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माफिया मुख्तार के मुखबिर की तलाश में जुटी पुलिस, डीजी जेल ने दिए जांच के निर्देश

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के बांदा जेल में बंद माफिया मुख्तार अंसारी की लखनऊ में पेशी के दौरान लीक हुई जानकारी के मामले की जेल विभाग ने जांच शुरू कर दी गई है. जेल महानिदेशक ने जेल में हर-हर गतिविधि की जानकारी बाहर आने पर एक जांच कमेटी गठित की है, जिसे 7 दिन के भीतर रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए हैं. बीते 28 मार्च की सुबह मुख्तार अंसारी को राजधानी लखनऊ के एमपी-एमएलए कोर्ट में साल 2000 में कारापाल और उप कारापाल पर हमला, जेल में पथराव और जानमाल की धमकी देने के एक मामले में पेशी के लिए लाया गया था.

उस दौरान मुख्तार के जेल से निकलने से पहले ही उसके बेटे अब्बास अंसारी ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी थी कि मुख्तार अंसारी का मेडिकल रद्द कराकर उन्हें लखनऊ लाया जा रहा है. यही नहीं स्थानीय पत्रकारों को भी हर सूचना मिल रही थी. ऐसे में यह सवाल उठता है कि जेल के अंदर की सूचना कौन बाहर दे रहा था.

जेल महानिदेशक आनंद कुमार ने बताया कि कुछ लोगों ने ये सवाल उठाए हैं कि आखिरकार मुख्तार को बंदा जेल से लखनऊ लाया जा रहा था तो ये सूचना बाहर कैसे आई. इस मामले में डीआईजी रैंक के अधिकारी को मामले की जांच दी गई है. उन्हें 7 दिन के भीतर पूरे मामले की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं.

खंगाले जा रहे CCTV फुटेज: वहीं, बांदा जेल में आधी रात के बाद मुख्तार अंसारी को बाहर ले जाने की हर जानकारी उसके लोगों तक पहुंच रही थी. इसको लेकर जेल के अंदर लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज और मोबाइल के सहारे उस व्यक्ति की तलाश तेज कर दी गई है. जिसने पल-पल की सूचना दी थी.

मुख्तार के काफिले में कैसे जुड़े लोग: मुख्तार को बांदा जेल से लखनऊ में पेशी पर लाए जाने की सूचना उसके लोगों तक पहुंची तो उसके लोग बांदा से लखनऊ तक काफिले के साथ चलने लगे थे. बांदा से लखनऊ तक मुख्तार के गुर्गों की एक दर्जन गाड़ियां पुलिस व एम्बुलेंस के पीछे-पीछे चली थीं. जिससे सुरक्षा की समस्या खड़ी हुई थी.

वहीं, माफिया डॉन मुख्तार अंसारी ने न्यायालय में बताया कि उसकी जान को खतरा है और बांदा जेल में उन्हें उचित चिकित्सकीय व अन्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं कराई जा रही हैं. मुख्तार अंसारी ने बीते दिन लखनऊ न्यायालय में पेशी के दौरान अपनी बात रखते हुए कहा था कि संबंधित मामले में आगे की सुनवाई बांदा जेल से ही वीडियो कॉन्फेंसिंग के माध्यम से की जाए. हालांकि न्यायालय ने मुख्तार अंसारी की इस मांग को सिरे से खारिज कर दिया था.

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