उत्तर प्रदेशलखनऊ

Chaipatti नहीं मार्केट में मिल रहे काले दाने, 11 कुंतल मिलावटी चायपत्ती बरामद

लखनऊ: मड़ियांव के फैजुल्लागंज स्थित कृष्णलोक कालोनी में मिलावटी चायपत्ती बनाने का कारखाना चल रहा था। मंगलवार को एसटीएफ और एफएसडीए की टीम ने छापा मारकर इसका खुलासा किया। मौके से संचालक मो. आरिफ को गिरफ्तार किया। वहीं 11 कुंतल मिलावटी चायपत्ती, हार्ड स्टोन पाउडर और केमिकल समेत कई सामान बरामद किया।

एसटीएफ के डिप्टी एसपी अवनीश्वर चंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक पकड़ा गया आरोपी मो. आरिफ सीतापुर के बिसवां स्थित काजी टोला कस्बे का रहने वाला है। वह मड़ियांव के कृष्णलोक कालोनी में प्लाट नंबर 58 में कारखाना खोलकर मिलावटी चायपत्ती बनाने का काम करता था। एसटीएफ और एफएसडीए की संयुक्त टीम ने मंगलवार को छापा मारकर कारखाने से 30 लाख रुपये की 11,200 किलो मिलावटी चायपत्ती, 30 किलो कलर, 6 पैकेट गेरु, चार इलेक्ट्रॉनिक तराजू, चार पैकिंग मशीन, एक गैस चूल्हा, रसोई गैस सिलिंडर, चाय पैक करने वाला पैकेट (गार्डेन फेस) व अन्य सामाग्री 100.50 किलो, आधार कार्ड, 12,500 रुपये नकदी, एक मोबाइल बरामद किया है।

राजधानी के आसपास के जिलों में फैला रखा था नेटवर्क

एसटीएफ के डिप्टी एसपी अवनीश्वर चंद्र श्रीवास्तव के मुताबिक पूछताछ में आरोपी मो. आरिफ ने कुबूल किया कि वह एक गिरोह बनाकर मिलावटी चायपत्ती बनाकर बेचने का काम करता था। राजधानी के अलावा बाराबंकी, सीतापुर, शाहजहांपुर, बहराइच, गोंडा, श्रावस्ती, बलराम जैसे कई जिलों में एजेंटों के जरिये नेटवर्क तैयार कर कारोबार कर रहे थे। बताया कि आसाम से सस्ती व खराब क्वालिटी की चायपत्ती मंगाकर उसे केमिकल मिलाकर स्ट्रांग व कलरयुक्त चायपत्ती तैयार कर बेचते थे। अलग-अलग कंपनियों के नाम से पैकेट में चायपत्ती भरकर बेचते थे। ताकि लोगों को लगे के नामी कंपनियों की चायपत्ती है। इसमें काफी मुनाफा होता है।

विभागों को तीन मंजिले कारखाने की भनक नहीं

मिलावटी चायपत्ती बनाने का तीन मंजिला कारखाना खुलेआम चल रहा था। इतने बड़े पैमाने पर मिलावटी चाय बनाने का काम चल रहा था। इसकी भनक संबंधित विभागों को नहीं लगी। यह बड़ा सवाल है। अचानक से एसटीएफ को इनपुट मिला तो एफएसडीए भी सक्रिय हो गई। एसटीएफ की टीम मिलावटी कारोबार करने वाले गिरोह के नेटवर्क को खंगालने में जुटी है। वहीं कारखाने में कितने ब्रांड के चायपत्ती बनती थी?, इसके पैकेट कहां से आ रहे थे?, कौन आरिफ का मददगार है? किन विभागों ने जानकारी के बाद भी कार्रवाई नहीं की? इन सभी बिंदुओं पर एसटीएफ की टीम जांच कर रही है।

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