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यूपी के स्वास्थ्य क्षेत्र को बूस्टर डोज: बजट में लखनऊ के मेडिकल संस्थानों को 55,820, आयुर्वेद,होम्योपैथी व यूनानी पद्धति को 2,867 करोड़

उत्तर प्रदेश सरकार ने बुधवार को विधानसभा में वर्ष 2026-27 के लिए 9.12 लाख करोड़ रूपए से अधिक का बजट पेश किया। इस बजट में चिकित्सा शिक्षा एवं स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष जोर दिया गया है। स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल 55,820 करोड़ का प्रावधान किया गया है, जो राज्य के कुल बजट का लगभग 6.1 प्रतिशत है। इसे अब तक का सबसे बड़ा स्वास्थ्य आवंटन माना जा रहा है। इसमें आयुष सेवाओं में आयुर्वेद, यूनानी व होम्योपैथी के विस्तार के लिए 2,867 करोड़ रूपए की व्यवस्था की गई है।

वित्तीय वर्ष 2026-27 के बजट में उत्तर प्रदेश सरकार ने स्वास्थ्य सेवाओं को सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल करते हुए चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के लिए 37,956 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह आवंटन पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 15 प्रतिशत अधिक है।

बजट में मातृ-शिशु स्वास्थ्य, सुरक्षित प्रसव, टीकाकरण, मानसिक स्वास्थ्य, रोग नियंत्रण और ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार पर विशेष जोर दिया गया है। प्रदेश में जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम प्रभावी रूप से लागू है, जिसके तहत गर्भवती महिलाओं को कैशलेस प्रसव सुविधा उपलब्ध कराई जा रही है। सरकार का लक्ष्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाना है। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के अंतर्गत प्रत्येक ब्लॉक में दो मेडिकल टीमें तैनात हैं, जो आंगनबाड़ी केंद्रों और विद्यालयों में जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही हैं। इससे जन्मजात बीमारियों, कुपोषण और अन्य रोगों की समय रहते पहचान संभव हो रही है।

टीकाकरण और रोग नियंत्रण में प्रगति

8 दिसंबर 2024 से संचालित पल्स पोलियो अभियान के तहत अब तक 3.28 करोड़ से अधिक बच्चों को पोलियो की खुराक दी जा चुकी है। जापानी इंसेफेलाइटिस से बचाव के लिए 42 संवेदनशील जनपदों में नियमित टीकाकरण अभियान चलाया जा रहा है। पूर्वांचल और तराई क्षेत्रों में विशेष स्वास्थ्य शिविरों और निगरानी की व्यवस्था की गई है। संक्रामक रोगों की निगरानी के लिए एकीकृत डिजीज सर्विलांस पोर्टल को और मजबूत किया गया है, जहां 16 संक्रामक रोगों और 6 टीकाकरण योग्य बीमारियों की नियमित रिपोर्टिंग हो रही है।

आयुष्मान और मानसिक स्वास्थ्य को मजबूती

गरीब और मध्यम वर्ग को महंगे इलाज से राहत देने के लिए आयुष्मान भारत–मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना के प्रभावी संचालन हेतु 500 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है। प्रदेश में 49.22 लाख लाभार्थी परिवार इस योजना से जुड़े हैं। साथ ही राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत सभी 75 जनपदों में जिला मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। बजट में इसे और प्रभावी बनाने का प्रावधान किया गया है, ताकि मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और उपचार सुविधाएं सुलभ हो सकें।

ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को बल

ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के अंतर्गत 8,641 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इसके अतिरिक्त आयुष्मान भारत राष्ट्रीय स्वास्थ्य सुरक्षा मिशन के लिए 2,000 करोड़ रुपये की व्यवस्था की गई है, जिससे दूरदराज और पिछड़े इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता और पहुंच में सुधार होगा।

