बेजुबानों की जान से खेलने वालों के खिलाफ दी गई तहरीर… पुलिस ने शुरू की कथित एनजीओ व इसमें शामिल लोगों की जांच

जिलाधिकारी विशाख जी के निर्देश पर पशुओं की जान से खिलवाड़ करने वालों के खिलाफ शुक्रवार को मुख्य पशु चिकित्साधिकारी डॉ. सुरेश कुमार ने गाजीपुर थाने में तहरीर दे दी है। पुलिस ने कथित एनजीओ और उनके साथ काम करने वालों लोगों की जांच शुरू कर दी है।
”अमृत विचार” ने निराश्रित घायल, बीमार व लाचार पशुओं की मदद के नाम पर चल रहे कई बिना मानक एनजीओ के खिलाफ मुद्दा उठाया था। इनके द्वारा नगर व ग्रामीण इलाकों में अस्पताल की तर्ज पर बिना मानक शेल्टर होम संचालित किए गए हैं। जहां घायल पशुओं को लाकर स्वयं या फिर झोलाझाप से इलाज कराकर उनकी जान से खिलवाड़ करते हैं।
उपचार और संरक्षण के नाम पर सोशल मीडिया से रुपये इक्ट्ठा करते हैं। इनके पास सिर्फ एनजीओ का पंजीयन है, जबकि उपचार करने की अनुमति नहीं है। न ही किसी तरह के मानक पूरे हैं। पंजीकृत चिकित्सक सिर्फ कागजों में दर्ज करा रखे हैं। फिलहाल पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
पशुओं के मरने तक भावुक होकर मांगते रुपये
कथित एनजीओ संचालकों ने क्षेत्रों में अपने वालंटियर बना रखे हैं। जो घायल पशुओं की सूचना देते हैं। वहीं, कुछ ऐसे लोग हैं, जो जिनके पास न एनजीओ है न ही कोई संसाधन। फिर भी यह लोग सड़क पर घायल गोवंश व अन्य पशुओं का फोटो व वीडियो बनाकर उपचार व शेल्टर होम में भेजने के लिए सोशल मीडिया में वायरल करके रुपये मांगते हैं, लेकिन न उपचार कराते न ही भिजवाते हैं। बल्कि तड़पाते और मरने पर अंतिम संस्कार के नाम पर भावुक कर रुपये मांगते हैं।
राजधानी समेत आसपास जिलों में फैला नेटवर्क
स्थानीय व्यक्ति की सूचना पर पशुओं का पशु चिकित्सक उपचार करने पहुंचते हैं या नगर निगम रेस्क्यू करता है तो यह लोग स्थानीय लोगों को भड़काकर विरोध करके वापस कर देते हैं। इन सभी के क्षेत्रवार लोग तैनात हैं। पूरा खेल व्हाट्सएप ग्रुपों पर फोटो, वीडियो और वाइस मैसेज से चलता है। इनका नेटवर्क लखनऊ समेत आसपास जिलों में फैला है। वहां भी बिना मानक संचालित शेल्टर होम पर घायल पशुओं को ठेके पर रुपये तय करके भेजा जाता है। एनजीओ ने बाकायदा ट्रांसपोर्टरों के नाम व मोबाइल नंबर की लिस्ट बना रखी है।



