उत्तर प्रदेशसिद्धार्थनगर

गुनाहों से तौबा इबादत और दुआए मगफिरत में गुजरी शबे बरात की रात

साजिद अली


सिद्धार्थनगर। दिन में रोज़ा रखकर और रात ने इबादत, कुरआन की तिलावत और ज्यादा से ज्यादा नफली नमाज अदा कर गुनाहों से तौबा और मगफिरत के लिए लोगों ने दुआ मांगी। और रात के वक्त कब्रिस्तान पर जाकर मरहूमीन बखशिश और मगफिरत के लिए लोगों ने हाथ उठा कर दुआ मांगी। कब्रिस्तान सारी रात रौशनी से मुनव्वर रहे। साफ सफाई के माकूल बदोबस्त रहे। पूरे अकीदत के साथ लोगो ने गुजारी शबे बरात की रात।

अरबी महीना, शाबान की पंद्रहवी रात को शबे बरात कहा जाता है। शब के माने रात, और बरात के माने बरी होना, निजात पाना, और गुनाहों से तौबा और कतए ताल्लुक होने की रात मानी जाती है। इसीलिए इस इस रात में मुसलमान ज्यादा से ज्यादा इबादत, कुरआन की तिलावत और गुनाहों से तौबा और कतए ताल्लुक अख्तियार करते हैं। और इस बाबरकत रात में अल्लाह की रहमत से बेशुमार मुसलमान जहन्नम से निजात पाते हैं। इसलिए इस रात को शबे बरात कहते हैं।

अरबी महीना रमजानुलमुबारक के आखरी दिनों में पड़ने वाली लैलतुलकद्र की रात के बाद शाबान की इस पंद्रहवीं रात से अफजल कोई रात नहीं होती है । इस रात में अल्लाह बंदों के दुआओं को कुबूल करता है, और सारे गुनाहों को बख्श देता है। इस रात में अल्लाह की तरफ से मुनादी होती है, कि है कोई बंदा मगफिरत तलब करने वाला कि मैं उसे बख्श दूं, कोई रोजी मांगने वाला कि मैं उसे रिज्क अता करूं। है कोई मुसीबतजदा कि मैं उसे मुसीबत से निजात दूं, यह ऐलान सूरज निकलने से पहले फज्र की नमाज तक होती है। जो लोग इस रात को दुआएं मांगते है सब कुबूल होती है।

मुसलमानों के आखरी नबी हजरत मुहम्मद सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम इस रात को इबादत में गुजारते थे, सारी रात लोगों के हक में दुआए मगफिरत के लिए आंसू बहाते, रात की तारीकी में कब्रिस्तान पर जाकर मय्यत के मगफिरत और उनके गुनाहों से निजात के लिए दुआएं मांगा करते थे। रोजा रखा करते थे। इसलिए मुसलमानों ने शबे कद्र की रात को मस्जिदों में इबादत करके, ज्यादा से ज्यादा कुरआन की तिलावत और नफली नमाज अदा करने के अलावा कब्रों पर जाकर मुर्दों के हक में दुआएं मांगी। कब्रिस्तानों पर साफ सफाई और रौशनी के इंतजाम किए गए थे। सारी रात कब्रिस्तान रौशनी से जगमगाता रहा। और पूरे अकीदत के साथ लोगो ने गुजारी शबे बरात की रात।

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