राज्य सरकार का फोकस स्वास्थ्य इंफ्रास्ट्रक्चर सुदृढ़ करने, चिकित्सा शिक्षा का विस्तार करने और ग्रामीण व पिछड़े क्षेत्रों तक गुणवत्तापूर्ण सेवाएं पहुंचाने पर है। बजट में चिकित्सा शिक्षा के लिए करीब 14,997 करोड़ रूप्ए की व्यवस्था की गई है। इसमें 14 नए मेडिकल कॉलेज खोलने के लिए 1,023 करोड़ रूपए तथा लखनऊ स्थित कैंसर इंस्टीट्यूट जैसे विशेष संस्थानों के लिए 315 रूपए करोड़ प्रस्तावित हैं। इसके अलावा चिकित्सा एवं परिवार कल्याण विभाग को 37,956 करोड़ रूपए का प्रावधान है, इनमें ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन (एनआरएचएम) के तहत 8,641 करोड़ रूपए और आयुष्मान भारत योजना के लिए 2,000 करोड़ रूपए का प्रावधान किया गया है।

बजट में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा को एक समग्र और उभरते हुए सामाजिक क्षेत्र के रूप में सुदृढ़ करने के लिए पर्याप्त संसाधन आवंटित किए गए हैं। इस बजट में स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए कुल आवंटन का अनुपात लगभग 6 प्रतिशत रखा गया है, जो राज्य के कुल बजट का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। इस बजट से राज्य सरकार की गुणवत्ता युक्त सेवाओं के लिए प्रतिबद्यता प्रदर्शित होती है।-डॉ.आशुतोष कुमार दुबे, पूर्व मुख्य चिकित्सा अधिकारी, गोरखपुर

कल्याण सिंह कैंसर संस्थान को 326 करोड़ की सौगात

लखनऊ, अमृत विचार : प्रदेश सरकार ने कल्याण सिंह कैंसर संस्थान को 326 करोड़ रुपये का बड़ा बजट आवंटित कर संस्थान को आधुनिक चिकित्सा सुविधाओं से सुसज्जित करने की दिशा में अहम कदम उठाया है। इस राशि से संस्थान के ढांचे, संसाधनों और उपचार सुविधाओं में व्यापक सुधार किया जाएगा।

लीनियर एक्सलरेटर व रोबोटिक सर्जरी से मिलेगा आधुनिक उपचार

संस्थान के निदेशक डॉ. एमएलबी भट्ट ने बताया कि कुल 326 करोड़ रुपये के बजट में 70 करोड़ रुपये वेतन मद, 70 करोड़ रुपये गैर-वेतन मद के लिए निर्धारित किए गए हैं। इसके अलावा 150 करोड़ रुपये आधुनिक मशीनों और उपकरणों की खरीद पर खर्च किए जाएंगे, जबकि 36 करोड़ रुपये निर्माण कार्यों के लिए आवंटित किए गए हैं, जिससे संस्थान का बुनियादी ढांचा और सुदृढ़ होगा।

ट्यूमर का सटीक आकलन संभव

चिकित्सा अधीक्षक डॉ. विजय वरुण ने बताया कि संस्थान में अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किए जाएंगे। लगभग 40 करोड़ रुपये की लागत से लीनियर एक्सलरेटर मशीन लगाई जाएगी, जो कैंसर मरीजों को सटीक और प्रभावी रेडियोथेरेपी प्रदान करने में सहायक होगी। इसके अलावा 30 करोड़ रुपये की लागत से सीटी सिमुलेटर स्थापित किया जाएगा, जिससे उपचार शुरू करने से पहले ट्यूमर की सटीक स्थिति और आकार का आकलन किया जा सकेगा।

रोबोटिक सर्जरी की सुविधा

डॉ. विजय वरुण ने बताया कि मरीजों को अत्याधुनिक रोबोटिक सर्जरी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इसके लिए ‘डॉ. विंसी’ रोबोटिक सर्जरी प्रणाली की स्थापना हेतु 30 करोड़ रुपये निर्धारित किए गए हैं। इस तकनीक के जरिए जटिल कैंसर सर्जरी अधिक सटीक, सुरक्षित और कम जोखिम वाली बन सकेगी, जिससे मरीजों की रिकवरी भी तेज होगी।

