उत्तर प्रदेशराज्यलखनऊ

सूडान गुरुंग कौन हैं? जिनके नेतृत्व में नेपाली युवा सड़कों पर उतरे, पीएम ओली को देना पड़ गया इस्तीफा

नेपाल में सोशल मीडिया पर प्रतिबंध और भ्रष्टाचार के आरोपों ने युवाओं को सड़कों पर ला दिया। इस आंदोलन को जेन-जेड आंदोलन कहा गया, क्योंकि इसमें ज्यादातर 1997 से 2012 के बीच जन्मे युवा शामिल थे। 8 सितंबर को सुबह 10 बजे से ही प्रदर्शनकारी जुटने लगे और दोपहर तक संसद भवन तक पहुंच गए। प्रदर्शन हिंसक हो गया, जिसमें पुलिस की गोलीबारी में लगभग 20 लोगों की मौत हो गई और सैकड़ों घायल हो गए। इसके बाद सरकार को झुकना पड़ा, गृह मंत्री ने इस्तीफा दे दिया और सोशल मीडिया से प्रतिबंध हटा लिया गया। सवाल उठता है कि इस आंदोलन का नेतृत्व किसने किया?

4 सितंबर को नेपाल सरकार ने फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप, यूट्यूब और एक्स जैसे 26 सोशल मीडिया प्लेटफॉर्मों पर प्रतिबंध लगा दिया था, क्योंकि इन कंपनियों ने सरकार के रजिस्ट्रेशन आदेश का पालन नहीं किया। इस फैसले से युवा भड़क उठे और सड़कों पर उतर आए। इस विरोध का नेतृत्व 36 वर्षीय सूडान गुरुंग ने किया।

सूडान गुरुंग कौन हैं?

सूडान गुरुंग एक सामाजिक कार्यकर्ता और जमीनी स्तर के जुड़ें हुए नेता हैं। साल 2015 में नेपाल में आए विनाशकारी भूकंप के बाद उन्होंने “हामी नेपाल” नामक एक युवा गैर-सरकारी संगठन की स्थापना की और इसके अध्यक्ष बन गए। खबरों के अनुसार, भूकंप में सूडान ने अपने बच्चे को खो दिया था, जिसके बाद उन्होंने अपनी जिंदगी समाजसेवा और आपदा राहत कार्यों को समर्पित कर दी। पहले वह इवेंट मैनेजमेंट का काम करते थे, लेकिन भूकंप के बाद उनका ध्यान सामाजिक कार्यों की ओर गया।

सूडान ने कई बार भ्रष्टाचार और पारदर्शिता जैसे मुद्दों पर प्रदर्शन किए हैं। धीरे-धीरे उन्हें युवाओं का व्यापक समर्थन मिला और अब वह जेन-जेड के आंदोलन का नेतृत्व कर रहे हैं। हजारों युवा, स्कूल यूनिफॉर्म और किताबों के साथ सड़कों पर उतरे, और उन्होंने सोशल मीडिया प्रतिबंध हटाने की मांग की।

हालात बिगड़ने पर सरकार को कदम पीछे खींचने पड़े। आपातकालीन बैठक में सोशल मीडिया प्रतिबंध हटाने का फैसला लिया गया और गृह मंत्री रमेश लेखक ने इस्तीफा दे दिया। लेकिन आंदोलन यहीं नहीं रुका। 9 सितंबर को भी प्रदर्शन जारी रहे, और अब प्रधानमंत्री के.पी. शर्मा ओली के बाद लोग शांत हुए हैं।

काठमांडू में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हिंसक झड़प में कम से कम 20 लोगों की मौत हुई और 300 से अधिक घायल हुए। हिंसा के बाद सेना को संसद के आसपास तैनात किया गया। प्रधानमंत्री ने हिंसा के लिए “बाहरी घुसपैठ” को जिम्मेदार ठहराया, जबकि संचार मंत्री पृथ्वी सुब्बा गुरुंग ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म बहाल करने की घोषणा की।

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