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स्वास्थ्य सुधार के क्षेत्र में आरोग्य भारती को नेतृत्व देना चाहिए : योगी

  • – आरोग्य भारती की अखिल भारतीय प्रतिनिधि मंडल की बैठक का शुभांरभ, सीएम योगी ने किया उद्घाटन
  • – केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने वर्चुअल और आरएसएस के सह सरकार्यवाह डाॅ. मनमोहन वैद्य ने मंच से प्रतिनिधियों को किया संबोधित

लखनऊ। ”मेरा स्वास्थ्य मेरी जिम्मेदारी” के सिद्धांत पर स्वास्थ्य सुधार के क्षेत्र में कार्य करने वाले संगठन ”आरोग्य भारती” के प्रतिनिधि मंडल की बैठक शनिवार को शुरू हुई। दो दिवसीय इस बैठक का उद्घाटन सीएम योगी आदित्यनाथ ने किया। केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया ने वर्चुअली और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह कार्यवाह डाॅ मनमोहन वैद्य ने मंच पर मौजूद रहकर 700 जिलों से आए प्रतिनिधियों को संबोधित किया।

एलडीए कालोनी कानपुर रोड स्थित सीएमएस ऑडिटोरियम में बैठक के उद्घाटन सत्र में सीएम योगी ने प्रतिनिधियों का अभिवादन करते हुए कहा कि आरोग्य भारती अखिल भारतीय स्तर पर सबको आरोग्य प्राप्त कराने के लिए विगत 20साल से कार्य कर रही है। सदी की सबसे बड़ी महामारी के दौरान स्वयंसेवकों की कार्यपद्धति को हम सबने करीब से महसूस किया है। कोरोना के दौरान आरोग्य भारती ने सरकार के साथ कदम से कदम मिलाकर बिना भेदभाव के सबको आरोग्य प्रदान करने के लिए कार्य किए। कोरोना काल में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े स्वयंसेवक, वैद्य, चिकित्सक सेवा भाव से जुटे रहे। प्रधानमंत्री के प्रबंधन, सरकारी मशीनरी के अलावा स्वयंसेवी संस्थाओं ने इस संकट के दौर में बहुत काम किया। कोरोना में भारत का परिणाम दूसरे देशों से बेहतर रहा।

आज भारत व राज्य सरकार चिकित्सा एवं स्वास्थ्य के क्षेत्र को और अधिक बेहतर बनाने का कार्य कर रही हैं। आरोग्य भारती भी इस दिशा में काफी कुछ और कर सकती है, आरोग्य भारती को नेतृत्व देना चाहिए। बैठक में देश के कई जिलों से आए संगठन से जुड़े प्रतिनिधियों और चिकित्सकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हम आधी बीमारी ”स्वच्छता और सतर्कता” से दूर कर सकते हैं। उन्होंने स्वयं का अनुभव बताते हुए कहा कि ”जब मैंने गोरखपुर में इंसेफेलाइटिस के खिलाफ स्वच्छता का अभियान शुरू करते हुए साबुन वितरण जैसे कार्य शुरू किए तो मेरे खिलाफ तीन दिन मीडिया ट्रायल चला कि गरीबी का अपमान हो रहा है, लेकिन मैंने हार नहीं मानी। वैक्सीन, इलाज सहित तमाम प्रयास किए जाते रहे। इसी का परिणाम रहा जहां बीते 40 बरसों में इस बीमारी से 50 हजार बच्चों की मौत हुई थी, आज यह बीमारी खत्म होने की ओर है।

उद्घाटन सत्र में आरोग्य भारती के राष्ट्रीय अध्यक्ष डाॅ राकेश पंडित ने सभी अतिथियों को ”गौ” रूपी स्मारिका भेंट करके अभिवादन किया। बैठक में केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री मनसुख मंडाविया वीडियो संबोधन दिखाया गया। इस वर्चुअल संबोधन में उन्होंने कहा कि सरकार स्वास्थ्य के क्षेत्र में बहुत तेजी से कार्य कर रही है। देश में 174 नए मेडिकल कॉलेज खोले जा रहे हैं। इसके अलावा एम्स की संख्या बढ़ाने के साथ डाॅक्टर और मेडिकल सीटों को बढ़ाया गया है।

