8 साल की ऐमन फातिमा का पहला रोज़ा देश की तरक्की और अमन-चैन के नाम

पादरीबाजार, गोरखपुर। रमज़ान के पाक महीने में जहां रोज़ेदार इबादत और संयम का पालन कर रहे हैं, वहीं गोरखपुर की 8 वर्षीय नन्ही रोज़ेदार ‘ऐमन फातिमा’ ने अपने जीवन का पहला रोज़ा देश की उन्नति, आपसी सौहार्द और भाईचारे के लिए रखा। इस मासूम पहल ने समाज में एक अनूठी मिसाल कायम की है।
नवल्स अकादमी के प्राचार्य वारिस सिद्दीकी की बेटी ऐमन फातिमा पिछले कुछ दिनों से रोज़े के महत्व को लेकर जिज्ञासु थीं। अपनी मां जरीना खातून से रोज़े की परंपराओं और रमज़ान के पवित्र उद्देश्य को समझते हुए ऐमन ने खुद को इसके लिए तैयार किया। आखिरकार, रमज़ान के पहले दिन, ऐमन ने पूरे नियमों और विधि-विधान के साथ अपना पहला रोज़ा रखा।
इस मौके पर ऐमन के माता-पिता ने गर्व और भावनाओं से ओत-प्रोत होकर बेटी को आशीर्वाद दिया। पिता वारिस सिद्दीकी ने कहा, यह सिर्फ रोज़ा नहीं, बल्कि देश के प्रति प्रेम और आपसी भाईचारे की मिसाल है। हमारी बेटी ने एक अनोखी सोच के साथ रोज़ा रखा, जिससे अन्य बच्चों को भी प्रेरणा मिलेगी।
नवल्स समूह के अध्यक्ष डॉ. संजयन त्रिपाठी ने भी ऐमन को बधाई देते हुए उसके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। ऐमन ने अपने मासूम शब्दों में कहा, रमज़ान सब्र और इबादत का महीना है। मैंने दिल से रोज़ा रखा और अल्लाह से दुआ की कि हमारे देश में हमेशा शांति और भाईचारा बना रहे।



