उत्तर प्रदेशबरेली

परीक्षा के दौरान कक्षा 11वीं की छात्रा ने मांगा सैनिटरी पैड, तो प्रिंसिपल ने दे दी ये सजा; मामले की हो रही जांच

उत्तर प्रदेश के बरेली से एक अजीबोगरीब घटना सामने आई है। यहां 11वीं की छात्रा को परीक्षा के दौरान सैनिटरी पैड मांगने पर कथित तौर पर सजा दी गई। इस मामले पर लड़की के पिता ने शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत के अनुसार, प्रिंसिपल से सैनिटरी पैड मांगने पर उसे एक घंटे तक कक्षा के बाहर खड़ा रखा गया। इस घटना से लोगों में आक्रोश फैल गया है और मामले की जांच की जा रही है।

जिला मजिस्ट्रेट, DIOS), राज्य महिला आयोग और महिला कल्याण विभाग को की शिकायत

अधिकारियों के अनुसार, यह घटना शनिवार को हुई जब छात्रा की menstrual cycle शुरू हो गई थी, उसने प्रिंसिपल से मदद मांगी और सैनिटरी पैड उपलब्ध कराने का अनुरोध किया। हालांकि, उसकी बात अनसुनी कर दी गई और उसे दंडित किया गया। मामले की जानकारी होने पर, लड़की के पिता ने जिला मजिस्ट्रेट, जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS), राज्य महिला आयोग और महिला कल्याण विभाग को लिखित शिकायत दी।

लड़की के पिता द्वारा दर्ज कराई गई शिकायत के अनुसार, उसकी बेटी परीक्षा देने के लिए स्कूल गई थी, तभी उसे पता चला कि उसकी menstrual cycle शुरू हो गई है। शिकायतकर्ता ने बताया कि प्रिंसिपल से सैनिटरी पैड मांगने पर उसे कथित तौर पर क्लास से बाहर जाने के लिए कहा गया और करीब एक घंटे तक बाहर खड़ा रखा गया। जिला विद्यालय निरीक्षक देवकी नंदन ने आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जा रही है तथा रिपोर्ट के आधार पर उचित कार्रवाई की जाएगी।

बोर्ड परीक्षाओं के दौरान सैनिटरी पैड पर शिक्षा मंत्रालय का निर्देश

पिछले साल, बोर्ड परीक्षाओं से पहले, केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय ने एक सलाह जारी की थी और कहा था कि छात्राओं को कक्षा 10 और 12 की बोर्ड परीक्षाओं के दौरान आवश्यक शौचालय ब्रेक लेने की अनुमति दी जानी चाहिए और सभी परीक्षा केंद्रों पर मुफ्त सैनिटरी नैपकिन उपलब्ध कराए जाने चाहिए। यह सलाह राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के सभी स्कूलों, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई), केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) और नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) पर लागू थी।

मंत्रालय ने कहा, “सभी कक्षा 10वीं और 12वीं बोर्ड परीक्षा केंद्रों पर मुफ्त सैनिटरी पैड आसानी से उपलब्ध होंगे, ताकि आवश्यकता पड़ने पर लड़कियों को परीक्षा के दौरान आवश्यक स्वच्छता उत्पादों तक पहुंच सुनिश्चित हो सके। महिला छात्राओं को मासिक धर्म संबंधी जरूरतों को पूरा करने, असुविधा को कम करने और परीक्षा के दौरान ध्यान केंद्रित करने के लिए आवश्यक शौचालय ब्रेक लेने की अनुमति दी जाएगी।”

इसमें कहा गया है, “छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच मासिक धर्म स्वास्थ्य और स्वच्छता के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए शैक्षिक कार्यक्रम लागू किए जाएंगे। इस दृष्टिकोण का उद्देश्य कलंक को कम करना और अधिक समझदार स्कूल वातावरण को बढ़ावा देना है।” (With PTI Input)

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