केजीएमयू को 1938 करोड़ का बजट

प्रदेश सरकार ने किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) को चालू वित्तीय वर्ष में 1,93,800 लाख रुपये (लगभग 1938 करोड़ रुपये) का भारी भरकम बजट आवंटित किया है। यह राशि पिछले वर्ष के 1,86,870 लाख रुपये के बजट से अधिक है, जिससे विश्वविद्यालय के चिकित्सा ढांचे को और सशक्त करने की राह प्रशस्त होगी।

300 करोड़ के उपकरण होंगे शामिल

केजीएमयू में प्रतिदिन सात से आठ हजार मरीज ओपीडी में उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। विश्वविद्यालय में 4000 से अधिक बेड हैं, जो अधिकांश समय भरे रहते हैं। बढ़ती मरीज संख्या को देखते हुए बजट में विशेष रूप से आधुनिक उपकरणों और तकनीक पर जोर दिया गया है।कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि उपकरण मद में 300 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है। इस राशि से पैथोलॉजी, रेडियोलॉजी, न्यूरो सर्जरी समेत विभिन्न विभागों के लिए अत्याधुनिक उपकरण खरीदे जाएंगे, जिससे जांच और उपचार की गुणवत्ता में सुधार होगा।

एआई से होगी मरीजों की सटीक जांच

उन्होंने बताया कि केजीएमयू में अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित जांच की सुविधा भी शुरू की जाएगी। इससे मरीजों की बीमारी की सटीक पहचान कर उपचार की दिशा तय करना आसान होगा। आधुनिक तकनीक के प्रयोग से निदान और इलाज दोनों अधिक प्रभावी और सटीक बन सकेंगे। मरीजों को अत्याधुनिक स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय में एआई कम्प्यूटिंग यूनिट स्थापित की जाएगी। इस यूनिट की स्थापना पर लगभग आठ से दस करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे।

नया ओपीडी भवन, डेंटल ब्लॉक व वूमेन एपेक्स सेंटर की राह अब होगी आसान

प्रदेश सरकार के बजट प्रावधान के बाद किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) में बुनियादी ढांचे के विस्तार की बड़ी परियोजनाओं को गति मिलने जा रही है। परिसर में नया ओपीडी भवन, डेंटल ब्लॉक और क्वीनमेरी से सटी खाली भूमि पर वूमेन एपेक्स सेंटर के निर्माण का रास्ता साफ हो गया है। इन तीन प्रमुख भवनों के निर्माण से मरीजों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद है।

डेंटल के चार विभाग एक ही छत के नीचे

कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद ने बताया कि पुराना डेंटल भवन जर्जर हो चुका है। आईआईटी के विशेषज्ञों ने निरीक्षण के बाद इसे असुरक्षित घोषित किया था। वहां संचालित विभागों को अस्थायी रूप से नए डेंटल भवन में शिफ्ट किया जा चुका है और पुराने भवन को जल्द ध्वस्त किया जाएगा। उसके स्थान पर बहुमंजिला अत्याधुनिक डेंटल ब्लॉक बनाया जाएगा, जिसमें डेंटल के चार विभाग संचालित होंगे।

100 बेड का वूमेन एपेक्स सेंटर

क्वीनमेरी के पीछे अतिक्रमण मुक्त कराई गई भूमि पर वूमेन एपेक्स सेंटर की स्थापना की जाएगी। यहां गंभीर गर्भवती महिलाओं और प्रसव के दौरान या बाद में गंभीर हुई प्रसूताओं को भर्ती किया जाएगा। केंद्र में 100 बेड की क्रिटिकल केयर यूनिट बनेगी, जिसमें 50 बेड मातृ गहन चिकित्सा इकाई (एमआईसीयू) और 50 बेड नवजात गहन चिकित्सा इकाई (एनआईसीयू) के होंगे। वर्तमान में गंभीर मरीजों को वेंटिलेटर सुविधा के लिए ट्रॉमा सेंटर रेफर करना पड़ता है। नए केंद्र से यह सुविधा क्वीनमेरी परिसर में ही उपलब्ध हो सकेगी।

