हर एक आंख में अश्के अजा सजाना है

- अंजुमन नासिरुल अजा की 150 साला शब्बेदारी
लखनऊ। अंजुमन नासिरुल अज़ा की चार दिवासीय 150 साला शब्बेदारी का आगाज असगर विला कश्मीरी मोहल्ला में हो गया। शब्बेदारी की मजलिस को मौलाना अब्बास इरशाद ने खिताब किया। उन्होंने कहा कि वह नुसरत जो कर्बला के 72 ने की थी न वो 10 मोहर्रम से पहले हुई और न जहूर ए इमाम से पहले होगी। मौलाना ने कहा कि ऐसी शानदार व यादगार शब्बेदारी लखनऊ की तारीख में नहीं देखी। उन्होंने का कि इमाम की नजर में जो नौहे पढ़े,जो मर्सिये कहे और जो गमे हुसैन में रोये वो नासिरुल अजा है। नासिरुल आज का मतलब है अजादारी की नुसरत करने वाला। शब्बेदारी में अंजुमन गुंचाए मजलुमिया ने अंजुमन के शायर हैदर रिजवी का लिखा सलाम ‘चरागे इश्क से दुनिया को जगमगाना है,हर एक आंख में अश्के अजा सजाना है” पढ़ा तो लोगों ने खूब दाद दी। सलाम की धुन धुनसाज गजन्फर हुसैन पप्पू ने बनायी थी। इसके बाद शायर-ए-अहलेबैत हैदर रिजवी का लिखा नौहा’तड़पके यह कहतीं थी बाली सकीना मुझे मेरे बाबा का चेहरा दिखा दो,बालाएं में लूंगी उतारूंगी सदका मुझे मेरे बाबा का चेहरा दिखा दो, पढ़ा तो अजादारों की आंखें अश्कबार हो गयीं। इसके अलावा अंजुमन शाहे इंसो जां, शब्बीरया,शमशीरे हैदरी और मुहिब्बाने हुसैन ने अपने कलाम व नौहे पेश किये।
अंजुमनों को मिले तबरुकात
शब्बेदारी में पढ़ रही अंजुमनों और उनके पदाधिकारियों दिये रहे तबरुकात जिसमे अंजुमन को तीन देगे बिरयानी सहित ,टी कंटेनर,डायरी का सेट,एक 500 ग्राम का चांदी का अलम, डोलची,पटका, फारैरा,मश्क,बयाज और जन्नतुल फिरदौस। इसके अलावा धुनसाज,शायर,अलमबरदार, नौहाख्वान (1& 2 ) और सचिव को बोन चायना का डिनर-सेट दिया जा रहा है। अलमबरदार को चांदी का नोट भी दिया जा रहा है। साथ ही अंजुमन के हर सदस्य को एक बोन चायना की प्लेट में शीरमाल भी दी जा रही है।



