उत्तर प्रदेशलखनऊ

सभी भवनों में गोबर से निर्मित पेंट का प्रयोग करें: मंत्री

25 मई तक भूसा प्रबंधन का कार्य पूरा किया जाए

  • प्रमुख सचिव के. रविन्द्र नायक बोले गोआश्रय स्थलों पर सभी व्यवस्थाएं होंगी

लखनऊ। प्रदेश के पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने अधिकारियों को निर्देशित करते हुए कहा है 25 मई तक भूसा प्रबंधन का कार्य पूरा किया जाए। पूरे वर्ष गौशालाओं में चारे भूसे की कमी न हो। पशुधन विभाग के सभी भवनों में गोबर से निर्मित पेंट का प्रयोग किया जाए। जनपद बदायूं में गो पेंट हेतु किए जा रहे कार्यों को मॉडल बनाकर गौ पेंट प्लांट्स की इकाइयां सभी जनपदों में लगाने की कार्ययोजना तैयार की जाए।

 पशु चिकित्सा अधिकारी सप्ताह में एक बार अनिवार्य रूप से गौशालाओं का निरीक्षण कर आवश्यक व्यवस्था को जांचे परखे और कमी पाए जाने पर उसको दूर करें। गोआश्रय स्थलों में गोवंश को धूप ,लू से सुरक्षित रखा जाए,भूसा, हरा चारा, चोकर, पानी, विद्युत एवं औषधियों आदि की पर्याप्त व्यवस्था की जाए।

कोई भी गोवंश भूखा प्यास न पाया जाए साथ ही बेहतर व्यवस्था वाले गोआश्रय स्थलों को सम्मानित किया जाए। सिंह ने मंगलवार को विधान भवन स्थित अपने कार्यालय कक्ष में भूसा प्रबंधन, निराश्रित गोवंश संरक्षण, गोशालाओं का रख-रखाव, पशुओं को हरा चारा, पानी, भूसा तथा चारागाह भूमि को कब्जामुक्त कराकर हरे चारे की बुआई की समीक्षा कर रहे थे। कहा कि विभागीय योजनाओं एवं कार्यक्रम के लक्ष्यों की शत-प्रतिशत पूर्ति की जाए और गुणात्मक सुधार सुनिश्चित किया जाए। प्रदेश की सभी गौशालाओं में सीसीटीवी लगाने के लिए आवश्यक कार्ययोजना तैयार कर शीघ्र कैमरे लगवाए जाए।

श्री सिंह ने निर्देश दिए कि पशुओं हेतु उपलब्ध कराई जाने वाली दवाओं और वैक्सीन की गुणवत्ता से किसी भी प्रकार का समझौता ना किया जाए। पशुओं के उत्तम स्वास्थ्य और पौष्टिक चारे के आधार पर ही दुग्ध विकास कार्यक्रमों और नस्ल सुधार व कृत्रिम गभार्धान के लक्ष्यों को पूर्ण व सफल बनाया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मण्डल एवं जनपद स्तर पर आयोजित होने वाले पशु मेलों को और अधिक उपयोगी व सार्थक बनाया जाए। किसानों एवं अच्छे पशुपालको को प्रोत्साहित करते हुए पुरस्कृत किया जाए। सभी मुख्य पशु चिकित्सा अधिकारी स्थानीय प्रशासन के सहयोग से चारागाह की भूमि को कब्जामुक्त कराए और उस पर गोवंश हेतु उपयोगी चारा बुआई का कार्य कराए।

श्री सिंह ने कहा कि गोवंश के माध्यम से प्राकृतिक खेती को बढ़ावा दिया जाए। गो आश्रय स्थलों में केयर टेकर की तैनाती कर समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जाए। केयर टेकर रात्रि में गोआश्रय स्थल पर ही रूके और आवश्यक कार्य सुचारू रूप से पूरा करे।  मुख्यमंत्री सहभागिता योजना के तहत गरीब परिवारों को गाय उपलब्ध कराई जाए और अन्य लघु पशु योजनाओं का लाभ लेने के लिए भी उन्हें प्रोत्साहित किया जाए।

बैठक में जानकारी दी गई कि वर्तमान में प्रदेश के 7,697 गो आश्रय स्थलों में  12.50 लाख गोवंश संरक्षित हैं। बैठक में पशुधन विभाग के प्रमुख सचिव के. रविन्द्र नायक ने कहा कि गोआश्रय स्थलों पर सभी व्यवस्थाएं सुनिश्चित की जायेगी और उन्हें आत्मनिर्भर बनाया जाएगा।

बैठक में पशुधन विभाग के विशेष सचिव देवेन्द्र पाण्डेय, पशुधन विभाग के निदेशक प्रशासन एवं विकास डॉ0 जयकेश पाण्डेय, निदेशक रोग नियंत्रण एवं प्रक्षेत्र, डॉ योगेंद्र पवार,यूपीएलडीबी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ पीके सिंह सहित शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।

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