कुलपति ने बताया कि न्यू डेंटल ब्लॉक और वूमेन एपेक्स सेंटर के निर्माण पर लगभग 400 करोड़ रुपये खर्च होंगे। दोनों परियोजनाओं का प्रस्ताव उच्च अधिकारियों को भेजा जा चुका है और शीघ्र स्वीकृति की उम्मीद है। साथ ही कॉलेज ऑफ नर्सिंग और पैरामेडिकल का नया भवन भी प्रस्तावित है।

सात मंजिला नया ओपीडी ब्लॉक

मरीजों की बढ़ती संख्या को देखते हुए केजीएमयू प्रशासन सात मंजिला अत्याधुनिक ओपीडी ब्लॉक का निर्माण करेगा। यह भवन राजकीय बालिका इंटर कॉलेज और संस्कृत पाठशाला की 4.8 एकड़ भूमि पर बनाया जाएगा। वर्तमान में ओपीडी विभिन्न भवनों में संचालित हो रही है, जिससे मरीजों को असुविधा का सामना करना पड़ता है। नए ओपीडी ब्लॉक में कार्डियोलॉजी, गायनी, मानसिक रोग, रेस्पिरेटरी मेडिसिन, आर्थोपेडिक्स, गठिया समेत विभिन्न विभागों की ओपीडी एक ही परिसर में संचालित होगी। प्रत्येक डॉक्टर के कक्ष के बाहर 200 से अधिक मरीजों के बैठने की व्यवस्था होगी। इसके अलावा वेटिंग एरिया, कैंटीन, शुद्ध पेयजल, प्रत्येक तल पर शौचालय और पर्याप्त पार्किंग की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

लोहिया संस्थान में रोबोटिक कैंसर सर्जरी से लेकर 1000 बेड का अस्पताल

डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान को चालू वित्तीय वर्ष में1,08,500 लाख रुपये (करीब 1085 करोड़ रुपये) का बजट आवंटित किया है। यह राशि पिछले वर्ष मिले 1,06,000 लाख रुपये से 2500 लाख रुपये अधिक है। बढ़ते मरीज दबाव को देखते हुए बजट में की गई वृद्धि से संस्थान में आधुनिक इलाज सुविधाओं को विस्तार देने में मदद मिलेगी।

400 करोड़ की परियोजनाएं प्रस्तावित

संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह ने बताया कि मशीनों और अत्याधुनिक उपकरणों की खरीद के लिए 25,000 लाख रुपये का प्रावधान किया गया है। कैंसर मरीजों के लिए एडवांस रोबोटिक सर्जरी सिस्टम खरीदा जाएगा। इससे जटिल कैंसर सर्जरी अधिक सटीक और सुरक्षित ढंग से की जा सकेगी। उन्होंने बताया कि भवन निर्माण कार्यों को भी गति दी जाएगी। इसके लिए 20,000 लाख रुपये का बजट निर्धारित है, जिसमें 1000 बेड के नए अस्पताल, हॉस्टल और स्टाफ पोस्ट्स कॉम्प्लेक्स का निर्माण शामिल है।

आधुनिक जांच सुविधाओं का विस्तार

गुर्दा प्रत्यारोपण से पहले मरीज और डोनर की कई महत्वपूर्ण जांचें आवश्यक होती हैं, जो अब तक संस्थान में सीमित थीं। निदेशक ने बताया कि एक करोड़ रुपये की लागत से एचएलए ट्रांसप्लांट लैब स्थापित की जाएगी। इसके अलावा ढाई करोड़ रुपये से एडवांस ऑपरेटिंग माइक्रोस्कोप विद कैमरा, 15 करोड़ रुपये से अत्याधुनिक ड्यूल एनर्जी सीटी स्कैन मशीन और 12 करोड़ रुपये से नई एमआरआई मशीन खरीदी जाएगी।

