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अब बिना सर्जरी संभव लीवर और ब्रेस्ट ट्यूमर का इलाज: PGI में ‘क्रायोएब्लेशन’ तकनीक शुरू, स्ट्रोक का भी नॉन-सर्जिकल उपचार

गंभीर बीमारियों के इलाज में अब बड़ी सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ेगी। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के विशेषज्ञों ने लीवर और स्तन (ब्रेस्ट) के ट्यूमर सहित ब्रेन स्ट्रोक जैसी जटिल समस्याओं के लिए नई तकनीकों का उपयोग शुरू कर दिया है। ये तकनीक न केवल बेहद सुरक्षित हैं, बल्कि कम दर्द, तेज रिकवरी और कम खर्च में इलाज संभव बनाती हैं। ये जानकारी संस्थान में आयोजित तीन दिवसीय सेरकॉन 2025 सम्मेलन में विशेषज्ञों ने गई। सम्मेलन में देश विदेश के 500 से अधिक विशेषज्ञ शामिल हुए।

रेडियोलॉजी विभाग की प्रमुख प्रो अर्चना गुप्ता ने बताया कि अब ‘क्रायोएब्लेशन’ तकनीक से लीवर और ब्रेस्ट के ट्यूमर का इलाज किया जा सकता है। यह एक मिनिमल इनवेसिव तकनीक है, जिसमें बड़ी सर्जरी की जरूरत नहीं पड़ती। यह तकनीक बुजुर्गों और ऑपरेशन के लिए फिट न हो सकने वाले मरीजों के लिए बेहद कारगर साबित हो रही है। इससे कम दर्द, कम रक्तस्राव, जल्दी रिकवरी और दवाओं की कम जरूरत होती है।

ब्रेन स्ट्रोक में नई उम्मीद है न्यूरो इंटरवेंशन

पीजीआई के न्यूरो इंटरवेंशन विशेषज्ञ प्रो विवेक सिंह ने बताया कि ब्रेन स्ट्रोक, ब्रेन ब्लीड और मस्तिष्क की रक्तवाहिनियों की सूजन (एन्यूरिज्म) जैसी स्थितियों का इलाज अब बिना ओपन सर्जरी के संभव हो गया है। वहीं डॉ. अनुराधा सिंह ने बताया कि अब डॉक्टरों को सिमुलेटर आधारित प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है ताकि वे आपातकालीन परिस्थितियों में बेहतर निर्णय ले सकें।

अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों ने सराहा

पीजीआई में आयोजित आपातकालीन रेडियोलॉजी सोसाइटी (सेरकॉन-2025) के सम्मेलन में अमेरिका, कनाडा और थाईलैंड से आए विशेषज्ञों ने भी हिस्सा लिया और बताया कि कैसे रेडियोलॉजी तकनीक ने दुनियाभर में इलाज की तस्वीर बदल दी है। इस मौके पर संस्थान के निदेशक डॉ. आरके धीमन ने कहा इंटरवेंशनल रेडियोलॉजी आज के समय में एक सुरक्षित, दर्द रहित और प्रभावी विकल्प बन चुकी है, जिससे मरीजों को जल्दी आराम और बेहतर परिणाम मिल रहे हैं।

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