अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने पर साहित्यकारों ने की बात

- गोमती नगर स्थित शेरोस कैफे आयोजित हुआ उत्सव
लखनऊ। कलामंथन की ओर स संचालित दो दिवसीय ’मंथन’ साहित्य उत्सव के प्रारंभ के साथ ही संस्कृतिक लेखन की महत्ता से शुरुआत हुई। सभी कवियों व साहित्यकारों ने गोमतीनगर स्थित शेरोस कैफे में आयोजित इस साहित्य समारोह में शामिल होकर अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने की बात कही। उत्सव के दूसरे व अंतिम दिन परिचर्चा, कविता पाठ व मुशायरा हुआ।
इस समारोह की शुरुआत कलामंथन की पल्लवी राज के अलंकारित भाषण से हुई, जिन्होंने कलामंथन में सभी अतिथियों का स्वागत किया। इस परिचर्चा में भाग लेने वाले प्रमुख वक्ताओं ने जीवन के भावों को मातृभाषा हिंदी में व्यक्त किया और बाद में एक ओपन माइक सत्र में दीपाली ने महिला सशक्तिकरण के विषय पर, ज्योत्स्ना मंथन के विषय पर, मौसमी आर्या ने नए प्रेम के भाव पर व पल्लवी अमित ने शीर्षक’ ध्रुवतारा’ से अपने जीवन के तथ्य को कविताओं की पंक्तियों में श्रोताओं तक पहुंचाया।
लखनऊ पब्लिक कालेज आॅफ प्रोफेसनल स्टडीज के विद्यार्थियों ने भी अपने शब्दों से मंत्रमुग्ध कराया, जिसमें से दिव्या सिंह ने कोरोनावायरस के दौर पर कविता सुनाई, शशांक अवस्थी ने 80 के दशक में पनप रहें बनारस घाट के प्रेम प्रसंग प्रस्तुत कर सभी दर्शकों का ध्यान अपनी मनोविकार की ओर केंद्रित कर दिया।
कथाकार ऋषिकेश सुलभ ने अपनी पुस्तक “दातापीर” पर चर्चा करते हुए ’हाशिए के समाज का साहित्य में चित्रण’ पर अपने विचार व्यक्त किए । आप में बताया की ऐसा नहीं है की हाशिए समाज के साहित्य कर अधिक काम नहीं हुआ है । काम बहुत हुआ है परंतु आलोचना नहीं हुई है । अपनी कहानी के नायक दाता पीर के बारे में बताते है की “ वह पीर कुरान पढ़ कर नहीं बने हैं वह इश्क में पीर बने हैं ।
’सरहद , सैनिक और साहित्य’ विषय पर कर्नल सलिल जैन , कर्नल संदीप सेनी और रामा शर्मा ने अपने विचार व्यक्त किया । कर्नल सलिल जैन ने अपनी कविता ’सरहद की होली’ से दर्शकों का दिल जीत लिया । संदीप ने इतिहास पन्नो से सैनिक जीवन प्रसंग बताये । मेजर रमा ने हिंदी सिनमा में सेना के चित्रण पर विचार व्यक्त किए ।
समारोह में शामिल कलाकरों को हिंदी साहित्य में योगदान के लिए कहानीकार रूपा सिंह, टिप्पणीकार अरून सिंह, पल्लवी राज, दिव्या सिंह, शशांक अवस्थी, ज्योत्स्ना , एवं किरन सुक्ला को तन्या और डॉ तपस्वी ने पुरस्कार देकर सम्मानित किया। सत्रों में सत्य व्यास और व्योमेश शुक्ल से बातचीत कलामंथन के क्रिएटिव हेड बासब चंदना ने की। दिव्य प्रकाश दुबे के सत्र में फिल्म में स्वाद लेखन पर सार्थक चर्चा हुई। शाम के मुशायरे में दिल्ली हापुड़ और लखनऊ के शहरों ने शिरकत की।



