीं किया गया है। साथ ही यह भी दलील दी गई कि मामले में सह-आरोपियों को पहले ही जमानत मिल चुकी है।
सरकारी पक्ष का विरोध
सरकारी वकील ने जमानत का विरोध करते हुए अदालत को बताया कि आरोपी प्रभावशाली व्यक्ति है। यदि उसे जमानत दी गई तो वह देश छोड़ सकता है या साक्ष्यों से छेड़छाड़ कर सकता है।
हालांकि अदालत ने सरकारी पक्ष की दलीलों को स्वीकार नहीं किया और आरोपी को जमानत प्रदान कर दी।
क्या है पूरा मामला?
मामले के अनुसार टोल इंफ्रा लिमिटेड कंपनी ने नगर निगम चंडीगढ़ के साथ 25 पार्किंग साइट्स और एक मल्टीलेवल पार्किंग के संचालन का अनुबंध किया था।
आरोपी संदीप भोरा इसी कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर के पद पर कार्यरत था। अनुबंध के तहत कंपनी ने 1.47 करोड़ रुपये की बैंक गारंटी जमा करवाई थी और लगभग 3 करोड़ रुपये स्मार्ट पार्किंग प्रोजेक्ट में निवेश किए थे।
कंपनी को सातवीं तिमाही (19 दिसंबर 2018 से 18 मार्च 2019) की एडवांस लाइसेंस फीस जमा करनी थी, लेकिन घाटे का हवाला देते हुए भुगतान नहीं किया गया। इसके बाद नगर निगम ने लाइसेंस रद्द कर दिया और बैंक गारंटी जब्त कर ली।
बताया जाता है कि कंपनी की ओर से निगम को 3.69 करोड़ रुपये के पांच चेक दिए गए थे, जिनमें से पहला चेक बाउंस हो गया। इसके बाद निगम ने पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई, जिसके आधार पर आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की आगे की सुनवाई निर्धारित तिथि पर की जाएगी।



