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योगी सरकार की नई नीति से UP में चमकेगा फुटवियर-लेदर उद्योग, मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड को मिलेगा विशेष लाभ

लखनऊ। उत्तर प्रदेश फुटवियर, लेदर और नॉन-लेदर क्षेत्र विकास नीति 2025 का सबसे बड़ा फोकस प्रदेश के अपेक्षाकृत पिछड़े क्षेत्रों मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड पर है। राज्य सरकार ने इन इलाकों में उद्योगों को प्रोत्साहन देने के लिए भूमि लागत अनुदान और पूंजीगत सब्सिडी में विशेष रियायतें दी हैं। इसका सीधा असर यहां के औद्योगिक विकास, रोजगार और निवेश पर पड़ेगा।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का स्पष्ट विजन है कि औद्योगिक विकास केवल पश्चिमी यूपी तक सीमित न रहे, बल्कि पूर्वी यूपी और बुंदेलखंड भी देश-विदेश में औद्योगिक मानचित्र पर अपनी अलग पहचान बनाएं। नई नीति इसी विज़न को आगे बढ़ाने का ठोस कदम है। नीति के तहत, स्टैंड अलोन फुटवियर, लेदर उत्पाद और मशीनरी इकाइयों को मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड में 35 प्रतिशत तक भूमि लागत अनुदान मिलेगा, जबकि पश्चिमांचल क्षेत्र में यह 25 प्रतिशत होगा।

वहीं, मेगा एंकर यूनिट और क्लस्टर को इन क्षेत्रों में 80 प्रतिशत तक भूमि लागत अनुदान का लाभ मिलेगा, पश्चिमांचल के लिए यह 75 प्रतिशत होगा । यह लाभ विशेष रूप से इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इन इलाकों में उद्योगों की स्थापना की लागत अपेक्षाकृत अधिक मानी जाती है। भूमि सब्सिडी का फायदा सिर्फ उसी जमीन पर मिलेगा जो औद्योगिक प्राधिकरण, राज्य सरकार के संस्थान या इस नीति के तहत बने क्लस्टर से ली गई हो।

सब्सिडी की रकम जमीन के वास्तविक आवंटन मूल्य पर तय होगी, लेकिन इसमें स्टांप ड्यूटी और रजिस्ट्रेशन फीस नहीं जोड़ी जाएगी। अगर कोई इकाई भूमि सब्सिडी लेती है, तो आगे मिलने वाली पूंजीगत सब्सिडी की गणना करते समय जमीन की कीमत नहीं गिनी जाएगी।

लेदर और फुटवियर बनाने वाली कंपनियों को ज्यादा फायदा देने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार, केंद्र सरकार की मदद के अलावा अतिरिक्त पूंजी निवेश सब्सिडी भी देगी। इसके तहत, स्टैंड अलोन इकाइयों को मध्यांचल, पूर्वांचल और बुंदेलखंड में 30% पूंजीगत सब्सिडी, अधिकतम 45 करोड़ (5 वर्षों में) मिलेगी। पश्चिमांचल के लिए यह 20 प्रतिशत और अधिकतम 30 करोड़ रुपए (5 वर्षों) तक का लाभ मिलेगा।

इसी तरह, एलाइड लेदर यूनिट को पूरे प्रदेश में 25 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी मिलेगी, लेकिन इन क्षेत्रों में इसे और ज्यादा प्राथमिकता दी जाएगी। मेगा एंकर यूनिट और क्लस्टर को यहां 35 प्रतिशत पूंजीगत सब्सिडी, अधिकतम 700 करोड़ रुपए (5 वर्षों में) तक मिलेगी। एक इकाई को सालाना 140 करोड़ रुपए से अधिक लाभ नहीं मिलेगा। वहीं, पश्चिमांचल के लिए यह लाभ 120 करोड़ रुपए सालाना होगा।

योगी सरकार का लक्ष्य इन क्षेत्रों को नए निवेश और उद्योगों का गढ़ बनाना है। राजधानी लखनऊ समेत कानपुर, गोरखपुर, वाराणसी, प्रयागराज, झांसी, चित्रकूट, आजमगढ़ और बांदा जैसे जिलों को इसका सीधा लाभ मिलेगा। इस नीति से जहां एक ओर स्थानीय स्तर पर लाखों युवाओं को रोजगार मिलेगा, वहीं दूसरी ओर प्रदेश की वैश्विक पहचान फुटवियर और लेदर उत्पादों के प्रमुख निर्यातक के रूप में बनेगी।

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