उत्तर प्रदेशराज्यलखनऊ

टास सर्वे में जौनपुर व महोबा का प्रदर्शन बेहतर

  • बुधवार को समीक्षा बैठक में राज्य फाइलेरिया अधिकारी ने सभी 13 जिलों के प्रदर्शन पर जताया संतोष
  • मई में इन जिलों में चलाया गया था सर्वे

लखनऊ। राष्ट्रीय फाइलेरिया उन्मूलन कार्यक्रम के तहत बीते मई महीने में प्रदेश के 13 जनपदों में हुए ट्रांसमिशन असेसमेंट सर्वे (टास) में जनपदों का प्रदर्शन संतोषजनक रहा। जौनपुर और महोबा ने बेहतर काम किया है। शाहजहांपुर, बलिया और चित्रकूट का प्रदर्शन औसत से कम रहा। बुधवार को संस्था सी-कैंप के सहयोग से स्थानीय होटल में हुई समीक्षा बैठक में ये नतीजे सामने आए।

राज्य फाइलेरिया अधिकारी डॉ. ए.के. चौधरी ने बताया कि स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के नेतृत्व में राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम के तत्वाधान में वर्ष 2027 तक फाइलेरिया उन्मूलन के लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए मई में 13 जनपदों के 118 ब्लॉकों में टास-1 सर्वे किया गया। इसमें 72 इवैल्यूएशन यूनिट (ईयू) में से 55 ईयू सफल रहे, यानी कुल 77 प्रतिशत ईयू पास हुए हैं। इन क्षेत्रों में अब दो साल बाद टास-2 कराया जाएगा। गौरतलब है कि टास-1 सर्वे अम्बेडकरनगर, अयोध्या, बलिया, भदोही, चित्रकूट, हमीरपुर, जालौन, जौनपुर, मऊ, महोबा, शाहजहांपुर, पीलीभीत और सोनभद्र में हुआ था।

डॉ. चौधरी ने बताया कि जिन गांवों में नाइट ब्लड सर्वे, टास तथा यूनिफाइड डिजीज सर्विलांस पोर्टल (यूडीएसपी) के माध्यम से माइक्रोस्कोपी द्वारा अधिक फाइलेरिया मरीज चिन्हित हुए हैं, वहां एक माह के भीतर फोकस सर्वजन दवा सेवन (एमडीए) अभियान चलाया जाएगा। इसके तहत लोगों को फाइलेरियारोधी दवाएं खिलाईं जाएंगी ताकि संक्रमण के प्रसार को रोका जा सके।

राज्य फाइलेरिया अधिकारी ने टास की प्रक्रिया सफलतापूर्वक कराने के लिए जिलास्तरीय अधिकारियों, स्वास्थ्य कर्मियों, ग्राम प्रधानों, कोटेदारों और अन्य स्थानीय नेतृत्व की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सभी की सराहना की। इसके साथ ही चिन्हित फाइलेरिया मरीजों को उपचार और देखभाल की सेवा सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए।

गेट्स फाउंडेशन के संचारी रोग एवं वैक्सीन डिलीवरी के उपनिदेशक डॉ. भूपेंद्र त्रिपाठी ने बताया कि जिन ईयू में टास-1 पास नहीं हो पाया, उसका प्रमुख कारण यह रहा कि वहां सर्वजन दवा सेवन अभियान में लोगों की भागीदारी कम रही। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि अगले एमडीए अभियान में सभी लोगों को दवा सेवन सुनिश्चित कराना होगा। उन्होंने संक्रमण की रोकथाम के लिए वेक्टर कंट्रोल और वेक्टर मैनेजमेंट पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर जोर दिया। साथ ही दवा प्रदाताओं को प्रशिक्षण के दौरान दवाओं के लाभों की विस्तृत जानकारी दी जानी चाहिए, जिससे वे लाभार्थियों को बेहतर तरीके से समझाकर दवा सेवन सुनिश्चित कर सकें।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के डॉ. तनुज ने सर्वेक्षण की तकनीकी प्रक्रिया के बारे में विस्तृत जानकारी दी। इस अवसर पर संबंधित 13 जनपदों के नोडल अधिकारी, जिला मलेरिया अधिकारी एवं सहयोगी संस्था डब्ल्यूएचओ, पाथ, सीफार, जीएचएस और पीसीआई के प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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