ग्रेजुएट मेडिकल सीटें 45 हजार से बढ़कर 96 हजार हो चुकी हैं, जबकि पीजी सीटों में सात सालों के भीतर 29 हजार का इजाफा कर इसे 60 हजार के ऊपर पहुंचाया जा चुका है। प्रधानमंत्री जन-औषधि केंद्रों की चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि जैनेरिक दवाइयों को बढ़ावा देने का परिणाम यह है कि सस्ती दवाई के माध्यम से 15 हजार करोड़ रुपए अभी तक भारत के आम लोगों का बचा है। उन्होंने कहा कि आपातकाल में आज पूरी दुनिया हमारी तरफ देखती है। हमने कोरोना काल में 150 देशों को दवाई और वैक्सीन उपलब्ध कराई। पूरी दुनिया के लोगों को इलाज कराने और चिकित्सा के क्षेत्र में आज का भारत पसंद आने लगा है।

बैठक में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह कार्यवाह डाॅ मनमोहन मनमोहन वैद्य ने प्रतिनिधियों को जीवन के अनुभव और संस्मरणों से अवगत कराया। कहा कि अगर हममें एकता का भाव होगा, तो विविधता का भेद नहीं होगा। समाज संपन्न, समृद्ध बनता है तो समाज का हर व्यक्ति संपन्न, समृद्ध बनेगा। भारतीय पहचान को अगर हम सबके बीच में जगाते हैं तो जो विभाजनकारी ऊर्जा काम कर रही हैं। भेदभाव पैदा करके आपस में लड़ाने-भिड़ाने का कार्य कर रही हैं, वह सफल नहीं होंगे। भारतीय समाज की समृद्धि बताते हुए उन्होंने 1988 में गुजरात के सौराष्ट्र में पड़े अकाल के एक संस्मरण का जिक्र किया।

बताया कि उस दौरान जब लोग अकाल पीड़ितों को सामर्थ्य के अनुसार राहत सामग्री पहुंचा रहे थे, एक निर्धन सी दिखने वाली बुजुर्ग महिला एक खाद्य पदार्थ जिसे वहां ”सुखड़ी” कहा जाता है, मांग रही थी। लोगों ने उससे कहा कि ऐसे संकट के वक्त में आप वहां कुछ देने के बजाए मांग रही हैं, तो उसने अपनी साड़ी के पल्लू में से कुछ सुखड़ी निकालकर दीं, जो उसने भिक्षा में आटा मांगकर पीड़ितों को भेजने के लिए बनाई थीं। यानी वो महिला खुद के बजाए सूखा पीड़ितों की सहायता के लिए भिक्षा ले रही थी। ऐसी महान भारत की संस्कृति है।

उद्घाटन सत्र में राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष डॉ बीएन सिंह और राष्ट्रीय संरक्षक डॉ. प्रवीण भावसर ने देश के विभिन्न हिस्सों से आए प्रतिनिधियों को आरोग्य भारती की गौरवशाली यात्रा और भविष्य की रूपरेखा से अवगत कराया। मंच पर राष्ट्रीय महामंत्री सुनील जोशी, प्रांत अध्यक्ष डाॅ. एसपी सिंह व सीएमएस के संस्थापक जगदीश गांधी मौजूद थे। मध्यान्ह के बाद बैठक के द्वितीय सत्र में केंद्रीय आयुष आयुक्त राजेश कोटेचा ने आरोग्य मित्र प्रशिक्षण के दौरान कई अहम बातों का ख्याल रखने संबंधी जानकारी दी।

इस दौरान अन्य वक़्ताओं ने ”इलाज से बचाव बेहतर” के मूलमंत्र पर चलने और आगामी वर्ष की कार्ययोजना कर विचार विमर्श किया। बैठक में कर्नाटक, बंगाल, केरल, असम, बिहार, झारखंड, तेलंगाना, महाराष्ट्र, आंध्रप्रदेश सहित भारत के सभी राज्यों के प्रतिनिधि शामिल रहे। रविवार को बैठक के दूसरे दिन आरोग्य भारती के ये प्रतिनिधि वर्ष भर के लिए 24 विषयों पर 750 से अधिक जिलों की कार्ययोजना तय करेंगे। जिसके बाद सभी अपने-अपने क्षेत्र में सेवा भाव से कार्य करने के लिए वापस जाएंगे।

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