लकवाग्रस्त मरीजों को मिलेगी नई उम्मीद, हृदय रोग उपचार और होगा प्रभावी

पीएमआर (फिजिकल मेडिसिन एंड रिहैबिलिटेशन) विभाग में साढ़े चार करोड़ रुपये की लागत से रोबोटिक अपर एक्सट्रीमिटी फंक्शनल थेरेपी डिवाइस खरीदी जाएगी। इस डिवाइस के जरिए पैरालिसिस के मरीजों को रोबोट की सहायता से व्यायाम कराया जाएगा, जिससे रिकवरी की गति तेज होगी और निष्क्रिय अंगों में दोबारा सक्रियता लाने में मदद मिलेगी।

इस बार पिछले बजट की तुलना में 2500 लाख रुपये अधिक मिले

वहीं, कार्डियोलॉजी विभाग में साढ़े चार करोड़ रुपये की लेजर मशीन स्थापित की जाएगी। इसके माध्यम से हृदय की धमनियों में जमा कैल्शियम को लेजर तकनीक से हटाया जा सकेगा, जिससे हृदय रोग उपचार और अधिक प्रभावी होगा। सरकार की इस बजटीय सौगात से लोहिया संस्थान में सुपर स्पेशियलिटी सेवाओं के विस्तार और मरीजों को उन्नत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

नए उत्तर प्रदेश के संकल्पों को साकार करने वाला बजट

उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह बजट युवाओं की आशाओं और आकांक्षाओं की पूर्ति के साथ ही चतुर्दिक विकास एवं नए उत्तर प्रदेश के संकल्पों को साकार करने वाला है। बजट में हर वर्ग का ध्यान रखा गया है। हमारा लक्ष्य है कि प्रदेश का प्रत्येक नागरिक सुलभ, गुणवत्तापूर्ण और किफायती स्वास्थ्य सेवाओं से लाभान्वित हो।

PGI में दुर्लभ रोगियों के लिए बनेगा 500 बेड का आधुनिक केन्द्र

प्रदेश सरकार ने संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) को इस वर्ष अब तक का सबसे बड़ा बजट 2246 करोड़ रुपये आवंटित किया है। बीते वर्ष 1292 करोड़ रुपये के मुकाबले इस बार 954 करोड़ रुपये अधिक राशि दी गई है।

पीजीआई को बीते वर्ष से 954 करोड़ ज्यादा मिला

बजट का प्रमुख उद्देश्य गंभीर और दुर्लभ रोगियों के इलाज के लिए क्वाटर्नरी स्वास्थ्य (चतुर्थक स्वास्थ्य देखभाल) केन्द्र स्थापित करना है। पीजीआई निदेशक डॉ. आरके धीमान ने बताया कि 500-बेड वाले इस अत्याधुनिक केन्द्र में लिवर, गुर्दा, हृदय, मस्तिष्क और दुर्लभ रोगों से पीड़ित मरीजों का इलाज किया जाएगा। इसमें अंग प्रत्यारोपण यूनिट, लैब और कई ऑपरेशन थियेटर शामिल होंगे। पहले चरण में रोगियों की भर्ती अप्रैल 2027 से शुरू होगी।

क्वाटर्नरी स्वास्थ्य केन्द्र में ये होंगी सेवाएं

कार्डियक साइंसेज, न्यूरोसाइंसेज, रीनल साइंसेज, गैस्ट्रो इंटेस्टाइनल एवं हेपैटिक सेवाएं, क्रिटिकल केयर, मैटरनल एंड फीटल मेडिसिन, ऑन्कोलॉजी, जीन एवं सेल थेरेपी और रेयर डिजीज जीनोमिक सेवाएं उपलब्ध होंगी।

