बेसहारा बच्चों को मिलेगा कानूनी आधार और सरकारी योजनाओं का लाभ

- साथी अभियान के तहत जिला स्तर पर हुआ रणनीतिक मंथन
गौरव कुशवाहा
देवरिया। जनपद न्यायालय परिसर में बुधवार को एक महत्वपूर्ण बैठक में साथी अभियान की दिशा और उद्देश्य पर गहन विमर्श हुआ। उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, लखनऊ के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, देवरिया के तत्वावधान में आयोजित इस बैठक की अध्यक्षता सचिव/अपर जिला जज मनोज कुमार तिवारी ने की।
बैठक में निर्णय लिया गया कि जनपद में रहने वाले निराश्रित, बेसहारा और देखभाल गृहों में रह रहे नाबालिग बच्चों को कानूनी पहचान (आधार कार्ड) दिलाने की व्यापक मुहिम चलाई जाएगी, जिससे वे शिक्षा, स्वास्थ्य और कल्याणकारी योजनाओं का लाभ पा सकें।
अपर जिला जज मनोज तिवारी ने कहा, आधार कार्ड सिर्फ एक दस्तावेज नहीं, बल्कि बच्चों के लिए अधिकारों और संरक्षण का प्रवेश द्वार है। जो बच्चे आज पहचान से वंचित हैं, उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ना हमारी सामूहिक जिम्मेदारी है।
प्राधिकरण ने इस अभियान में पुलिस, राजस्व, स्वास्थ्य, जिला प्रोबेशन विभाग, बाल संरक्षण इकाइयों, पैनल अधिवक्ताओं, और पराविधिक स्वयंसेवकों की संयुक्त भागीदारी सुनिश्चित की है। सभी संबंधित विभागों को निर्देशित किया गया है कि वे 18 वर्ष से कम आयु के बच्चों की पहचान कर 5 अगस्त से पूर्व उनका आधार पंजीकरण पूर्ण कराएं।
साथी समिति का भी गठन किया गया है, जो UIDAI से समन्वय स्थापित कर बच्चों का आधार बनवाएगी। इस अभियान के माध्यम से सड़क किनारे रहने वाले, बाल गृहों में निवासरत और परित्यक्त बच्चों को भी लाभान्वित किया जाएगा।
अभियान की सफलता के लिए नगर निकाय कार्यालयों, एसडीएम कार्यालयों और नगर पंचायतों से भी अपेक्षा की गई है कि वे बच्चों के जन्म प्रमाण पत्र निर्गत करने में सहयोग करें, ताकि आधार पंजीकरण की प्रक्रिया बाधित न हो।
बैठक में पुलिस विभाग, स्वास्थ्य विभाग, राजस्व अधिकारी, बाल संरक्षण इकाई, और महिला एवं बाल विकास विभाग के प्रतिनिधियों ने प्रतिभाग किया और इस मानवीय अभियान को सफल बनाने के लिए हरसंभव सहयोग का आश्वासन दिया।
अपर जिला जज ने कहा कि यह केवल सरकारी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक संवेदनशील सामाजिक जिम्मेदारी है, जिसका उद्देश्य बच्चों को सम्मानजनक जीवन की ओर अग्रसर करना है।



