गीता जयंती के उपलक्ष्य में रामकृष्ण मठ, लखनऊ के एक दिवसीय कार्यक्रम सम्पन्न

- लखनऊ की विलक्षण प्रतिभा की धनी व अद्भूद बालिका अर्यमा शुक्ला ने गीता आरती कर किया हतप्रभ।
- गीता जयंती के अवसर पर रामकृष्ण मठ, निराला नगर, लखनऊ में एक दिवसीय कार्यक्रम का आयोजन बडे़ भव्यता एवं धूमधाम से मानाया गयl.
- कार्यक्रम की शुरूआत प्रातः शंखनाद व मंगल आरती के साथ हुई सुबह स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज द्वारा (ऑनलाइन) सत् प्रसंग हुआ।
लखनऊ: रामकृष्ण मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने बताया कि मोक्षदा एकादशी के दिन ही गीता जयंती भी मनाई जाती है, जोकि सनातन धर्म का विशेष पर्व है. कहा जाता है कि मोक्षदा एकादशी के दिन श्रीकृष्ण ने अर्जुन को गीता के उपदेश देकर जीवन की सच्चाई से रूबरु कराया था। उसे ही भगवत गीता कहा जाता है. पौराणिक और धार्मिक मान्यता के अनुसार जिस दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अर्जुन को उपदेश दिए थे, उस दिन मार्गशीर्ष महीने की एकादशी तिथि थी। मार्गशीर्ष या अगहन एकादशी पर श्रीकृष्ण के उपदेश देने के कारण इसी दिन को गीता का जन्म का दिन माना जाता है और हर साल इसी दिन गीता जयंती मनाई जाती है.गीता का जन्म स्वयं श्रीकृष्ण ने मुख से हुआ है, क्योंकि इसके हर श्लोक भगवान श्रीकृष्ण ने मुख से निकले हैं. गीता को श्रीमद्भगवद्गीता और गीतोपदेश नाम से भी जाना जाता है। मार्गशीर्ष एकादशी पर इसलिए भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा करनी चाहिए साथ ही इस दिन गीता का पाठ भी जरूर करना चाहिए।
सायंकाल संध्याआरती के उपरान्त रामनाम संर्कीतन हुआ तथा त्रिवेणी नगर, लखनऊ की आठ साल की अदभुत बालिका अर्यमा शुक्ला जो सिटी मांटेसरी स्कूल, अलीगंज की छात्रा है ने गीता आरती पर बडे ही मनोरम और सुन्दर प्रस्तुति दी जिसमें उन्होंने अपने बालमुख से भगवत गीता व उनके उपदेशों की प्रसंसा में लयबद्ध तरिके से गाकर प्रसंसा की। भगवतगीता एक हिन्दू धार्मिक ग्रन्थ है जो महाभारत महाकाव्य को एक हिस्सा है जो कर्म के रास्ते को निर्देशित करने का कार्य करती है साथ ही साथ अध्यात्मिक ज्ञान व भगवान के प्रति भक्ति बढ़ाने में महत्वपूर्ण योगदान भी देता है इतने दार्शनिक ग्रन्थ का अक्षरः शुद्ध उच्चारण में बिना देखे पाठ करने का काम अद्भूद बालिका ने बडे ही सुन्दर और मनोरम तरीके से किया जिसे वास्तविकता में विश्वास करना असंभव है।
अर्यमा शुक्ला को उत्तर प्रदेश की राज्यपाल श्रीमती आनंदी बेन पटेल ने उनकी इस प्रतिभा देखकर उनको आपना आशीर्वाद भी दिया है। मठ के अध्यक्ष स्वामी मुक्तिनाथानन्द महाराज ने नन्ही प्रतिभाशाली अदभुद बालिका की भूरि-भूरि प्रसंसा की उन्होंने यह भी कहा कि यह नन्ही बालिका संस्कृत जैसे कठिन भाषा को इतनी सहजता और मधुरता के साथ उच्चारित करती है जो अविशमर्णिय है साथ ही साथ यह भी बताया कि निश्चित रूप से इस बालिका पर मॉ सारदा के आर्शिवाद से पूर्ण रूप से अर्शिवादित है। यह बालिका अध्यात्म के क्षेत्र में सर्वोच्च शिखर पर जरूर पहुॅचेगी तदोपरान्त गीता आरती की गयी। कार्यक्रम के अन्त में उपस्थित सभी भक्तों के मध्य प्रसाद वितरण के साथ कार्यक्रम समाप्त हुआ।