इन कामों के लिये मिला बजट

-निर्माण कार्यों के लिए: 359 करोड़
-पीजीआई और एपेक्स ट्रॉमा सेंटर में उपकरण, मशीन व संसाधन: 600 करोड़
-डॉक्टर, स्वास्थ्यकर्मी और अन्य का वेतन: 900 करोड़
-सामान्य गैर-वेतन सहायता अनुदान: 375 करोड़
-दवा और रसायन: 10 करोड़

मुख्य सुविधाएं और विकास

-गंभीर रोगियों के लिए सीसीएम में 60 बेड बढ़ेंगे
-80-बेड की बर्न यूनिट स्थापित होगी
-दो नए रोबोटिक सर्जरी सिस्टम लगाए जाएंगे
-सेंटर फॉर एक्सीलेंस का निर्माण होगा
-ब्लड कैंसर विभाग का विस्तार किया जाएगा

एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर अक्टूबर से शुरू होगा इलाज

पीजीआई परिसर में बन रहे एडवांस पीडियाट्रिक सेंटर में अक्टूबर से बच्चों का इलाज शुरू होगा। पहले चरण में 17 विभागों के 310 बेड पर इलाज संभव होगा। यह केन्द्र उत्तर भारत का पहला ऐसा पीडियाट्रिक सेंटर होगा, जिसमें 575 बेड और 24 विभाग एक ही छत के नीचे संचालित होंगे।

पहले चरण में 310 बेड का वितरण:
बेड प्रकार  संख्या
सामान्य 163
आईसीयू 54
एचडीयू 28
आइसोलेशन 20
प्राइवेट  45
स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार और गुणवत्ता सुधार के लिए सरकार प्रतिबद्ध : ब्रजेश पाठक

उप मुख्यमंत्री ने कहा कि नई स्वास्थ्य अवसंरचना, आधुनिक उपकरणों की उपलब्धता, विशेषज्ञ चिकित्सकों की नियुक्ति तथा जनहितकारी योजनाओं के विस्तार के माध्यम से “स्वस्थ प्रदेश, समृद्ध प्रदेश” के संकल्प को और सुदृढ़ किया जा रहा है। नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना, चिकित्सा शिक्षा के विस्तार, कैंसर उपचार सुविधाओं में वृद्धि तथा असाध्य रोगों के निःशुल्क उपचार हेतु महत्वपूर्ण बजटीय प्रावधान किए गए हैं। हर नागरिक को सुलभ, सस्ती और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराना हमारा संकल्प है।

देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था वाला प्रदेश बनाएगा यह बजट : एके शर्मा

नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए के शर्मा ने कहा कि वित्तीय वर्ष 2026–27 का बजट प्रदेश के विकास इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ने वाला है। यह बजट पिछले वर्ष की तुलना में 12.09 प्रतिशत अधिक है, जो उत्तर प्रदेश को देश की अग्रणी अर्थव्यवस्था बनाने की दिशा में एक मजबूत कदम है। ऊर्जा मंत्री ने बताया कि ऊर्जा क्षेत्र की योजनाओं के लिए 65,926 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है, जो प्रदेश में निर्बाध एवं गुणवत्तापूर्ण विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करेगी। अतिरिक्त ऊर्जा स्रोतों के विकास हेतु 2,104 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित है।

पीएम कुसुम सूर्यघर योजना के लिए 1,500 करोड़ रुपये प्रस्तावित किए गए हैं। साथ ही उन्होंने बताया कि आवास एवं शहरी नियोजन के लिए 7,705 करोड़ रुपये की व्यवस्था प्रस्तावित की गई है। मुख्यमंत्री शहरी विस्तारीकरण- नये शहर प्रोत्साहन योजना के लिए 3,500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है, जिससे आधुनिक एवं सुव्यवस्थित शहरों का विकास होगा।

बजट प्रतिक्रिया रालोद

यह बजट सभी के दृष्टिकोण को ध्यान में रखकर बनाया गया है। गन्ना किसानों से किया गया वादा पूरा किया गया है। पिछले 22 वर्षों में जो नहीं किया गया, वह इस सरकार ने आज किया है”।-अनुपम मिश्रा, प्रदेश प्रवक्ता रालोद

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